80 नहीं, अब 70 साल में भी देवदर्शन

लॉप रही योजना में बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में प्रदेश सरकार

शिमला  – भाषा संस्कृति विभाग की ‘देवदर्शन योजना’ जो फ्लॉप हो गई थी, को फिर से सिरे चढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार बड़ा फेरबदल करने जा रही है। इसमें देवदर्शन करवाने के लिए आयु सीमा को 80 से घटाकर 70 वर्ष की जा रही है। वहीं, यात्रा के दौरान डाक्टर द्वारा मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट को बदलकर अब सेल्फ टेस्टेड मेडिकल रिपोर्ट भी मान्य मानी जाएगी। इस प्रस्ताव को प्रदेश सरकार को सौंपा गया है। सूचना है कि जल्द ही संशोधित फाइल पर सरकार की मुहर लग जाएगी। गौर हो कि प्रदेश में ‘देवदर्शन योजना’ का लाभ अभी तक कोई भी बुजुर्ग नहीं उठा पाया है। दो वर्षों से योजना में कोई भी आवेदन नहीं आने के बाद इसे संशोधन करने के लिए प्रदेश सरकार क ो फाइल को सौंपा गया है। देखा जाए तो भाषा संस्कृति विभाग की इस योजना को प्रदेश में काफी बड़ा झटका लगा है, क्योंकि विभाग द्वारा जनवरी, 2018 से लेकर आवेदन की डेट बढ़ाने के बाद भी किसी ने भी इस योजना का लाभ उठाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। पिछले वर्ष दिसंबर में इस योजना की अधिसूचना जारी की गई थी। इस यात्रा के लिए कुछ रूट तय किए गए थे। यह यात्रा शिमला से शुरू होकर ज्वालामुखी, चामुंडा, बज्रेश्वरी, चिंतपूर्णी, बगुलामुखी व नयनादेवी मंदिर से होकर वापस शिमला में पूरी होनी तय की गई थी। इस यात्रा के लिए पैकेज राशि 9450 रुपए निर्धारित की गई थी, जिसमें 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को यात्रा के लिए 50 प्रतिशत की छूट यानी 4725 रुपए देने तय थे। 80 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को निःशुल्क यात्रा करवाई जानी थी। उनके साथ एक पारिवारिक संबंधी अथवा पंजीकृत परिचर को भी 50 प्रतिशत की छूट अनुमत रखी गई थी। इस योजना में आवदेनकर्ता की वार्षिक आय एक लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए थी। बताया जा रहा है कि इस योजना के तहत आय सीमा में भी बदलाव किया जाने वाला है।

विभाग की तैयारी पूरी

अगले वर्ष इस योजना को सुचारू रूप से चलाने की पूरी तैयारी भाषा विभाग करने वाला है। इसको लेकर प्रदेश सरकार ने भी विभाग को निर्देश जारी किए हैं कि प्रदेश में देवदर्शन योजना को अब फेल न किया जाए तथा इसकी कमियों को तुरंत दूर किया जाए।

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