298 सड़कें जाम, अंधेरे में कट रही रातें

मौसम की मार से आवाजाही ठप, प्रदेश भर में 1369 ट्रांसफार्मर ठप

शिमला-हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी कहर बन कर गिर रही है। भारी बर्फबारी ने राज्य में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़कों के बंद होने से लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। राज्य में बर्फबारी के कारण 298 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं, जबकि ट्रांसफार्मर्ज के ठप पड़ने से लोगों को सर्द रातें अंधेरे में काटनी पड़ रही हैं। राज्य आपदा प्राधिकरण से प्राप्त जानकारी के तहत शिमला जोन में सबसे ज्यादा 129 मार्ग यातायात के लिए बंद हैं। इसके अलावा मंडी में 42, कांगड़ा में 121 मार्ग बंद हैं। इसके अलावा नेशनल हाई-वे चार व दो हाई-वे कांगड़ा में बंद पडे़ हुए हैं। राज्य में बर्फबारी के कारण 1369 ट्रांसफार्मर बंद पड़े हुए हैं।  डलहौजी में 112, पांगी-किलाड में 73, चंबा में 450, किन्नौर में 23, निचार में 18, सांगला में 14, कल्पा में 55, मनाली सब-डिवीजन में 108, कुल्लू सब-डिवीजन में 29, थरोट में 11, करसोग में एक, मंडी में 12, शिमला के चौपाल में 331, सिरमौर में 40, रोहडू में 73 और डोडरा क्वार में 19 ट्रांसफार्मर बंद पड़े  हुए हैं।  इससे लोगों को सर्द रातें कड़ाके की ठंड में काटनी  पड़ रही हैं। उधर, राज्य में भारी बारिश व बर्फबारी के चलते नुकसान का आंकड़ा 32 करोड़ से पार हो गया है। इसमें सबसे ज्यादा चपत लोक निर्माण विभाग को लगी है। वहीं, बिजली बोर्ड कोे भी बर्फबारी गहरे जख्म दे रही है। इसके अलावा आईपीएच विभाग को भी नुकसान पहुंचा है।

सराजघाटी की पहाडि़यां सफेद

थुनाग। सराजघाटी में पहाडि़यों पर दो दिन से बर्फबारी का क्रम जारी है। यहां सराजघाटी की ऊंची पहाडि़यां माता शिकारी, शैटाधार, तुंगसीगढ़, स्पेहनीधार, चेत, डाहर, घाट, मगरूगला, रायगढ़, भुलाह, भैंद, कमीशर आदि पर बर्फबारी हुई। माता शिकारी में करीब दो फु ट तक हिमपात दर्ज किया गया। वहीं, शैटाधार में करीब सात इंच तक हिमपात हुआ। इसके साथ ही निचले इलाकों जंजैहली, थुनाग, लंबाथाच, थुनाग, जरोल, शिल्हीबागी, बागचनोगी, भाटकीधार, केलोनाल, चिउणी, रैलचौक, रैनगलू, बगस्याड़, कांडा, केलोधार, कुथाह में झमकर बारिश हुई।

बर्फीले तूफान से सिस्सू सन्न

कुल्लू। प्रदेश के जनजाजीय जिला लाहुल-स्पीति का बर्फबारी के चलते शेष दुनिया से संपर्क कट गया है। वहीं, बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।  उधर, शुक्रवार को लाहुल की चंद्रवैली के तहत आती सिस्सू पंचायत की पहाडि़यों सें बर्फीला तूफान चला, जिस कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल पाए। यह तूफान करीब 11 बजे शुरू हुआ और एक बजे तक चलता रहा। इससे लोगों के घरों के बरामदे भी बर्फ से भर गए हैं, जबकि स्थानों पर पेड़- पौधों के टूटने की भी जानकारी है। हालांकि इस तूफान से किसी तरह के जानी नुकसान की जानकारी नहीं है, लेकिन इस तूफान ने घाटी के लोगों को दहशत में डाल दिया है। वहीं एचआरटीसी ने भी बर्फबारी के चलते लाहुल घाटी के अंदरूनी मार्गों पर बस सेवा बंद कर दी गई है। यहां निगम प्रंबधन ने भी बस सेवा को बंद कर दिया है। जिला मुख्यालय केलांग में आधा फुट के आसपास बर्फबारी हुई है, वहीं अन्य जगहों पर डेढ़ से अढ़ाई-तीन फुट के आसपास बर्फबारी दर्ज की गई है।

प्रचंड ठंड से कांपा किन्नौर

रिकांगपिओ। जनजातीय क्षेत्र जिला किन्नौर में गुरुवार से शुरू हुआ बर्फबारी का दौर शुक्रवार को भी जारी रहा। इससे समूचा जिला शीतलहर की चपेट में आ गया है। किन्नौर के छितकुल, रकछम, कल्पा व रोघी आदि क्षेत्रों में एक फुट से भी अधिक बर्फबारी दर्ज की गई है। वहीं, जिला मुख्यालय रिकांगपिओ छह इंच व किल्बा आदि में दो से अढ़ाई इंच के करीब बर्फबारी दर्ज की गई है। इन दिनों किन्नौर के शीतकालीन स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं होने के कारण बच्चों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में दिक्कतें हो रही हैं। उपायुक्त किन्नौर गोपाल चंद ने बताया कि राष्ट्रीय उच्च मार्ग-5 यातायात के लिए खोल दिया गया है। बताया जा रहा है कि कल्पा लोक निर्माण मंडल के अंतर्गत 40 संपर्क मार्गों में से 15 को शुक्रवार सायं तक यातायात के लिए बहाल कर दिया गया। उन्होंने बताया कि बर्फबारी के कारण जिला में स्थापित 402 विद्युत ट्रांसफार्मरों में से 366 ट्रांसफार्मर सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं। वहीं, सेब की फसल के लिए बर्फबारी को उत्तम माना जा रहा है।

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