भरुडी गांव आज भी सड़क से कोसों दूर

डलहौजी – उपमंडल की ग्राम पंचायत शेरपुर का गांव भरुड़ी गांव आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी सड़क सुविधा से महरूम है। जिस कारण गांव में किसी के बीमार हो जाने की स्थिति में उपचार के लिए ग्रामीणों को पालकी के सहारे मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। इसके साथ ही सड़क सुविधा न होने के कारण रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं को गांव तक पहुंचाने में मुश्किलें पेश आती हैं। जानकारी के अनुसार बीते मंगलवार को भी भरुड़ी गांव में छह माह से गर्भवती महिला बेबी देवी पत्नी संदीप कुमार की अचानक तबीयत बहुत बिगड़ गई। जब महिला की हालत बिगड़ी तो उस समय गांव में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो महिला को पालकी में उठाकर अस्पताल ले जाए। मुश्किल लोगों को इकट्ठा कर महिला को पालकी में उठाकर अस्पताल ले जाया गया। गनीमत रही कि लोग समय पर बेबी देवी को अस्पताल तक पहुंचा पाए। ग्रामीणों में संदीप कुमार, अजय कुमार, राज कुमार, किशन कुमार, अनिल कुमार, सुनील, कमल, किशोर, धर्मचंद, धर्मेंद्र, कमलेश, गिलमो, राणो देवी, पिंकी, पुन्नी व लांबी देवी आदि की माने तो यह पहला मौका नहीं था जब इस तरह की विकट समस्या पेश आई हो। अकसर मरीजों को पालकी में बिछाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। लोगों ने सरकार व लोक निर्माण विभाग से प्राथमिकता के आधार पर भरुड़ी गांव के लिए संपर्क मार्ग बनाने की गुहार लगाई है। उधर, लोनिवि डलहौजी मंडल के अधिशाषी अभियंता सुधीर मित्तल का कहना है कि भरुड़ी पुल से भरुड़ी गांव के लिए संपर्क मार्ग विधायक प्राथमिकता में है। मगर स्थानीय लोग मार्ग के लिए अपनी निजी भूमि देने को तैयार नहीं हैं। लोग सड़क निर्माण में आ रही अपनी निजी भूमि विभाग के नाम कर दें तो सड़क निर्माण का रास्ता साफ  हो सकता है।

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