जनता की सेवा करना था लक्ष्य, इसलिए बने एचएएस

By: Dec 11th, 2019 12:22 am

प्रोफाइल

एचएएस निशांत कुमार

जन्मतिथि : 5 दिसंबर, 1994

शिक्षा      : जमा दो अरुणोदय कुल्लू से, ग्रेजुएशन डिग्री कालेज कुल्लू 

एचएएस बैच   :   2019

पिता           :       राजेंद्र सिंह

माता           :   आशा कुमारी

जन्म स्थान            :  गांव छतरी, सराज, जिला मंडी

हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा में इस वर्ष के टॉपर रहे निशांत कुमार कड़ी मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य की बदौलत इस मुकाम पर पहंुचे हैं। निशांत चाहते तो इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर  किसी बड़ी कंपनी में लाखों की नौकरी कर रहे होते, लेकिन उनके अंदर स्कूल के समय से अंकुरित हो चुके समाज सेवा के बीज ने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया।निशांत कुमार ने जमा दो की परीक्षा तो साइंस के साथ उत्तीर्ण की, लेकिन उसके बाद ग्रेजुएशन में आर्ट्स विषय को चुन लिया, क्योंकि उनका लक्ष्य मल्टीनेशनल कंपनियों का कैबिन नहीं, बल्कि समाज सेवा के लिए एक अधिकारी को मिलने वाली कुर्सी व जिम्मेदारी थी। निशांत ने गे्रजुएशन करने के बाद लगातार चार बार एचएएस की परीक्षा दी और सिर्फ इसी तरफ अपना ध्यान रखा। उनका मकसद प्रशासनिक अधिकारी बनना था और तब तक निशांत रुके भी नहीं। एक बार उनका चयन बीडीओ के रूप में भी हो गया, लेकिन उन्होंने उसे भी ठुकरा दिया। अब निशांत कुमार को उपमंडल अधिकारी बनकर सेवा करने का मौका मिलेगा।निशांत कहते हैं कि उन्होंने जमा दो से पहले ही यह सोच लिया था कि आगे चल कर समाज में बदलाव और सेवा के लिए काम करना है। सराज विधानसभा क्षेत्र के गांव छतरी में पिता राजेंद्र सिंह व माता आशा कुमारी के घर पांच दिसंबर, 1994 को निशांत कुमार का जन्म हुआ था। निशांत के पिता स्टेट सीआईडी में हैं और माता घर संभालती हैं। निशांत की बहन मोनिका की अभी हाल में ही शादी हुई है। निशांत के माता-पिता और अन्य परिजनों के साथ ही उनकी दादी बिंदू देवी भी अपने पोते की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रही हैं। निशांत कहते हैं कि उनके हर प्रयास में माता-पिता, परिजन, साथियों व अध्यापकों का बहुत सहयोग मिला है।

मुलाकात :सफलता का कोई शार्ट कट नहीं…

आपने कब सोचा कि एचएएस बनना है और आईएएस की तरफ क्यों नहीं गए?

 जमा दो की पढ़ाई के दौरान ही मेरे मन में समाज के लिए काम करने की भावना पैदा हुई थी। इसलिए मैंने जमा दो के बाद अपनी पढ़ाई बदल दी। चाहता तो इंजीनियरिंग भी कर सकता था, लेकिन मैं साइंस से आर्ट्स में आ गया। अपने प्रदेश में सेवा करने का मन में सपना है। इसलिए आईएएस की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

आप किस प्रयास में सफल हुए और कितनी बार  प्रतियोगिता में भाग लिया?

चौथे प्रयास में सफलता हासिल की। दूसरे प्रयास में बीडीओ के रूप में चयन हो गया था, लेकिन मन में कुछ और करने की चाहत थी, तो बीडीओ की नौकरी नहीं की।

आपने स्कूली शिक्षा, कालेज तथा विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

जमा दो की पढ़ाई अरुणोदय कुल्लू से की और उसके बाद गे्रजुएशन डिग्री कालेज कुल्लू   से प्राप्त की। इसके बाद लॉ में एडमिशन भी ली, लेकिन बाद में इसे ड्रॉप कर दिया।

खुद पर कितना विश्वास है और इसकी ताकत कहां से आती है। पढ़ाई की उपलब्धियां क्या रहीं ?

