पंचायती राज अधिनियम में होगा संशोधन

विधानसभा शीत सत्र में विधेयक लाने की तैयारी में प्रदेश सरकार, मसौदा तैयार

शिमला – प्रदेश सरकार पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन करने की तैयारी में है। पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ  राजनीतिक शिकायतों पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन के लिए विधानसभा शीत सत्र में विधेयक लाएगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पंचायतीराज विभाग ने इसको लेकर मसौदा तैयार कर दिया है। मसौदे को स्वीकृति के लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री को सौंपा जाएगा। इसके पश्चात प्रदेश सरकार से इसकी मंजूरी ली जाएगी। राज्य में पंचायत प्रतिनिधियों विशेषकर पंचायत प्रधान के खिलाफ  बड़ी संख्या में अनियमितताओं व अन्य तरह की शिकायतें आती हैं। यह भी देखने में आया है कि पंचायत चुनावों में हारने वाला, जीतने वाले व्यक्ति के खिलाफ  शिकायत करता है। भारी संख्या में इस तरह की शिकायतें आने के कारण विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों का अधिकांश समय इन मामलों को निपटाने में गुजरता है। इनमें से अधिकांश शिकायतों में चार्जशीट नहीं बनती है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार संशोधित नियम को ठोस बनाएगी। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में पंचायतों का विकास अलग से करने के लिए प्रदेश सरकार ने पंचायत विकास योजना तैयार कर रही है। ऐसे में पंचायतों का विकास अब सरकार नहीं, बल्कि पंचायतों में रहने वाले लोग तय करेंगे। उनके पास अगर खाली जमीन है, वहां पर पानी का टैंक, खेत, बागीचा या डेयरी यूनिट स्थापित करना चाहते हैं, तो इसके लिए केंद्र सरकार पैसा देगी। पंचायत की खाली जमीन को वन क्षेत्र के रूप में विकसित करवाना चाहते हैं, तो भी केंद्र से बजट मिलेगा। इन सब कार्यों के लिए उसे अब अपना पैसा नहीं लगाना पड़ेगा, बल्कि इन सब कार्यों के लिए केंद्र सरकार की पंचायत विकास योजना के तहत पैसा मिलेगा। राज्य का पंचायती राज विभाग इसकी नोडल एजेंसी होगी। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पंचायत की विकास योजना के आधार पर केंद्र सरकार बजट का प्रावधान करेगी। पंचायतों में वर्षों से खाली जमीन को सदुपयोग में लाने के लिए केंद्र ने राज्य सरकार को विकास योजना तैयार करने को कहा है।

पोल्ट्री, डेयरी फार्म के लिए केंद्र देगा मदद

पंचायत विकास योजना के तहत अगर कोई व्यक्ति अपनी जमीन पर पोल्ट्री फार्म, डेयरी फार्म सहित दूसरी अन्य इकाइयां स्थापित करना चाहता है, तो इसके लिए भी केंद्र आपकी मदद करेगा। भूमि विकास से लेकर यहां लगने वाली इकाइयों में काम भी स्थानीय लोग करेंगे। इससे गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार मिल सकेगा।

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