सच्ची व स्थायी खुशी

श्रीश्री रवि शंकर

आज हममें से हरेक खुशी और शांति की तलाश कर रहा है। यह खोज सर्वव्यापी है। आखिरकार दुखी तो कोई भी नहीं रहना चाहता। लोग अलग-अलग तरीकों से खुशियां ढूंढने की कोशिश करते हैं। कुछ इसे धन-दौलत और दुनियावी चीजों में ढूंढते हैं। कुछ इसे यश और प्रसिद्धि में पाना चाहते हैं। अधिकतर लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के द्वारा ही खुशियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। हमारी कोशिश यही होती है कि हम अपनी इच्छाओं को पूरा कर पाएं। हमारा जीवन ऐसे ही गुजरता चला जाता है, जिसमें हम एक के बाद एक अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने में ही लगे रहते हैं। समस्या यह है कि हमारी इच्छाओं का कोई अंत ही नहीं होता। जब हमारी एक इच्छा पूरी हो जाती है, तो हमारे अंदर दूसरी पैदा हो जाती है। जब वो भी पूरी हो जाती है, तो हमारे अंदर कोई और इच्छा उत्पन्न हो जाती है और उसके बाद फिर कोई अन्य इच्छा जाग जाती है। इस तरह हमारा जीवन गुजरता चला जाता है। यह सच है कि आधुनिक संस्कृति हमारे अंदर नई-नई इच्छाओं को पैदा करती है। हम पोस्टरों, होर्डिंग्स, टीवी और रेडियो पर रोज नए-नए विज्ञापन देखते हैं। वह हमें यकीन दिलाते हैं कि अगर हम तुरंत इन चीजों को खरीद नहीं लेते, तो इसका मतलब हममें और हमारे जीवन में कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है। यदि हम इन चीजों पर विचार करें, तो पाएंगे कि यह हमें वो स्थायी खुशियां नहीं देतीं, जिनका हमसे वादा किया जाता है। हम थोड़े समय के लिए जरूर इनसे खुशी हासिल करते हैं, लेकिन इनके खो जाने या नष्ट हो जाने से या रिश्ते-नातों के टूट जाने या दूर हो जाने से, हमें बहुत ही दुःख और पीड़ा सहन करनी पड़ती है। जीवन में किसी न किसी मोड़ पर हमें यह एहसास अवश्य होता है कि बाहरी संसार की खुशियां क्षणिक हैं, यह एक अस्थायी भ्रम है। इस दुनिया की प्रत्येक वस्तु को एक न एक दिन नष्ट अवश्य होना है। अंततः हमें भी एक दिन इस संसार से जाना ही होगा और हम अपनी समस्त प्रिय वस्तुओं को यहीं पीछे छोड़ जाएंगे। क्योंकि हम इनसानों को इस तरह बनाया गया है कि हमारा ध्यान अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने में ही लगा रहता है, इसलिए आवश्यकता है सही प्रकार की इच्छा रखने की। सबसे पहले तो हमें एक लक्ष्य तय कर लेना चाहिए और सही लक्ष्य है प्रभु को पाना। परमात्मा में अपनी आत्मा का मिलाप करवाना। हम अपनी अनमोल सांसों को दुनियावी इच्छाओं की पूर्ति में ही जाया कर देते हैं। अंत में हमें महसूस होता है कि इनसे हमें वो स्थायी खुशियां, प्रेम और संतोष नहीं मिला, जो हम असल में पाना चाहते थे। युगों-युगों से संत-महापुरुष यही बताते चले आए हैं कि सच्ची खुशी हमें अवश्य मिल सकती है, लेकिन उसे हम केवल अपने अंतर में पा सकते हैं। अगर हम बाहरी दुनिया में उसे ढूंढेंगे, तो हमें निराशा ही हाथ लगेगी। यदि हम इस भौतिक संसार में संपूर्णता की तलाश करेंगे, तो वह हमें कभी भी नहीं मिलेगी। सच्ची खुशी पाना इतना भी कठिन नहीं है, जितना हम सोचते हैं। स्थायी खुशी हमें अवश्य मिल सकती है, यदि हम उसे सही स्थान पर खोजें और वह सही स्थान है, जहां आप स्वयं हैं। केवल परमात्मा है सच्ची व स्थायी खुशी। खुशियों का केवल एक ही स्रोत स्थायी है, जो हवा, आग, पानी या मिट्टी से नष्ट नहीं हो सकता। सच्ची व स्थायी खुशी केवल परमात्मा ही है।

 

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