फिल्म सिटी की पॉलिसी से कलाकार खुश

कुल्लू ने सराही मुख्यमंत्री की पहल, लोकल कलाकारों को प्राथमिकता देने की रखी मांग

कुल्लू – हिमाचल को सरकार फिल्म सिटी बनाने की पॉलिसी तैयार करने में पहल कर रही है। इस विषय में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बीते रविवार को  पर्यटन नगरी मनाली में महानायक अमिताभ बच्चन से भी चर्चा की है। मुख्यमंत्री ने भी उस दौरान खुलासा किया है कि हिमाचल में फिल्म सिटी को धरातल पर उतारने के लिए पॉलिसी तैयार की गई है। वहीं, इस संदर्भ में जब ‘दिव्य हिमाचल’  ने  कुल्लू के प्रसिद्ध कलाकारों से इस पॉलिसी के बारे में राय जानी तो कलाकार भी बेहद खुश दिखे, लेकिन यहां के कलाकार यह चाहते हैं कि फिल्म सिटी को धरातल पर उतारने के प्रारंभिक कदम से ही पहाड़ी राज्य हिमाचल के प्रसिद्ध कलाकारों  को प्राथमिकता में लिया जाए, ताकि अपने हिमाचल में फिल्म सिटी बनने से यहां की संस्कृति को गीत-संगीतों  से संजोए रखने वाले प्रसिद्ध कलाकारों के साथ-साथ यहां की उभरती हुई प्रतिभाओं को भी बेहतरीन मौका मिल सके। इस बारे में जब  हिमाचल ही नहीं, बल्कि हिमाचल के बाहर भी प्रसिद्ध हुई पहाड़ी फिल्म ऊझी रा खापरा एलबम के प्रसिद्ध नायक, संगीतकार एवं पेशे से अधिवक्ता गोपाल शर्मा से बातचीत की, तो उन्होंने सरकार की इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  का यह सराहनीय कार्य है। उनका कहना है चाहे  हिमाचल की राजधानी शिमला की बात हो या पर्यटन के लिए विश्वभर में विख्यात कुल्लू-मनाली की बात करें तो  इन हिल स्टेशन को दशकों से फिल्म सिटी के रूप में उपयोग किया जा रहा है। यहां पर बालीवुड, हॉलीवुड की फिल्म हस्तियां अपनी फिल्मों का फिल्मांकन करती रही हैं। मौजूदा दिनों की बात करें तो यहां पर महानायक अमिताभ बच्चन, अभिनेता रणबीर कपूर ब्रह्मास्त्र फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं, यह स्वागत योग्य है। अब सरकार ने जो फिल्म सिटी बनाने का कदम उठाया है, इससे पहाड़ी राज्य को आने वाले समय में शुभ संकेत हैं। गोपाल शर्मा कहते हैं कि अधिकतर फिल्मों की शूटिंग मनाली में होती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो फिल्म सिटी बनाने की पहल शुरू कर दी है, इसके प्रारंभिक कदम में हिमाचली प्रसिद्ध कलाकारों को लिया जाए। फिल्म सिटी में जो फाउंडर मेंबर चुने जाएंगे, उसके चयन में यहां के कलाकारों को प्राथमिकता में लिया जाना जरूरी है, जिससे यहां के कलाकारों को भी बालीवुड, हालीवुड फिल्मी हिस्तयों की तरह अपनी हिमाचली संस्कृति को प्रोमोट करने का मौका मिलेगा। उन्होंने इन सुझावों के साथ सरकार से यह भी आग्रह किया है कि जो भी कलाकार ठेठ प्राचीन गीत-संगीत पर कार्य कर रहे हैं, उन कलाकारों को सम्मान और प्रोत्साहन मिलना जरूरी है।

You might also like