खुद पर विश्वास था, तभी मंजिल तक पहुंचा। मंजिल शुरू से ही स्पष्ट थी। समाज का विकास, लोगों को समस्याओं से मुक्त करना, उनमें  बदलाव लाने के लिए तो  यही सबसे अच्छी जगह है। इसलिए इसी पर हर बार फोकस किया।  शुरू में मैंने आठ -दस घंटे पढ़ाई की थी, पर इस बार मैंने सिर्फ चार घंटे ही हर रोज परीक्षा की तैयारी की। अपने आपको अखबारों, मैग्जीन और अन्य साधनों से अपडेट रखा।

यह कब और कैसे सोचा कि एचएएस अधिकारी ही बनना है?

जमा दो के बाद करियर के बारे में सोचा। तब एक  मन इंजीनियरिंग की ओर, दूसरा समाज सेवा की ओर था, लेकिन इंजीनियरिंग में न जाने के कारण मैंने सोच लिया कि अब समाजसेवा ही करनी है और तैयारी शुरू कर दी।

आपने एचएएस परीक्षा के लिए क्या विषय चुने ?

जियोग्राफी, सोशियोलॉजी मेरे विषय रहे हैं। जियोग्राफी विषय जो कि स्कोरिंग माना जाता है। सोशियोलॉजी व भूगोल की हाई स्कूल की किताबें आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, इसलिए अपने बेसिक्स क्लीयर करना आसान रहा।

सामान्यतः यहां तक पहुंचने के लिए आपकी दिनचर्या क्या रही?

दिन में आठ से दस घंटे लाइब्रेरी में पढ़ाई की और बाद में एक दिन में तीन-चार घंटे ही पढ़ाई की।

परीक्षा की तैयारी के लिए किताबों के अलावा किस सामग्री का सहारा लिया?

दूसरे और तीसरे प्रयास में मैंने बहुत कड़ी मेहनत की थी।  बस अपने आपको अखबारों, मैग्जीन और अन्य साधनों से अपडेट रखा। सभी प्रयास सेल्फ स्टडी से दिए हैं। कभी कोचिंग नहीं ली।

आजकल कोचिंग क्लासेज का चलन बढ़ रहा है। क्या सफलता पाने के लिए कोचिंग क्लास जरूरी है?

 मैंने कभी कोचिंग नहीं ली। मेरा मानना है कि अगर आप अपनी पोस्ट और लाइफ की सोचें, खुद की मेहनत भी आपको मंजिल दे सकती है, कोचिंग आपको मदद जरूर कर सकती है, पर इसे एग्जाम क्वालिफाई करने का शॉर्टकट नहीं माना जा सकता। क्या पढ़ें और क्या नहीं, ये आप जरूर समझ सकते हैं। आजकल कोचिंग इंटरनेट के माध्यम से भी मिल रही है जो काफी उपयोगी हो सकती है, क्योंकि आप अपनी पसंद के विषय अपने समय अनुसार पढ़ सकते हैं। हां अगर आपके विषय डिफ्रेंट रहे हैं तो आप कोचिंग ले सकते हैं।

जो युवा एचएएस की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए आपका क्या सुझाव है?

आज का समय बहुत चैलेंज वाला और कम अवसरों वाला है। इसलिए युवा पीढ़ी हर अवसर के लिए कड़ी मेहनत करे। सबसे पहले इस परीक्षा के लिए जुनून पैदा करें। पॉजिटिव सोच बेहद जरूरी है, वहीं कठिन परिश्रम के अलावा कोई भी शॉर्ट कट नहीं। हां सबसे अधिक जरूरी है कि असफलताओं में धैर्य न छोड़ें। कमियों का आकलन कर उन्हें दूर कर जुनून से जुट जाएं। तैयारियों को बोझ मत समझिए। इस तैयारी को एन्जवॉय करेंगे तो सफलता आपके कदम चूमेगी, दोस्तों से बात करिए, उनसे भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

    -अमन अग्निहोत्री, मंडी

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