मीरा की राह में बार-बार ‘दल बदल’ बनेगा ‘रोडा’

शिमला – नगर निगम शिमला की सरदारी के लिए भले ही सांगटी वार्ड से पार्षद मीरा शर्मा दावेदारी जता रही हो, मगर बार-बार दल बदलना उनकी राह में रौडा बन सकता है। नगर निगम में भाजपा पार्षदों ने मीरा शर्मा के खिलाफ जंग शुरू कर दी है। यह ऐसी जंग है, जो महापौर और उपमहापौर की कुर्सी के लिए मीरा शर्मा दावेदारी जताने के बाद शुरू हुई। सांगटी से भाजपा पार्षद मीरा शर्मा इससे पूर्व दो अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव जीत कर आई। पिछले कई वर्षों तक वे माकपा की पार्षद रह चुकी थी। उसके बाद 2017 के नगर निगम चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का दामन थामा। नगर निगम में प्रतिनिधित्व करती रही। उन्हीं दौरान मीरा शर्मा शिमला जल प्रबंधन निगम में नौकरी के चलते उन्होंने पार्ष पद से इस्तीफा दिया था। बाद में जब साांगटी वार्ड के लिए उपचुनाव हुए तो उसे ठीक पहले मीरा शर्मा ने भाजपा से हाथ मिला लिया था और उपुचनाव भी जीत गई। आज मीरा शर्मा सांगटी वार्ड से भाजपा समर्थित पार्षद हैं। ऐसे में भीतरखाते भाजपा के अन्य पार्षद यह नहीं चाह रहे हैं कि मीरा शर्मा को नगर निगम में हॉट कुर्सी मिले। हालांकि इसका फैसला सरकार और संगठन ने ही करना है। नगर निगम शिमला में 34 में से 23 पार्षदों वाली भाजपा में कुर्सी की जंग इस कद्र है कि हर कोई कुर्सी की आस लगाए बैठे हैं। भाजपा समर्थित 23 में से 17 पार्षदों को कुर्सी की आस जगी है। मात्र छह ऐसे पार्षद हैं जिन्हें महापौर और उपमहापौर की कुर्सी की लालच नहीं हैं। नगर निगम के इस अढ़ाई साल के कार्यकाल में महापौर और उपमहापौर दोनों के पद पर सामान्य वर्ग के पार्षद को ही जिम्मेवारी मिलनी है। यही वजह है कि इस बार दोनों पदों के लिए हर कोई तार जोड़ रहे हैं। गौरतलब है कि नगर निगम शिमला में महापौर का पद अगले अढ़ाई साल के लिए एसटी के लिए आरक्षित है, लेकिन शिमला में एसटी वर्ग के लोगों की संख्या पांच प्रतिशत से भी कम है। इसे देखते हुए एसटी वर्ग के लिए नहीं, बल्कि सामान्य वर्ग के लिए होगा। जिसमें महिला या पुरूष कोई भी महापौर बन सकता है। निगम शिमला में अंतिम अढ़ाई साल के कार्यकाल की सरदारी के लिए भाजपा पार्षदों में सियासी जंग शुरू हो चुकी है। हालांकि 18 दिसंबर को महापौर और उपमहापौर का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है, लेकिन भाजपा पार्षदों ने भीतरखाते लॉबिंग भी शुरू कर दी है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा के कुछ पार्षदों ने शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के साथ समन्वय बनाने लगे हैं। गुरुवार को कुर्सी के चाहवान भाजपा के कुछ पार्षदों ने पार्टी मुख्यालय दीपकमल में संगठन मंत्री पवन राणा से मिलने पहुंचे।

अंतिम 12 दिनों तक चलती रहेगी रस्साकशी

नगर निगम शिमला की हॉट कुर्सी के लिए अब अंतिम 12 दिनों तक रस्सा-कस्सी चलती रहेगी। भले ही नगर निगम में भाजपा पार्षदों की संख्या अधिक हैं, मगर हॉट कुर्सी के लिए अंदर खाते जंग शुरू हो चुकी है। ऐसे में अब 18 दिसंबर से पहले नगर निगम शिमला को नए महापौर और उपमहापौर मिल जाएंगे। जबकि उपमहापौर के लिए पार्षद आरती चौहान सहित चार अन्य पार्षदों में जंग शुरू हो चुकी है। बताया गया कि किसी भी पद के लिए दावेदारी अधिक होने की स्थिति में वोटिंग की भी नौबत आ सकती है। महापौर कुसुम सदरेट का कार्यकाल अढ़ाई साल के लिए है, जो 18 दिसंबर को पूरा होने जा रहा है। नगर निगम एक्ट के मुताबिक पांच साल के कार्यकाल में महापौर दो बार बनेंगे। यानी अढ़ाई-अढाई साल के लिए। पहले अढ़ाई वर्ष के लिए एससी के लिए आरक्षित है।

आज जारी होगी चुनावी अधिसूचना

नगर निगम शिमला में महापौर और उपमहपौर की नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना शुक्रवार को जारी हो सकती है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक शहरी विकास विभाग नगर निगम की आपात बैठक 17 दिसंबर को बुला सकता है। यह पहली बैठक होगी, जिसमें कोरम पूरा होने के बाद ही महापौर और उपमहापौर की नियुक्ति होगी। मगर किसी कारणवश कोरम पूरा नहीं हाता है तो दूसरी बैठक 18 दिसंबर को होगी, जिसमें कोरम पूरा होना या न होना कोई शर्त नहीं रहेगी। यानी 18 दिसंबर को वोटिंग के माध्यम से भी दोनों पदों को चुना लिया जाएगा। भाजपा सूत्रों के मुताबिक महापौर पद के लिए वर्तमान महापौर कुसुम सदरेट, पार्षद संजीव शर्मा, शैलेंद्र चौहान, उपमहापौर राकेश शर्मा, पार्षद मीरा शर्मा, सत्या कौंडल सहित एक अन्य महिला पार्षद दौड़ में हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक धर्मशाला में नौ से 14 दिसंबर तक चलने वाले विधानसभा शीत सत्र के बाद ही पार्षदों की बैठक बुलाई है।

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