समाज में रुतबे की इच्छा ने बना दिया आईएएस

प्रोफाइल

एसडीएम सोनाक्षी सिंह तोमर

जन्मतिथि : 28 अगस्त, 1990

शिक्षा      : सेंट मैरी कॉन्वेंट हाई स्कूल नैनीताल, उत्तराखंड से जमा दो तक पढ़ाई की, उसके उपरांत दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए इकोनॉमिक्स ऑनर्स किया

आईएएस बैच         : 2016

पिता       :      मुकेश सिंह तोमर

माता       :     पुष्पा तोमर

पति        :      कार्तिकेय दुबे, आईआरएस

जन्म स्थान     : नैनीताल, उत्तराखंड

अब तक किन-किन पदों पर काम

त्रिपुरा सरकार में बीडीओ व एसडीएम के पद पर रही, पंचायती राज में असिस्टेंट सेक्रेटरी के पद पर रही। वर्तमान में एसडीएम पच्छाद के पद पर कार्यरत। उपलब्धियां :  त्रिपुरा में फ्लड रिलीफ  ऑपरेशन में दो महीने तक ऑपरेशन का नेतृव किया, सीईओ के पद पर रहते हुए स्वच्छता अभियान में बढ़-चढ़ कर भाग लिया।

पच्छाद को अभी चंद महीने पहले ही उपमंडल नागरिक  का सरकार की तरफ  से तोहफा मिला तो सोनाक्षी सिंह तोमर को इस नए कार्यालय में पहली महिला एसडीएम बनने का सौभाग्य। इसे संयोग ही कहिए कि अभी हाल ही में पच्छाद निर्वाचन क्षेत्र में हुए उप चुनाव में लोगों ने रीना कश्यप को जिता कर इलाके की पहली महिला विधायक बनाया, साथ ही सोनाक्षी सिंह तोमर के एसडीएम का पदभार संभालने के पश्चात अब इलाके की कमान महिलाओं के हाथ में आ गई है। इससे जहां सरकार के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम को बल मिलेगा, साथ ही महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा, लेकिन नए खुले इस कार्यालय को व्यवस्थित करके सुचारू रूप से चलाने जैसी चुनौतियां भी उनके सामने खूब रहेंगी। अपनी धुन की पक्की व जिस काम को ठान लिया उसे पूरा करके ही दम लेने वाली सोनाक्षी सिंह तोमर को पूर्ण विश्वास है कि वह किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। वर्ष 2016 के आईएएस बैच की अधिकारी सोनाक्षी सिंह का कहना है कि उनकी नजर में सिविल सर्विसेज का मतलब समाज सेवा है। 28 अगस्त, 1990 को जन्मी सोनाक्षी सिंह के पिता मुकेश सिंह तोमर उत्तराखंड पर्यटन विभाग से सीनियर प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हैं जबकि उनकी माता पुष्पा तोमर स्टेट बैंक ऑफ  इंडिया की नैनीताल शाखा में कार्यरत हैं। उनके पति कार्तिकेय दुबे इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज में हैं जबकि उनकी छोटी बहन नीलाक्षी सिंह तोमर का लक्ष्य भारतीय विदेश सेवा में जाने का है। सोनाक्षी तोमर बताती हैं कि विद्यार्थी जीवन में वह एक मिडिओकर स्टूडेंट थीं। उस समय उनका लक्ष्य केवल अपनी पढ़ाई पूरी करना था। सेंट मैरी कान्वेंट हाई स्कूल नैनीताल से जमा दो की परीक्षा पास करने के पश्चात उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए इकोनॉमिक्स ऑनर्स के साथ किया। उनका मानना है कि विद्यार्थियों के जमा दो व स्नातक में अच्छे अंक आने चाहिए, भविष्य में ये काफी मायने रखते हैं। ग्रेजुएशन के पश्चात ही जब आगे करियर चुनने का समय आया तब पिता ने उन्हें आईएएस अधिकारी के कार्य, समाज में उनका रुतबा व राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका की विस्तृत जानकारी दी और उन्होंने आईएएस अधिकारी बनने की ठान ली। अपने चौथे प्रयास में उनको यह सफलता मिली। इस दौरान उन्होंने केवल एक ही लक्ष्य रखा तथा अपना पूरा ध्यान वहीं केंद्रित रखा। युवाओं को संदेश देते उन्होंने बताया कि हमें अपना लक्ष्य निर्धारित करके उसी को प्राप्त करने पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जीवन मंे मिली असफलताओं से हमें घबराने की आवश्यकता नहीं है। पढ़ाई के साथ-साथ हमें नियमित व्यायाम व खेलकूद में भी हिस्सा लेना चाहिए। तनाव दूर करने के लिए संगीत भी एक अच्छा माध्यम है। वह भी पढ़ाई के पश्चात तनावमुक्त होने के लिए पिआनो बजाती थीं। वह पौष्टिक आहार लेने की सलाह देती हैं। सोनाक्षी सिंह तोमर का कहना है कि अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखें। पॉजिटिव सोचना हमें हमारे लक्ष्य को पूरा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुलाकात : व्यक्ति को अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए…

