हफ्ते में पांवटा के किसानों ने बेचा 17 लाख का गन्ना

पांवटा साहिब से उत्तराखंड के डोईवाला शुगर मिल में जानी शुरू हुई गन्ने की खेप, अभी तक साढ़े पांच हजार क्विंटल भेजा

पांवटा साहिब – गन्ने की पैदावार के लिए प्रदेश में मशहूर पांवटा दून से उत्तराखंड की शुगर मिल में गन्ना जाना शुरू हो गया है। करीब एक सप्ताह में ही पांवटा साहिब की दो गन्ना सोसायटी के माध्यम से किसानों ने साढ़े पांच हजार क्विंटल गन्ना बेच दिया है, जिससे स्पष्ट होने लगा है कि इस बार पांवटा साहिब दून में गन्ने की अच्छी पैदावार हुई है। जानकारी के मुताबिक पांवटा साहिब से दो गन्ना सोसायटी के मार्फत उत्तराखंड के डोईवाला शुगर मिल में यह गन्ना जाता है, क्योंकि हिमाचल में कोई गन्ना मिल या खंडासरी मिल नहीं है। पहली दिसंबर से गन्ना सोसायटी ने मिल में गन्ना भेजना शुरू कर दिया है, जिसमें अभी तक बद्रीपुर गन्ना सोसायटी से करीब 2500 क्विंटल गन्ना तथा गिरिपार के खोड़ोवाला सोसायटी से तीन हजार क्विंटल गन्ना मिल को भेजा गया है। किसानों को इस बार के दाम का पता नहीं है, क्योंकि मिल से नए रेट नहीं आए हैं। इसलिए फिलहाल गन्ना पिछले साल के रेट से  315 रुपए प्रति क्विंटल उठाया जा रहा है। इस हिसाब से अभी तक पांवटा साहिब के किसान करीब 17 लाख रुपए का गन्ना बेच चुके हैं। वहीं गन्ना उत्पादक किसानों की मानें तो सरकार के उदासीन रवैये से वे हर साल समस्या झेलते हैं। सरकार न तो पांवटा साहिब मं शुगर मिल खोलने पर विचार कर रही है और न ही बाहरी राज्यों से फसल बेचने के दौरान किसानों की दिक्कत दूर कर रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस बार पांवटा में करीब दो हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती हुई है। पिछले साल के मुकाबले गन्ने की खेती क्षेत्रफल के हिसाब से बढ़ी है। इस बार शुरुआती दौर में एक सप्ताह में ही दोनों कांटों से अभी तक करीब पांच हजार क्विंटल गन्ना डोईयावाला मिल में पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि गत वर्ष की तुलना में इस बार गन्ने के उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकती है। हिमाचल किसान सभा के जिला सचिव गुरविंद्र सिंह व भूपेंद्र सिंह ने बताया कि इस बार किसानों ने गन्ने की अच्छी फसल लगाई है। हालांकि ज्यादातर फसल गुड़ बनाने वाले क्रशरों में बेची गई है। अब बची हुई फसल उत्तराखंड की मिल में भेजी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर सुविधाओं के अभाव और राज्य में अपनी शुगर मिल न होने के कारण व सरकार द्वारा समर्थन मूल्य घोषित न करने के कारण भी किसान इस पारंपरिक फसल से धीरे-धीरे मुंह मोड़ने लगे हैं। गौर हो कि पांवटा साहिब में करीब 50 गांवों में गन्ने की व्यापक खेती होती है और करीब 1700-1800 किसान इस खेती के लगे हुए हैं, लेकिन सरकार की अनेदखी के रवैये के चलते अब इस फसल का उत्पादन धीरे-धीरे कम होने लगा है।

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