11 साल से बांध प्रबंधन की अनदेखी से विस्थापित खफा

संगड़ाह – गिरि नदी पर बनने वाले 26 किलोमीटर लंबे रेणुकाजी से विस्थापित होने वाले 1142 के करीब परिवारों के हितों का ध्यान रखने के लिए विस्थापित संघर्ष समिति ने डैम मैनेजमेंट तथा प्रदेश सरकार के प्रति नाराजगी जताई। उपमंडल संगड़ाह के गांव सींऊ में गुरुवार को हुई रेणुकाजी बांध विस्थापित संघर्ष समिति की बैठक में वर्ष 2008 से अब तक एक भी विस्थापित परिवार का पुनर्वास न होने तथा उनकी जायज मांगों की अनदेखी को उजड़ने वाले परिवारों के साथ अन्याय करार दिया गया। संघर्ष समिति के अध्यक्ष योगेंद्र कपिला तथा पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष एवं समिति संयोजक प्रताप तोमर की मौजूदगी में हुई उक्त बैठक में डैम से उजड़ने वाले किसानों के पुनर्वास अथवा घर बनाने हेतु दी जा रही मात्र सात लाख के करीब की राशि को ऊंट के मुंह में जीरा बताया गया। समिति सदस्यों ने यहां जारी बयान में कहा किए इतने में संगड़ाह अथवा आसपास के कस्बों में मकान बनाने के लिए जमीन भी नहीं मिल रही है। समिति ने उक्त राशि बढ़ाने तथा हर विस्थापित परिवार को पांच बीघा जमीन दिए जाने संबंधी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। समिति पदाधिकारियों ने बयान में कहा कि प्रदेश सरकार अथवा बांध प्रबंधन द्वारा पूर्ण रूप से विस्थापित होने वाले मुजारों अथवा खेतिहर मजदूरों को न तो कानूनन मुआवजा दिया गया और न ही उनके पुनर्वास के लिए जरूरत के मुताबिक सहायता की जा रही है। समिति ने दिल्ली को 23 क्यूमैक्स पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए बनाए जाने वाले इस बांध की जद में आने वाले 34 गांव के 1142 परिवारों को अब तक श्रेणी वार पहचान पत्र तक न दिए जाने तथा इन्हें परियोजना में रोजगार न दिए जाने के लिए भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा किए उपायुक्त सिरमौर अथवा बांध प्रबंधन द्वारा अधिग्रहण की जाने वाली जमीन की अधिक्तम कीमत भी मात्र अढ़ाई लाख रुपए बीघा तय की गई थी तथा बाद में प्रदेश उच्च न्यायालय में केस दायर किए जाने के बाद उन्हें सात लाख रुपए बीघा से ज्यादा दाम मिल सके। विस्थापित समिति ने जल्द उनकी मांगों की तरफ ध्यान न दिए जाने की सूरत में फिर से संघर्ष की भी चेतावनी दी। बैठक में डूब क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों के विस्थापितों ने भाग लिया।

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