धर्मशाला में शीत सत्र की तैयारियां

धर्मशाला  – विधानसभा के शीतकालीन सत्र के लिए प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला में तैयारियां शुरू हो गई हैं। सभी विभागों को अपना जिम्मा संभालने के निर्देश जारी किए गए हैं। मंत्रियों विधायकों से लेकर अधिकारियों एवं मेहमानों के लिए अलग-अलग कमरों की बुकिंग व तमाम अन्य इंतजाम किए जा रहे हैं। विश्राम गृहों की रेनोवेशन से लेकर बिजली, पानी सहित अन्य तमाम तरह के प्रबंध किए जा रहे हैं। इसके लिए संबंधित विभाग अपने-अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। प्रदेश की दूसरी राजधानी का प्रशासन हर माह नई जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयारियों में जुट जाता है। पहले उपचुनाव, खेल गतिविधियां, फिर इन्वेस्टर्स मीट और अब विधानसभा का शीतकालीन सत्र करवाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सरकार भले ही यहां दूसरी राजधानी के लिए नए कार्यालय खोलने से लेकर तमाम अन्य औपचारिकताएं पूरी न करे, लेकिन धर्मशाला प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा एवं महत्त्वपूर्ण केंद्र बन गया है। यहां राजनीति, स्पोर्ट्स, शैक्षणिक और अन्य तमाम तरह की गतिविधियां प्रदेश के अन्य स्थानों की अपेक्षा अधिक होती हैं। यही वजह है कि अब दूसरी राजधानी में काम करने वाले अधिकारी भी यहां स्टाफ की कमी व सुविधाओं के अभाव में दिन व दिन बढ़ती गतिविधियों से परेशान होने लगे हैं।

बिना स्टाफ मैनज करना चैलेंज

कम स्टाफ और संसाधनों के बीच सारे हालत को मैनेज करना किसी चुनौती से कम नहीं है। बड़े एवं प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के लिए दिन-रात व्यवस्थाएं जुटाने का काम करना पड़ता है। बावजूद इसके खामियां सामने आने के बाद डांट डपट से अधिकारी व कर्मचारी परेशान हो जाते हैं। उधर बदले जमाने में वीआईपी की डिमांडों को पूरा करना भी प्रश्ड्डासन के समक्ष बड़ी चुनौती बन गया है। भले ही बाहर सादगी के बड़े-बड़े दावे होते हों, लेकिन सत्ता का मजा हर कोई लेना चाहता है, जिसके चलते दबाव और खर्च बढ़ रहे हैं।

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