तीसा-भरमौर-सलूणी में बिजली की तारें टूटने से अंधेरे में गुजारा कर रहे ग्रामीण

चंबा – जिला के तीसा व भरमौर और सलूणी उपमंडल मुख्यालय और दूरस्थ गांवों सहित कई हिस्सों में भारी बर्फबारी के कारण तारें टूटने से करीब 700 गांवों में अंधेरा छा जाने से ब्लैक आउट की स्थिति बनकर रह गई है। बिजली व्यवस्था ठप होने से ग्रामीणों को बर्फीली रातें दीये की रोशनी में काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। बर्फबारी के कारण बिजली बोर्ड चंबा मंडल के अधीन पडने वाले सात सौ ट्रांसफार्मर बंद होकर रह गए हैं। बर्फबारी के कारण बोर्ड को गत दो दिनों में ही करीब आठ करोड रूपए का नुकसान उठाना पडा है। जानकारी के अनुसार बर्फबारी के कारण भरमौर उपमंडल में बिजली बोर्ड को काफी नुकसान उठाना पडा है। बर्फबारी के कारण भरमौर की 33केवी लाइन पर गैहरा के समीप पेडों के उखडकर तारों पर आ गिरने से भरमौर व होली में बिजली आपूर्ति दो दिनों से बंद पड़ी हुई है। बिजली बोर्ड का स्टाफ  33केवी लाइन को रिस्टोर करने के काम में जुटा है। 33केवी टूटने से भरमौर व होली के तमाम ट्रांसफार्मर बंद पडे़ हुए हैं। तीसा उपमंडल में भी बिजली बोर्ड को काफी नुकसान हुआ है। तीसा उपमंडल में अस्सी के करीब ट्रांसफार्मर बंद होकर रह गए हैं। जिससे उपमंडल की दूरस्थ पंचायतें मंगली, बैरागढ, देवीकोठी, टेपा, सनवाल, थनेईकोठी, सेईकोठी व जुंगरा में बिजली आपूर्ति ठप होकर रह गई है। इन क्षेत्रों में बर्फबारी ने बिजली की तारों को खासा नुकसान पहुंचाया है। तीसा उपमंडल में बिजली बोर्ड के 95 ट्रांसफार्मर बंद होकर रह गए हैं। इसके अलावा बर्फबारी के कारण राख उपमंडल के 70 ट्रांसफार्मर बर्फबारी के कारण लाइन टूटने से बंद हो गए हैं। बिजली बोर्ड उपमंडल दो के अधीन पडने वाले काफी हिस्से में भी बर्फबारी से लाइनें टूटने व खंभे उखड़ने से बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। बिजली बोर्ड के डलहौजी मंडल के सलूणी उपमंडल में भी बर्फबारी के कारण दूरस्थ गांव में बिजली आपूर्ति ठप होकर रह गई है।  उधर, बिजली बोर्ड चंबा मंडल के एक्सईएन योगेश शर्मा ने बताया कि भारी बर्फबारी के कारण तीसा व भरमौर उपमंडल में विघुत आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। बर्फबारी के कारण बोर्ड का आठ करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि बर्फबारी के कारण बंद सात सौ ट्रांसफार्मर में दो सौ को दोबारा से चालू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बिजली आपूर्ति बहाली कर लोगों को राहत पहुंचाने के लिए बोर्ड स्टाफ के अलावा ठेकेदार की लेबर को भी फील्ड में उतार दिया गया है।

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