हिमाचल में फूड प्रोसेसिंग में संभावनाएं ज्यादा

इन्वेस्टर्स मीट में शिक्षा मंत्री बोले, यूनिट स्थापित होने से बढ़ेगा बेहतर रोजगार

धर्मशाला – हिमाचल में फूड प्रोसेसिंग की दिशा में काम करने की संभावनाएं अनेक हैं। प्रदेश में मीट प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की जाए, तो हिमाचल में इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को बेहतर रोजगार उपलब्ध हो सकता है। ग्लोबल इन्वेस्टर मीट के फूड प्रोसेसिंग, डेयरी डिवेलपमेंट, मैन्यूफेक्चरिंग को लेकर आयोजित सेक्टरल सेशन का आयोजन किया गया। इस सेशन की अध्यक्षता प्रदेश शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने किया। सेशन को संबोधित करते हुए भारत सरकार के कृषि एवं पशुपालन विभाग मंत्रालय से सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी तरुण श्रीधर ने पहाड़ी  राज्य हिमाचल के उत्पादों पर विशेष रूप से निवेशकों को आकर्षित करते हुए फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल में दूध की कमी नहीं है, लेकिन इसका फायदा यहां के लोग उठा नहीं पाते हैं। उन्होंने कहा कि फूड प्रोसेसिंग की सुविधा न होने से 16 प्रतिशत उत्पाद खराब हो जाते हैं। आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं, तो 31 हजार 486 करोड़ रुपए के फल-सब्जियां, जबकि 19 हजार करोड़ के अन्य उत्पाद बिना प्रोसेसिंग सुविधा के चलते खराब होते हैं। हिमाचल में पाए जाने वाली मछली की भी ग्लोबल स्तर पर अच्छी मार्केट बन सकती है। यहां दिक्कत केवल प्रोसेसिंग यूनिट न होने के चलते उत्पादों के रखरखाव व ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं मिल पाती है। उन्होंने निवेशकों से इस क्षेत्र में हिमाचली उत्पादों के प्रोसेसिंग के लिए आगे आने का आह्वान किया। इस दौरान नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद, चीफ व्हिप नरेंद्र बरागटा, खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम गुलेरिया, स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डा. सुरेश सोनी, मनदीप कौर, ओंकार चंद शर्मा, संजय गुप्ता सहित अन्य उपस्थित रहे। सत्र के दौरान पोल्टी और फार्मिंग, मछली उद्योग को बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई।

मीट प्रोसेसिंग प्लांट शुरू होने से बेहतर कारोबार

हिमाचल में मिल्क प्रोडक्शन काफी है, लेकिन इसकी प्रदेश में लिमिटेड मार्केट होने के चलते व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी इसका लाभ नहीं मिल पाता। वहीं राज्य में 20 लाख से अधिक भेडें़ व बकरियां हैं। ऐसे में मीट प्रोसेसिंग प्लांट को शुरू किया जाए, तो इस क्षेत्र में भी कारोबार का बेहतर विकल्प खुल सकता है।

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