सियाचिन में हुए हिमस्खलन में कुनिहार का जवान शहीद

सात साथियों संग आया था चपेट में, छह की मौत

कुनिहार(सोलन) – सियाचिन में उत्तरी ग्लेशियर के पास हुए भारी हिम-स्खलन के कारण बर्फ के नीचे दबकर सोलन जिला के कुनिहार कस्बे का जवान शहीद हो गया है। कुनिहार के समीप गांव दोची का 22 वर्षीय जवान मनीष ठाकुर करीब दो वर्ष पूर्व ही भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट में भर्ती हुआ था। सनद रहे कि लद्दाख क्षेत्र के सियाचिन ग्लेशियर में सोमवार दोपहर बाद भारी हिम-स्खलन हुआ था। इस दौरान पेट्रोलिंग पर निकले भारतीय सेना के छह जवान व दो पोर्टर इसकी चपेट में आ गए थे। करीब 19 हजार फुट की ऊंचाई वाले इस बर्फीले इलाके में सैनिकों के फंसने की खबर समीप की ही एक भारतीय पोस्ट पर तैनात उनके साथियों ने आर्मी मुख्यालय में दी। आर्मी ने तुरंत हेलिकाप्टर की मदद से राहत कार्य आरंभ किया तथा सभी आठ जवानों को सैन्य अस्पताल में पहुंचाया गया, लेकिन इन आठ में से छह जवानों की मौत हो गई और सिर्फ दो को ही बचाया जा सका। शहीद हुए इन सैनिकों में कुनिहार के दोची गांव का जवान मनीष ठाकुर पुत्र रामसरूप ठाकुर भी शामिल था। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरा क्षेत्र गमगीन हो गया। शहीद की माता मीरा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है तथा पिता रामसरूप भी बेसुध से हो गए हैं। शहीद मनीष का एक बड़ा भाई है। दादी को अपने पोते की शहादत पर यकीन नहीं हो पा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार शहीद सैनिक का पार्थिव शरीर हेलिकाप्टर से बुधवार प्रातः 10 बजे चंडीगढ़ लाया जाएगा और फिर वहां से पैतृक गांव पहुंचाया जाएगा। जहां उसका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। शहीद के चाचा जगदीश सिंह ने बताया कि मनीष ने चार दिन में पैतृक गांव दोची आना था, क्योंकि वह दीपावली को भी घर नहीं आ पाया था। सेना में भर्ती होने से पहले तक भी वह अपने पिता के साथ ही घर में सोता था। शहीद के मासड़ भरतराम व चाचा बाबुराम ने बताया कि सोमवार रात करीब नौ बजे सैन्य अधिकारियों का फोन आया था कि सियाचिन में हुए हिमस्खलन में कुछ सैनिकों की कैजुअल्टी हो गई है, जिनमें मनीष भी शामिल है। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि शहीद का पार्थिव शरीर सियाचिन से लेह लाया जाएगा, उसके बाद हेलिकाप्टर के माध्यम से चंडीगढ़ पहुंचाया जाएगा। जवान मनीष के शहीद होने की सूचना मिलते ही अर्की से तहसीलदार संतराम शर्मा व एसडीएम कार्यालय से परविंद्र वर्मा सुबह ही सैनिक के घर पहुंच गए थे व परिजनों को ढांढस बंधाया।

सेना के लिए छोड़ दिया था दादा का अंतिम संस्कार

मनीष ठाकुर का सेना के प्रति इतना लगाव था कि उसने सेना में जाने के लिएअपने दादा की अंतिम यात्रा को भी नजरअंदाज कर दिया था। दरअसल, मनीष जब भर्ती हुआ तो उसकी ज्वाइनिंग 11 दिसंबर, 2017 को थी, लेकिन उसके दादा स्व. नारायण सिंह की 10-11 दिसंबर की रात को ही मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद भी वीर मनीष ठाकुर ने राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि माना व अंतिम संस्कार में शामिल होने की जगह वह ज्वाइनिंग देने चले गए थे।

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