आपके अनुसार आईएएस अधिकारी होने का मतलब क्या है?

आईएएस  अफसर का मतलब समाज सेवा का एक सुनहरा मौका है। जमीन से जुड़े लोगों की समस्या सुनना व समाधान निकाल कर उन्हें मुख्य धारा में लाने का मौका मिलता है। कानून की जानकारी हासिल कर उनका अपने आप भी व लोगों से भी पालन करवाना तथा देश की प्रगति के लिए कार्य करना।

आपने स्कूली शिक्षा और कालेज व विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

जमा दो तक की शिक्षा सेंट मैरी कॉन्वेंट हाई स्कूल नैनीताल से, उसके पश्चात बीए  इकोनॉमिक्स ऑनर्स के साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी से की।

खुद पर कितना विश्वास है और उसकी ताकत कहां से आती है?

मुझमें पहले से ही अपने ऊपर विश्वास था, जो कुछ मैं ठान लेती हूं चाहे कुछ भी हो उसे पूरा करके ही दम लेती हूं। मेरे विचार से व्यक्ति को अपना एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उसे पूरा करने के लिए पुरजोर मेहनत करनी चाहिए। लक्ष्य प्राप्ति में यदि असफलता का सामना भी करना पड़े तो निराश नहीं होना चाहिए, न ही अपना रास्ता बदलना चाहिए बल्कि और कड़ी मेहनत करके लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर होना चाहिए। मेरे माता-पिता का आशीर्वाद,  गुरुजनों का मार्गदर्शन व शुभ चिंतकों की दुआएं मेरी ताकत बनी। इंटरव्यू की तैयारी के समय मेरे पति द्वारा दिए गए टिप्स व इकट्ठा किया गया स्टडी मैटीरियल बहुत लाभकारी सिद्ध हुआ।

कितने प्रयास के बाद आईएएस के लिए चुने गए और उसके पीछे प्रेरणा ?

मुझे अपने चौथे प्रयास में आईएएस बनने में सफलता हासिल हुई। अपने तीसरे प्रयास में मैं इंटरव्यू तक पहुंच चुकी थी, लेकिन मेरी सिलेक्शन नहीं हो पाई। मुझे बुरा जरूर लगा, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और नतीजतन अपने चौथे प्रयास में मुझे सफलता आखिर मिल ही गई। इस दौरान मैंने कहीं भी दूसरी जगह नौकरी नहीं की। सिर्फ  अपने लक्ष्य पर ही ध्यान दिया। लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेरा जुनून ही मेरी प्रेरणा का स्रोत रहा।

आपने कब और कैसे सोचा कि आप को आईएएस ही बनना है ?

स्कूल व कालेज के समय में एक मिडिओकर स्टूडेंट रही। उस समय मैंने अपनी स्कूल व कालेज की पढ़ाई पर ही ध्यान दिया। मेरे पिता उत्तराखंड टूरिज्म में सीनियर मैनेजर के पद पर थे। उनका संपर्क काफी उच्च अधिकारियों से रहा। उन्हीं से मुझे आईएएस अधिकारी के कर्त्तव्यों, पावर व समाज मंे उनकी स्थिति का पता चला और ग्रेजुएशन के बाद मैंने आईएएस अधिकारी बनने का लक्ष्य निर्धारित किया ।

आपने सिविल सेवा परीक्षा के दौरान कौन से विषय चुने और इसके पीछे क्या कारण था?

