पर्यटन को गांव तक पहुंचाएंगे, रोजगार लाएंगे

By: Dec 13th, 2019 12:03 am

सीएम बोले,चार नए पर्यटन स्थल विकसित करने पर फोकस; गगल एयरपोर्ट पर बड़ा विमान उतार कर रहेंगे, मंडी एयरपोर्ट का दो हफ्ते में एग्रीमेट

धर्मशाला  – मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि प्रदेश में पयर्टन को विकसित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा टूरिस्ट आएं, इसके लिए सरकार ने नई टूरिज्म पालिसी तैयार की है। सरकार पर्यटन को गांव की ओर ले जाकर रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। राज्य में चार नए स्थान विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी की दृष्टि से सरकार कांगड़ा एयरपोर्ट पर बड़ा प्लेन उतारकर ही छोड़ेगी।  इसके बाद मंडी एयरपोर्ट का एग्रीमेंट भी दो सप्ताह के भीतर हो जाएगा। साथ ही उड़ान-थ्री के तहत भी चंडीगढ़, धर्मशाला, शिमला व कुल्लू सहित अन्य प्रमुख स्थानों को जोड़ा जाएगा।  उन्होंने माना कि अभी तक टूरिस्ट डेस्टिनेशन को बढ़ावा देने के लिए जिस स्तर पर काम होना चाहिए था, वह नहीं हुआ है। पूर्व की सरकार ने टूरिज्म पालिसी बनाई, लेकिन उसमें न विजन था, न ही कोई नीति। मुख्यमंत्री ने यह बात सत्र के चौथे दिन नरेंद्र बरागटा द्वारा टूरिज्म पालिसी के तहत लाए गए संकल्प पर चर्चा में कही। सीएम ने कहा कि नई मंजिलें, नई राहें योजना के तहत पहली बार टूरिज्म को विकसित करने के लिए वर्ष 2018 में 50 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया। वर्ष 2019-20 के लिए भी इसमें इतनी ही धनराशि का प्रावधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पुरानी टूरिस्ट डेस्टिनेशन के साथ ही नई डेस्टिनेशन को विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है। आने वाले समय में एशियन विकास बैंक के 1892 करोड़ के प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के पयर्टन स्थलों को विकसित करने की योजना है। इसके अलावा सरकार ने अपने स्तर पर भी नई डेस्टिनेशन, जिनमें चांशल घाटी, बीड़-बिलिंग, जंजैहली व पौंग डैम सहित अन्य क्षेत्रों को विकसित करने के लिए बजट का प्रावधान किया है।  उन्होंने कहा कि हिमाचल को प्रकृति न बहुत सुंदर बनाया है। सरकार का प्रयास है कि इस पालिसी के जरिए हिमाचल को अंतरराष्ट्रीय टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाया जाए, जिससे प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ सकें।

वाटर स्पोर्ट्स के लिए इतना बजट

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीड़-बिलिंग और जंजैहली के लिए 15-15 करोड़, कौल और पौंग डैम में वाटर स्पोर्ट्स और अन्य सुविधाओं के लिए छह-छह करेड़, लारजी डैम के लिए 3.72 करोड़ का बजट रखा है।

धार्मिक पर्यटन पर काम

स्वदेश दर्शन के 87 करोड़ और धार्मिक सर्किट के लिए 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। चिंतपूर्णी मंदिर के स्वरूप सहित अन्य सुविधाओं के लिए 45 करोड़ की डीपीआर केंद्र को भेजी गई है। प्रदेश में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए होम स्टे योजना के तहत कमरों की सख्यां तीन से बढ़ाकर चार की गई है।

पालिसी और बेहतर बनाई जाए

चर्चा में सत्तापक्ष और विपक्ष के 19 सदस्यों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान सत्तापक्ष के सदस्यों ने जहां सरकार के प्रयासों को सराहते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में टूरिज्म की संभावनाओं और उसके विकास के लिए सरकार का ध्यान दिलाया,  वहीं विपक्ष के सदस्यों ने सरकार की इस पालिसी को और बेहतर करने पर जोर दिया।

