सुप्रीम कोर्ट पहुंचा नागरिकता बिल

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने दी विधेयक को चुनौती, कपिल सिब्बल लड़ेंगे केस

नई दिल्ली – इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) के  राज्यसभा में पारित होने के एक दिन बाद गुरुवार को उच्चतम न्यायालय में विधेयक को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल की। आईयूएमएल ने अपनी याचिका में कहा कि कृपया  सीएबी को गैरकानूनी और निरर्थक घोषित करें। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद  14,15 और 21 का उल्लंघन है। याचिका में दावा किया किया कि सीएबी गैरकानूनी, निरर्थक और असंवैधानिक है। आईयूएमएल ने आरोप लगाया है कि विधेयक संविधान के तहत समानता के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है। शीर्ष न्यायालय के सूत्रों के मुताबिक एक-दो सप्ताह के भीतर याचिका पर सुनवाई के लिए विचार किया जा सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील कपिल सिब्बल मुस्लिम लीग की ओर सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा ने बुधवार को विपक्ष के विरोध के बावजूद सीएबी को अपनी मंजूरी दे दी। राज्यसभा के अनुमोदन के साथ विधेयक को अब संसद की मंजूरी मिल गई है।

19 को देश भर में प्रदर्शन करेंगे वामदल

पांच वाम दलों ने संसद द्वारा बुधवार को पारित नागरिक संशोधन विधेयक (सीएबी) के विरोध में 19 दिसंबर को देश भर में धरना प्रदर्शन करने का फैसला किया है। इसी दिन स्वतंत्रता सैनानी राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला और रोशन सिंह को फांसी दी गई थी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, फारवर्ड ब्लॉक रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और भाकपा माले ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह घोषणा की है। बयान में कहा गया है कि मोदी सरकार ने संविधान विरोधी विधेयक पारित कर देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को तोड़ने और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करने का कदम उठाया है और अब देश मे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर लागू कर देश को तोड़ने का काम कर रही है और हिंदू राष्ट्र बनाने में लगी है।

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