श्रीनाथद्वारा मंदिर

Nov 16th, 2019 12:20 am

वैष्णव धर्म के वल्लभ संप्रदाय के प्रमुख तीर्थ स्थानों में नाथद्वारा धाम का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। नाथद्वारा दर्शन करने का फल भी सर्वोपरि है। नाथद्वारा धाम का यह स्थान राजस्थान के उदयपुर, सुरम्य झीलों की नगरी से लगभग 48 किलोमीटर दूर राजसमंद जिले में बनास नदी के तट पर स्थित हैं। यहां पर भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप श्री नाथजी का भव्य व विश्व प्रसिद्ध नाथद्वारा मंदिर स्थित है।

नाथद्वारा मंदिर का इतिहास– श्रीनाथ जी की मूर्ति पहले मथुरा के निकट गोकुल में स्थित थी, परंतु जब औरंगजेब ने इसे तोड़ना चाहा, तो वल्लभ गोस्वामी जी इसे राजपूताना (राजस्थान) ले गए। जिस स्थान पर मूर्ति की पुनः स्थापना हुई, उस स्थान को नाथद्वारा कहा जाने लगा। नाथद्वारा शब्द दो शब्दों को मिलाकर बनता है नाथद्वार, जिसमें नाथ का अर्थ भगवान से है और द्वार का अर्थ चौखट से है। तो इस प्रकार नाथद्वारा का अर्थ ‘भगवान का द्वार’ हुआ। इस पवित्र पावन स्थान के बारे में कहा जाता है कि एक बार भगवान श्रीनाथजी ने स्वयं अपने भक्तों को प्रेरणा दी थी कि बस! यही वह स्थान है, जहां मैं बसना चाहता हूं। फिर क्या था डेरे और तंबू गाड़ दिए गए। राजमाता की प्रेरणा से उदयपुर के महाराणा राजसिंह ने एक लाख सैनिक श्रीनाथजी की सेवा में सुरक्षा के लिए तैनात कर दिए। महाराणा का आश्रय पाकर नाथ नगरी भी बस गई, इसका नाम नाथद्वारा पड़ गया।

श्रीनाथजी का मंदिर- नाथद्वारा दर्शन में यहां का मुख्य मंदिर श्रीनाथजी है। यह वल्लभ संप्रदाय का प्रधान पीठ है। भारत के प्रमुख वैष्णव पीठों में इसकी गणना की जाती है। यहां के आचार्य श्री वल्लभाचार्य जी के वंशजों में तिलकायित माने जाते हैं। यह मूर्ति गोवर्धन पर्वत पर व्रज में थी। श्रीनाथजी का मंदिर बहुत बड़ा है, परंतु मंदिर में किसी विशिष्ट स्थापत्य कला शैली के दर्शन नहीं होते। मंदिर बहुत ही साधारण तरीके से बना हुआ है। जहां श्रीनाथजी की की मूर्ति स्थापित है, वहां की छत भी साधारण खपरैलो से बनी हुई है।

नाथद्वारा दर्शन टाइम और तरीका- नाथद्वारा दर्शन करने का स्थान अत्यधिक संकरा है। इसलिए दर्शनार्थियों को बारी-बारी से दर्शन कराया जाता है। श्रीनाथजी के यूं तो आठ दर्शन होते हैं। परंतु कभी-कभी विशेष अवसरों और उत्सवों पर एक आध बढ़ भी जाते हैं।  इन आठ दर्शनों के नाम इस प्रकार है। मंगला, शृंगार, ग्वाल, राजभोग, उत्थान,भोग, संध्या आरती, शयन।

श्रीनाथजी के दर्शन के अतिरिक्त मंदिर में कुछ ऐसे भी स्थल है, जिनमें कोई विशेष मूर्ति नहीं है। फिर भी वह भक्तों के आकर्षण का केंद्र है। उन विशेष स्थानों के नाम इस प्रकार हैं। फूलघर, पानघर, शाकघर, घी घर, दूध घर, मेवाघर आदि। इन स्थानों की विशेषता यह है कि फूलघर में इतने अधिक फूल होते हैं कि हर प्रकार के फूलों के छोटे-बड़े पहाड़ से बन जाते हैं। यही बात पान, शाक, घी, मेवा, आदि स्थानों के संबंध में भी देखी जाती है। नाथद्वारा के दर्शनीय स्थल- नाथद्वारा धाम में श्रीनाथ मंदिर के अतिरिक्त और भी कई मंदिर है। इसके अलावा श्री नाथजी की एक अत्यंत विशाल गौशाला यहां यात्रियों के आकर्षण का केंद्र है।

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