चुनाव से पहले ही कांग्रेस ने मान ली हार?, सिब्बल बोले- अकेले सरकार बनाने के दावे नहीं करने चाहिए

नई दिल्ली  – क्या कांग्रेस दिल्ली में चुनाव से पहले ही हार स्वीकार कर चुकी है? पार्टी की प्रचार समिति के सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल की बातों से तो ऐसा ही लग रहा है। पीटीआई को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस अपने दम पर सरकार बना सकती है? तो सिब्बल ने कहा कि हमें ऐसे बड़े दावे नहीं करने चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि कांग्रेस निर्णायक भूमिका में सामने आएगी। कांग्रेस के एक प्रमुख नेता का यह बयान तब आया जब 70 में से 54 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर न सिर्फ जीत के दावे कर रही है बल्कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और धुर विरोधी बीजेपी को कड़ी चुनौती देने की भी बात कर रही है।

निर्णायक भूमिका में होंगे

क्या कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में आएगी, इस पर सिब्बल ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि हमें ऐसे बड़े दावे करने चाहिए, लेकिन मुझे लगता है कि हम इस चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे।…. संभवत: हमें इतनी पर्याप्त सीटें मिलेंगी कि हम सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।’ यह पूछे जाने पर कि यदि कांग्रेस निर्णायक कारक के रूप में सामने आती है, तो क्या वह आप के साथ हाथ मिला सकती है, सिब्बल ने कहा, ‘पहले परिणाम आने दीजिए। हमारी रणनीति क्या है, यह उसी समय सभी को पता चल जाएगी।’

जामिया-JNU पर चुप क्यों आप?
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और जामिया-जेएनयू में हिंसा मुख्य मुद्दा रहेंगे। उन्होंने साथ ही सीएम अरविंद केजरीवाल पर हमला करते हुए कहा कि इसपर उनकी कमजोर प्रतिक्रिया से अवसरवादिता की बू आती है। सिब्बल ने कहा, ‘वह (केजरीवाल) जामिया (मिल्लिया इस्लामिया) में नहीं आए, वह जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) में नहीं आए। उन्होंने पर्याप्त रूप से बार-बार, मजबूत और खुलकर बयान नहीं दिए।’ उन्होंने कहा कि आस-पास जो कुछ हो रहा है, उसे लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कुछ हद तक कमजोर प्रतिक्रिया ने सही संकेत नहीं भेजे हैं। उन्होंने इससे अवसरवादिता की बू आती है।

हार-जीत में CAA से पड़ेगा असर
सिब्बल ने कहा कि दिल्ली चुनाव में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी बड़े मुद्दे होंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) पर व्यापक हंगामा और विश्वविद्यालय परिसरों में हिंसा चुनाव में बड़ा कारक साबित होंगे, सिब्बल ने ‘हां’ में जवाब दिया।

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