सोशियोलॉजी विषय के साथ परीक्षा पास की। क्योंकि मेरी इस विषय में गहरी रुचि थी, दूसरे एक आईएएस अधिकारी को समाज के हर वर्ग के लिए कार्य करना होता है। इसलिए अपने समाज के बारे में जितनी ज्यादा जानकारी होगी उतनी ही कार्यकुशलता बढ़ाने में सहायक होगी। वैसे इस परीक्षा के प्रतिभागियों को अपनी रुचि के मुताबिक ही विषय का चयन करना चाहिए तभी वे दिल से परीक्षा की तैयारी करेंगे जो उन्हें सफलता की सीढ़ी तक पहुंचाने में सहायक होगा।

यहां तक पहुंचने के लिए दिनचर्या क्या रही। किताबों के अलावा और किस-किस सामग्री का सहारा लिया ?

मेरी दिनचर्या सामान्य थी। मैं टॉपिक के हिसाब से ही पढ़ाई का समय मैनेजमेंट करती थी। इसी के साथ सोशल फंक्शन भी अटेंड करती थी। यदि किसी दिन किसी वजह से पढ़ाई को पूरा समय न दे पाई तो अगले दिन टाइम मैनेजमेंट करके उसे कवर कर लेती थी। तैयारी के लिए किताबों के अलावा न्यूज पेपर भी पढ़ा, सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए योजना पत्रिका व सरकार की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी काफी सहायक सिद्ध हुई। बाकी पढ़ाई के पश्चात तनावमुक्त रहने के लिए मैं संगीत सुनती थी। मुझे पियानो बजाने का भी शौक है, यह भी मुझे रिलेक्स करने में सहायक सिद्ध हुआ।

आजकल कोचिंग क्लासेज का प्रचलन काफी बढ़ रहा है । क्या सफलता पाने के लिए कोचिंग क्लास जरूरी है या हम खुद भी  सफलता पा सकते हैं?

वैसे तो खुद ही पढ़ना चाहिए। आजकल तो इंटरनेट व यू ट्यूब जैसे कई माध्यम हैं, जिनसे हम खुद ही जानकारी जुटा सकते हंै। फिर भी यदि आपका कोई विषय कमजोर है तो कोचिंग लेने में कोई बुराई नहीं है । बड़ी कोचिंग क्लासेस की अपेक्षा छोटी ट्यूशन क्लासेज जिनमें स्टूडेंट्स कम हों, ज्यादा लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं ।

आपकी कार्यशैली आम आफिसर की तरह है या कुछ अलग हट कर?

रुटीन वर्क तो सभी की तरह है। कानून के अनुसार काम करने में विश्वास है। किसी के बेवजह दबाव के अंदर काम करना मुझे पसंद नहीं है। वहीं स्टाफ  के वरिष्ठ व कनिष्ठ सभी वर्गों से सामंजस्य बिठा कर टीम वर्क के रूप में कार्य करने का मेरा प्रयास रहता है ।

जो युवा आईएएस अफसर बनने का सपना देख रहे हैं, उनको आपका क्या सुझाव है ?

मेरा सुझाव है कि पहले ग्रेजुएशन तक अपनी पढ़ाई अच्छी तरह करें। प्लस टू व ग्रेजुएशन के अंकों का प्रतियोगी परीक्षा में काफी महत्त्व है। उसके उपरांत यूपीएससी के सिलेबस को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा मेन विषय का चयन अपनी रुचि के अनुसार सोच-समझ कर करें। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि यदि किसी प्रतिभागी ने किसी विषय में अच्छे अंक लिए तो हम भी वही करंे। हर मनुष्य में अलग-अलग खासियत होती है। सफलता के लिए यह आवश्यक है कि हम अपनी प्रतिभा को पहचानें, जो भी प्रश्न याद करें उसे लिख कर हमेशा देखें। जब आप यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो अपना सारा ध्यान यहीं केंद्रित रखें। न्यूज पेपर, मैगजीन, योजना पत्रिका के साथ-साथ सरकार की वेबसाइट व यू ट्यूब से भी जानकारी जुटाएं। साथ ही थोड़ा समय व्यायाम, खेलों या संगीत को भी दें। यह आपको तनावमुक्त रखने में सहायक होगा। इसी के साथ अपने खानपान का भी ध्यान रखें, जंक फूड की बनिस्बत पौष्टिक आहार लें और छोटी-छोटी असफलताओं से निराश न होकर अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अग्रसर रहंे। आपको सफलता अवश्य मिलेगी।

– संजय राजन, सराहां

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