पर्यटन को पंख लगाने के लिए विधायकों का विजन

टी टूरिज्म निखारने की जरूरत

हिमाचल के पर्यटन विस्तार पर चर्चा करते हुए पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल ने कहा कि पर्यटन पालिसी 2013 कांग्रेस सरकार भी लाई थी। अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए परिर्वतन लाने की आवश्यकता है। हिमाचल में टी-टूरिज्म की अपार संभावनाएं है। टी-टूरिज्म से हर एक एकड़ पर पांच लोगों को रोजगार मिल सकता है।

चार क्षेत्रों तक सिमट गया पर्यटन

देहरा के विधायक होशियार सिंह ने कहा कि पर्यटन हिमाचल की रीढ़ है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय पटल पर मात्र शिमला, मनाली, धर्मशाला और डलहौजी के नाम पर पर्यटन सिमट कर रह गया है। प्रदेश में एक मात्र चिडि़याघर गोपालपुर है। फिश एक्यूरेम नहीं है और न ही यंहा के जलाशयों में वाटर स्पोर्ट्स और टूरिज्म को विकसित किया जा रहा है।

सुरेंद्र शौरी का सुझाव

बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी ने कहा कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को यूनेस्को से धरोहर का दर्जा मिला है, लेकिन हम उसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित नहीं कर पाए हैं। नेशनल पार्क का क्षेत्र बहुत बड़ा है, लेकिन कम क्षेत्र में अधिक चीजें दिखाकर पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं। बंजार में ट्राउट फिश का भी कारोबार है, ऐसे में कई तरह से पर्यटन को विकसित कर सकते हैं।

नेगी बोले, छोटे क्षेत्र प्रोमोट करने होंगे

किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि छोटे-छोटे स्थानों को विकसित कर पर्यटन को प्रोमोट किया जाता है।

साच पास विकसित किया जाए

विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने कहा कि हिमाचल एक ऐसा राज्य हैं, जंहा 12 माह तक बर्फ रहती है। रोहतांग पास में जैसे वाहनों की कतारें है, उसी तर्ज पर साच पास को विकसित किया जा सकता है। कनेक्टिविटी बढ़ाने पर साच पास व जोत सहित चंबा के अन्य क्षेत्र विकसित करने चाहिए। उन्होंने चंबा के प्रवेश द्वार पर सांस्कृतिक द्वार बनाए जाएं, जिससे पर्यटक आकर्षित हों।

कैसिनो खोले जा सकते हैं

 सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि हिमाचल स्विट्जरलैंड से भी सुंदर है। उन्होंने कहा कि पर्यटन पर बजट का प्रावधान किया जाना चाहिए, यंहा कैसिनो खोले जा सकते हैं और चार किलोमीटर के क्षेत्र पर्यटन के लिए चिन्हित किए जा सकते हैं। हिमाचल में जंगल, नदियां और पहाड़ सैलानियों को आकर्षित करते हैं, लेकिन सुविधाएं देने की आवश्यकता है।

इंडो-तिबेतन रोड को रिव्यू करें

विधायक विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि ओल्ड इंडो-तिबेतन रोड को रिव्यू कर पर्यटन सर्किट बनाया जाएं। लवी मेले को भी पर्यटन से जोड़कर काम किया जा सकता है। उन्होंने एग्रो टूरिज्म में भी अनेक संभावनाएं हैं। प्राचीन मंदिरों की शैली को बदलने के बजाय बढ़ावा देना चाहिए।

धारें ट्रैकिंग से जोड़ी जाएं

नाचन के विधायक विनोद कुमार का कहना है कि शिकारी देवी मंदिर सहित आधा दर्जन क्षेत्रों में ट्रैकिंग साइट के रूप में और विकसित किया जा सकता है। उन्होंने धारों को उचित प्रयोग ट्रैकिंग स्थल बनाने पर जोर दिया।

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