धर्म-जाति पर न हो राजनीति

-रूप सिंह नेगी, सोलन

ऐसा लगता नहीं है कि राजनीतिक दल गाय- गोबर, मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुस्लिम, जात- पात और नेताओं के बेतुके व विवादित बयान, अभद्र भाषा का इस्तेमाल, झूठे बोल, झूठे दावे, कोसने व ठीकरा फोड़ की राजनीति, एक-दूसरे पर कीचड़ उछालना, झूठ को सच बनाने, और सच को झूठ बनाने की कोशिश, अपने को सच्चा, दूसरे को झूठा साबित करने जैसे मुद्दों से बाहर नहीं निकल पा रहे है। सीएए, एनआरसी, एनपीआर पर घमासान और अब दो बच्चों की थ्यूरी, सोशल मीडिया पर हिंदुओं को डर दिखा जाना कि उन की जनसंख्या कम हो गई तो वह खतरे की जद में आ हैं सकते आदि प्रोपोगेंडा करने में क्या औचित्य रहता है। हर भारतीय को यह नहीं भूलना चाहिए कि हमें आजादी कैसे मिली है, और देश इस मुकाम पर कैसे पहुंचा है।

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