हॉर्स ट्रेडिंग अच्छी है

By: Dec 10th, 2019 12:05 am

अजय पाराशर

लेखक, धर्मशाला से हैं

टीवी पर दिखाए जा रहे सर्फ के विज्ञापन में टैग लाइन ‘दाग अच्छे हैं’ को दोहराते हुए पंडित जॉन अली ने जब कहा, ‘‘हॉर्स ट्रेडिंग अच्छी है!’’ तो मैं उनके दोहरे चरित्र पर कटाक्ष किए बिना न रह सका और बोला, ‘‘पंडित जी, आज अखबार में सियासी नौटंकी पर छपे अपने लेख में अपने नैतिक मूल्यों के पतन पर गहन चिंता व्यक्त की है और अब कह रहे हैं कि हॉर्स ट्रेडिंग अच्छी है।’’ मेरी बात पर खीसें काढ़ते हुए पंडित जी बोले, अमां यार! हमारे प्रतिनिधि भी तो सौगंध लेते हैं, संविधान, पद और गोपनीयता की। फिर मैंने लेख ही लिखा है, शपथ तो नहीं ली। हमारा देश तो चलता ही राम भरोसे हैं। जिस तरह कण-कण में राम समाए हैं, वैसे ही भ्रष्टाचार कण-कण में समाया हुआ है। मुझे तो लगता है एटम में न्यूरॉन, प्रोटोन और इलेक्ट्रॉन भी रिश्वत लिए बिना नहीं घूमते। ऐसे में अगर हमारे माननीय हॉर्स टेड्रिंग का छोटा-मोटा धंधा कर लें तो क्या हर्ज है? इससे जहां इन गरीबों को चार पैसे मिल जाते हैं, वहीं राजनीतिक दलों को बहुमत से दूर रहने और अकेलेपन का दंश भी नहीं झेलना पड़ता। अब देखो न, जिगरी दोस्त जानी दुश्मन हो गए हैं और जानी दुश्मन जिगरी दोस्त। लेकिन इनकी यह दोस्ती-दुश्मनी स्थायी नहीं है। इनकी करतूतें चाहे कितनी भी काली हों, इनके मन बच्चों की तरह पवित्र और निश्छल हैं। खेल-खेल में अभी ये जिसके गुड्डे-गुडि़या की शादी में शामिल होते हैं, थोड़ी देर बाद वहीं उत्पात मचा देते हैं। अभी जिसके साथ मिलकर रेत के महल बनाते हैं, कुछ समय बाद उसे लात मार कर गिरा देते हैं। तू हारे लिए नैतिकता बौद्धिक विलास की जुगाली हो सकती है, लेकिन इनके लिए सिर्फ विलास है, वह भी नारंगी गांधी जी का। दुनिया में गांधी जी का इनसे बड़ा भक्त कोई नहीं। सत्ता और गांधी जी के लिए ये लोग उत्तरी और दक्षिणी धु्रव होते हुए भी एक हो सकते हैं। तू हें याद है, पिछले दिनों हमारे एक माननीय ने कहा था कि उनकी पार्टी कभी मर्यादा की सीमाएं नहीं लांघती। परंतु उन साहिब ने यह नहीं बताया कि उनकी मर्यादा की सीमा उनके उठाए हर कदम पर एक कदम आगे खिसक जाती है। ऐसे में उल्लघंना का प्रश्न ही कहां उठता है। बस यह तो मृग मरीचिका की तरह आगे बढ़ती रहती है। जनता प्यासी रहती है तो रहे। वैसे भी माननीय जनता की भुखमरी, गरीबी, बीमारी, बेरोजगारी और अनपढ़ता दूर करने की शपथ तो लेते नहीं। वह तो चुनाव में जनता की सेवा करने की शपथ लेकर उतरते हैं। अगर लोग सचमुच सुखी हो गए तो वे सेवा किसकी करेंगे। इसीलिए देश में भुखमरी, गरीबी, बीमारी, बेरोजगारी और अशिक्षा का बने रहना जरूरी है। ‘‘लेकिन, इसमें दाग मिटने वाली बात कहां से आई?’’ मैंने चकित होकर कहा। ‘‘अमां यार! तुम रहोगे भोंदू के भोंदू ही। चुनावी टिकट चाहे रो कर लो या सीनाजोरी से, तलवे चाट कर लो या पैसों से, ब्लैकमेलिंग से लो या जेल से। एक बार जीत गए तो माननीय हो गए। लोग सब कुछ भूल कर, उनके गीत गाना आरंभ कर देते हैं। तमाम अफसर-कर्मचारी, बिजनेस मैन, पत्रकार, आम जनता सब उनके आगे-पीछे घूमते हैं। इससे सिद्ध होता है कि सत्ता के सर्फ से भ्रष्टाचार के सभी दाग आराम से निकल जाते हैं तो हॉर्स ट्रेडिंग बुरी कैसे हुई। इसीलिए मेरे साथ कहो, हॉर्स टे्रडिंग अच्छी है।’’

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