लवी के बहाने सबलेंटिग का खेल

स्टॉल आबंटन में व्यापारियों को छोड़ कांग्रेस और भाजपा में खूब चली बोलियां,सरेआम चला सबलेंटिग का धंधा

ब्यूरो रामपुर बुशहर –आखिर किस बात का अंतरराष्ट्रीय लवी मेला। जब यहां पर व्यपारियों को पीछे धकेलकर भाजपा और कांग्रेस के लोगों ने ही बोली लगानी है। ये गुस्सा व्यपारियों में साफ दिख रहा था। अंतरराष्ट्रीय लवी मेले के स्टॉल आंबटन में सबलेंटिग का खूब धंधा हुआ। देर शाम तक मेला ग्रांउड में खूब हंगामा चलता रहा। बोली लगाने वालों में व्यापारी कम और सबलेटिंग करने वालों की संख्या ज्यादा दिखी। इतना ही नहीं जैसे ही कोई व्यापारी बोली बोलता उसे बोली न लगाने के लिए कई मर्तबा लड़ाई तक की नौबत आ गई। जिसे रोकने के लिए पुलिस का सहारा लेना पड़ा। इस हंगामे को देखते हुए मेला कमेटी ने स्टॉल आबंटन की प्रक्रिया को बंद कर दिया और शुक्रवार सुबह फिर से स्टॉल आबंटन की प्रक्रिया को करने की बात कही। जिसके बाद होटल लाइन की बोली लगाई गई। जिसमें कुछ होटल व्यवसायियों के  कहने पर कि वह हर वर्ष यहां पर स्टॉल लगाते है। लेकिन जैसे ही मौके पर स्टॉल आबंटन की प्रक्रिया को अमल में लाया जाने लगा तो वहां पर भी सबलेंटिग वालो का बोलबाला रहा। एक तरफ से स्टॉल खरीदकर वहीं पर मंहगे दाम पर स्टॉल को बेचने का धंधा सरेआम चला। व्यापारियों का गुस्सा शाम तक इतना बढ़ गया कि उन्होंने प्रशासन को साफ शब्दों में कह दिया कि वह उसी जगह पर स्टॉल लगाएगें जहां पर वह वर्षों से स्टॉल लगाते है। ऐसे में जब मेला सजेगा तो हंगामा होना तय है, वहीं दुसरी और जिस लोगों ने यह सोचकर स्टॉल लिए है कि वह उन स्टॉलों को आगे आंबटित करेंगे उससे स्टॉल मंहगे बिकना तय है। अब वो लोग व्यापारियों को पकड़ने में जुटे है कि अब स्टॉल का मालिक प्रशासन नहीं बल्कि वह है। जानकारी के मुताबिक एक स्टॉल जो 15 से 20 हजार में खरीदा गया है उसे सबलेंटिग कर 60 हजार में बेचा जा रहा है। ऐसे में उन तमाम नियमों को ठेंगा दिखाया जा रहा है जो नियम मेला कमेटी की बैठकों में तय हुए थे। स्टॉल आबंटन में खूब हंगामा हुआ। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि जो बोलीदात्ता थे वह एक दुसरे का गला पकड़ने से भी पीछे नहीं हटे। साफ दिख रहा था कि स्टॉल आबंटन की प्रक्रया पूरी करने में प्रशासन के पसीने छुट गए। देर शाम तक स्टॉल आबंटन की प्रक्रिया चलती रही। जिसमें व्यापारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर था कि उन्हें तो स्टॉल मिले ही नहीं। जबकि स्टॉल की पर्ची लेकर वह लोग घूम रहे है जो व्यापारी है ही नहीं।

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