आप अपने ‘काम’, भाजपा ‘गद्दार’ मिटाने के सहारे

जल्दी चुनाव प्रचार शुरू कर फ्रंट फुट पर केजरीवाल, पीएम मोदी का उतरना बाकी

नई दिल्ली – दिल्ली विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री केजरीवाल उन कामों पर लड़ रहे हैं,जो उनकी सरकार ने पांच साल में किए हैं। अब उन्होंने घर-घर दस्तक देना भी शुरू कर दिया है। विपक्ष में भाजपा का मुख्य मुद्दा ‘देश के गद्दारों’ के खिलाफ  है। अभी प्रधानमंत्री मोदी का मैदान में उतरना शेष है, लेकिन फिलहाल आम आदमी पार्टी का पलड़ा भारी दिख रहा है।   दरअसल केजरीवाल और ‘आप’ के पक्ष में दिल्ली के औसत वोटर का रुझान इसलिए काफी ज्यादा है, क्योंकि उन्होंने बहुत पहले प्रचार शुरू कर दिया था। केजरीवाल ने अपने हस्ताक्षर सहित गारंटी कार्ड घर-घर भेजे हैं। उनमें आगामी पांच साल के कार्यों की गारंटी दी गई है। मुख्यमंत्री ने अपने हस्ताक्षर करके दिल्ली के तमाम वरिष्ठ नागरिकों, बुजुर्गों को तीर्थ-यात्रा के निमंत्रण-पत्र भी भेजे हैं। फेसबुक पर वह सभी बुजुर्गों को छुट्टी लेकर घूमने का आह्वान कर रहे हैं। तीर्थ-यात्रा का पूरा खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी। केजरीवाल का दावा है कि अभी तक 40 हजार से ज्यादा बुजुर्ग ऐसी तीर्थ-यात्रा कर चुके हैं। इसके अलावा, दिल्ली में बीते दो-तीन महीनों के दौरान असंख्य घरों के बिजली के बिल ‘शून्य’ आए हैं। राजधानी में 200 यूनिट तक बिजली निशुल्क है और बिजली 24 घंटे आती है। किसी भी नागरिक के इलाज का पूरा खर्च दिल्ली सरकार ही उठाती है। केजरीवाल ने ऐसे कई प्रयोग शिक्षा, बुनियादी ढांचे, अनधिकृत कालोनियों आदि के स्तर पर भी किए हैं, लिहाजा आम आदमी उसके पक्ष में लामबंद हो रहा है। अभी तक के तमाम सर्वे भी बता रहे हैं कि ‘आप’ 45-56 सीटें जीत कर सत्ता में वापसी कर सकती है, जबकि भाजपा के पक्ष में 10-12 सीट बताई जा रही हैं। विभिन्न इलाकों, मेट्रो, बसों और चाय की दुकानों पर जो चर्चाएं सुनी जा रही हैं, उनके मुताबिक दलित, पहाड़ी, पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समुदाय एकजुट होकर ‘आप’ के पक्ष में वोट कर सकते हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चेतावनी दी है कि वह उनके साथ दिल्ली के स्कूलों के दौरे करें। उसके बाद भाजपा नेता बयान दें कि स्कूलों का सच क्या है। हालांकि भाजपा ने देर से चुनाव प्रचार शुरू किया, लेकिन वह आक्रामक दिखाई दे रही है। करीब 5000 नुक्कड़ और छोटी-छोटी जनसभाओं के जरिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। हैरत यह है कि दिल्ली में विकास के बजाय ‘शाहीन बाग’ को मुख्य मुद्दा बनाया जा रहा है। गृहमंत्री अमित शाह समेत सभी मंत्रियों के संबोधन शाहीन बाग पर केंद्रित हैं। वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने अमित शाह की मौजूदगी में ही नारा लगवाया था कि देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को। चुनाव आयोग के संबद्ध सीईओ ने उस जनसभा की रपट तलब की है और अनुराग को नोटिस भेजा है। उधर, भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने यहां तक दावा किया है कि यदि 11 फरवरी को भाजपा की सरकार बनी, तो मात्र एक घंटे में ही शाहीन बाग खाली करा लिया जाएगा। सरकारी जमीन पर बनी मस्जिदों को एक महीने के अंदर ही खाली करवा देंगे। भाजपा नेता ‘ऑफ  दि रिकार्ड’ मान रहे हैं कि वे हिंदू वोट बैंक को संबोधित करते हुए एकजुट कर रहे हैं। यानी सांप्रदायिक आधार पर धु्रवीकरण तय करेगा कि दिल्ली चुनाव, अंततः, किस दिशा में जाते हैं।

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