कड़ी मेहनत ने दूसरे ही प्रयास में बना दिया आईएएस अधिकारी

प्रोफाइल

नाम  : अभिषेक वर्मा

पिता : मनोहर लाल वर्मा

माता : मधु वर्मा

बैच  : 2018

जन्म तिथि : 3 मार्च, 1993

जन्म स्थान : सुंदरनगर

शिक्षा :  दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई सेंट एडवर्ड्स स्कूल शिमला, बारहवीं दिल्ली पब्लिक स्कूल रोहणी से। इसके उपरांत कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में, बीटेक की डिग्री भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली से।

अब तक किन-किन पदों पर काम

असिस्टेंट कमिश्नर अंडर ट्रेनिंग, बीडीओ धर्मशाला, बीडीओ रैत, वर्तमान में तहसीलदार नूरपुर के पद पर कार्यरत हैं।

जीवन में असफलताओं को सकारात्मक ऊर्जा के साथ कमियों पर फोकस करते हुए उन्हें दूर कर कामयाबी को कैसे पाया जा सकता है, इसका उदाहरण पेश किया है  आईएएस अधिकारी अभिषेक वर्मा ने। बैच 2018 के आईएएस अधिकारी अभिषेक वर्मा ने तहसीलदार नूरपुर का पदभार संभाल लिया है। वह मूलतः मंडी जिला के सुंदरनगर के निवासी हैं तथा यूपीएससी से सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास करने पर उन्हें हिमाचल कैडर मिला है। नूरपुर में अपना पदभार ग्रहण करने पर उन्होंने बताया कि  यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात अपना गृह प्रदेश मिलने पर वह अपने आप को बहुत सौभाग्यशाली मानते हैं क्योंकि उन्हें अपने प्रदेश के साथ-साथ सबसे बड़े जिला कांगड़ा में अपने प्रोबेशन पीरियड के दौरान कार्य करने का अवसर मिला है। उन्होंने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता तथा अपनी बहन को दिया है। उनकी बहन तथा जीजा भी यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात कर्नाटक में तैनात हैं, जबकि उनके पिता केंद्रीय लोक निर्माण विभाग में अधिशाषी अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने  बताया कि आम लोगों को बेहतर व समय पर सेवाएं उपलब्ध करवाना उनकी प्राथमिकता रहेगी व राजस्व संबंधी मामलों का समय पर व शीघ्र निपटारा करने के भी पूर्ण प्रयास सुनिश्चित किए जाएंगे।

मुलाकात :कोचिंग क्लास सफलता की गारंटी नहीं …

प्रशासनिक अधिकारी बनने का क्या मतलब होता है?

आईएएस अधिकारी बनने का मतलब है देश व देशवासियों की सेवा। यह सामाजिक एवं आर्थिक परिपे्रक्ष्य में बदलाव का साधन है जिससे समाज व राष्ट्र को प्रगति की ओर ले जाया जा सकता है। जनमानस के भरोसे पर खरा उतरते हुए यह एक जिम्मेदारी से परिपूर्ण पद है जिसका निर्वाह पूरी निष्ठा  एवं श्रम से करना ही संभव है।

आपने स्कूली शिक्षा और कालेज व विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

मैंने दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई सेंट एडवर्ड्स स्कूल शिमला से पूरी की तथा बारहवीं दिल्ली पब्लिक स्कूल रोहणी से की।  इसके उपरांत मैंने कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में, बीटेक की डिग्री भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली से पूरी की।

खुद पर कितना विश्वास है और इसकी ताकत कहां से आती है। पढ़ाई की उपलब्धियां क्या रहीं?

खुद पर विश्वास ही सफलता की कुंजी है। इसकी ताकत मुझे अपने माता-पिता द्वारा सिखाए गए मूल्यों और अध्यापकों द्वारा पढ़ाए गए पाठ से आती है।

कितने प्रयास के बाद आईएएस के लिए चुने गए? और इसके पीछे प्रेरणा?

सिविल सेवा परीक्षा में यह मेरा दूसरा प्रयास था जिसमें मेरा 32 वां स्थान आया और मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थान बना सका। इससे पहले, पहले प्रयास में मुझे भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा मिली थी। इसके पीछे प्रेरणा मेरा परिवार है जिसने हमेशा मेरी हर प्रकार से सहायता की एवं बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया।

 यह कब और कैसे सोचा कि आपको आईएएस अफसर ही बनना है?

सिविल सेवा परीक्षा देने का मन मैंने इंटरनशिप करने के बाद कालेज के चौथे वर्ष में बना लिया था। भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्य की विविधता व समाज के लिए काम करने के अवसर ने मुझे आकर्षित किया।

आपने सिविल सेवा परीक्षा के दौरान कौन से विषय चुने और इसके पीछे का कारण?

सिविल सेवा परीक्षा में ऐसा विषय चुनना चाहिए जिसमंे न सिर्फ  आपकी रुचि हो बल्कि आपने उसे पहले भी पढ़ा हो। मेरी गणित में बचपन से ही रुचि थी, अतः मैंने परीक्षा के लिए भी यही विषय चुना।

सामान्यत : यहां तक पहुंचने के लिए आपकी दिनचर्या क्या रही?

परीक्षा की तैयारी के दौरान मेरी दिनचर्या कुछ इस प्रकार थी, तीन-तीन घंटे के तीन सेशन और दो सेशंस के बीच एक घंटे का विराम जिसमें से एक घंटा व्यायाम के लिए और एक घंटा मनोरंजन के लिए होता था।

 वैसे तैयारी में किताबों के अलावा और किस-किस सामग्री का सहारा मिला?

किताबों के अलावा इंटरनेट, अखबार, मैगजीन ने तैयारी में काफी सहायता की।

आजकल कोचिंग क्लासेज का चलन बढ़ रहा है। क्या सफलता पाने के लिए कोचिंग क्लास जरूरी है अथवा हम खुद ही सफलता पा सकते हैं?

आजकल कोचिंग क्लासेज का काफी चलन है, परंतु यह न तो जरूरी है और न ही सफलता की गारंटी है। अगर आपको तैयारी के स्रोतों का पता हो तो आप अपने आप उसे पढ़ सकते हैं। कोचिंग क्लासेज से पैसे और समय दोनों की बर्बादी होती है। तैयारी की सामग्री काफी हद तक इंटरनेट पर भी उपलब्ध है। अतः आप कहीं भी बैठ कर तैयारी कर सकते हैं।

 आपकी कार्यशैली आम आफिसर की तरह ही है या कि कुछ हटके है?

सबकी कार्यशैली भिन्न होती है। मेरे कार्य करने का तरीका व्यक्ति को केंद्र में रख कर एवं उसकी बात सुन कर कार्य करने का है। अपने मूल कार्यों को समयबद्ध तरीके से एवं जवाबदेही तय करके, समाज एवं दफ्तर के सौहार्द वातावरण को बनाए रखकर पूरा करना मेरी कार्यशैली के अभिन्न अंग हंै।

 जो युवा आईएएस अफसर बनने का सपना देख रहे हैं, उनको आप क्या सुझाव देना चाहेंगे?

स्वयं पर विश्वास, परिश्रम व निष्ठा ही सिविल सेवा परीक्षा में सफलता की कुंजी है।

बलजीत चंबयाल, नूरपुर

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