अफसरों को पास से करोड़ों का चूना

कैग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, रियायतों के दुरुपयोग पर रेलवे को फटकार

नई दिल्ली – नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने रेल यात्री किरायों में रियायतों विशेषकर रेलवे अधिकारियों को मिलने वाले विशेष पास के दुरुपयोग के कारण करोड़ों रुपए के नुकसान के लिए रेलवे को फटकार लगाई है और रियायतों को युक्तिसंगत और उनकी नियंत्रण प्रणाली को प्रभावी बनाने की सिफारिश की है। संसद के दोनों सदनों में सोमवार को पेश की गई कैग की रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 में रेलवे के कुल यात्रियों में से 11.45 प्रतिशत ने विभिन्न प्रकार की रियायतों का उपभोग किया, जिसमें रेलवे को किराए से होने वाली आय 8.42 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार इन तीन साल के दौरान लगभग 21.75 करोड़ यात्रियों ने तकरीबन 7418.44 करोड़ रुपए की रियायत हासिल की। रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक रियायत वरिष्ठ नागरिक श्रेणी में 37.2 प्रतिशत और रेलवे अधिकारियों एवं मानार्थ पास धारकों को 52.5 प्रतिशत दी गई। कुल रियायत का अधिकांश लाभ वातानुकूलित श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्रियों ने उठाया। ऑडिट के अनुसार 23 प्रतिशत वरिष्ठ नागरिकों ने एसी-2 और एसी-3 में कुल रियायत राशि का 52 प्रतिशत का लाभ उठाया। वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वैच्छिक रूप से रियायत छोड़ने की अपील का कोई खास असर नहीं हुआ। रिपोर्ट में विशेष पासों पर होने वाली यात्राओं में पास के भारी दुरुपयोग के मामलों का खुलासा हुआ।

3016 पासों में गड़बड़

ऑडिट के अनुसार तीन साल के दौरान 3016 पासों के पर उन्हीं स्टेशनों के बीच अनेक बार बुकिंग के मामले सामने आए हैं। इनमें 30567 यात्रियों को आरक्षण दिया गया और 11552 यात्रियों की बुकिंग गड़बड़ पाई गई। इन 11552 यात्रियों में 487 यात्रियों ने एक ही दिन एक ही खंड पर एक से अधिक गाडि़यों में आरक्षण कराया हुआ था।

फर्स्ट क्लास में ज्यादा धांधली

लेखा रिपोर्ट में ऐसे कई उदाहरण पास नंबर सहित दिए गए हैं। ये पास फर्स्ट क्लास पास के अधिक हैं, जो बड़े अधिकारियों के नाम जारी होते हैं। लेखा रिपोर्ट में अवैध नंबरों वाले पासों से आरक्षण के सैकड़ों मामलों को उजागर किया गया है। कैग ने रेलवे को इस बात के लिए फटकार लगाई है कि उसके पास यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) में  पास नंबर के दुरुपयोग को रोकने के लिए कोई तकनीकी प्रावधान नहीं है।

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