नीलाम होंगे ठेके या रिन्यू.. फैसला अगली कैबिनेट में

शिमला – जयराम सरकार के तीसरे वित्तीय वर्ष की एक्साइज पॉलिसी का खाका तैयार है। 16 जनवरी को अफसरशाही ने इसका ड्राफ्ट फाइनल करने के लिए बैठक बुलाई है, जिसके बाद मामला अगली कैबिनेट में भेजा जाएगा। कैबिनेट निर्णय लेगी कि शराब ठेकों के आबंटन को नीलामी करवाई जाए या फिर मौजूदा ठेकों को ही रिन्यू कर दिया जाए। सूत्रों के अनुसार यह तय हो गया है कि अगले वित्त वर्ष में एक्साइज से सरकार दो हजार करोड़ रुपए का राजस्व एकत्र करेगी। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए यकीनन फिर से प्रदेश में शराब के दामों में बढ़ोतरी होगी, यह तय है। सरकार चाहती है कि अगले वित्त वर्ष में एक्साइज पॉलिसी को समय पर लागू कर दिया जाए और इससे जुड़ी सभी तरह की औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाएं, क्योंकि इसमें देरी से फिर नुकसान होता है और शराब ठेकों का आबंटन जल्दबाजी में किया जाता है। जल्दबाजी में सही बोली नहीं लग पाती और नुकसान उठाना पड़ता है। इससे बचने के लिए तय किया गया है कि इसी महीने जब भी कैबिनेट की बैठक होगी, तो उसमें एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी के लिए लाया जाएगा। कैबिनेट को भेजे जाने वाला फाइनल ड्राफ्ट 16 जनवरी को तैयार कर दिया जाएगा, जिसमें सरकार के सामने विकल्प रखे जाएंगे और बताया जाएगा कि किस विकल्प से क्या होगा। कैबिनट के सामने मौजूदा साल के आंकड़ों को भी आबकारी कराधान महकमा रखेगा, जिसकी डिटेल मुख्यालय को पहुंच चुकी है। इसमें बताया जाएगा कि मार्च के अंत में एक्साइज से सरकार को कितना राजस्व आएगा। बता दें कि इस साल के लिए 1500 करोड़ रुपए का टारगेट रखा गया था, जिसकी एवज में 1600 करोड़ रुपए की कमाई होने की उम्मीद जताई जा रही है। अफसरशाही का दावा है कि मौजूदा साल में 100 करोड़ रुपए लक्ष्य से अधिक कमाए जाएंगे।

पैटर्न बदला, बढ़ा राजस्व

मौजूदा वर्ष में सरकार ने नीलामी के माध्यम से शराब ठेकों का आबंटन किया था। पूर्व सरकार रिन्यू करती रही, जिससे पारदर्शिता की कमी रही। पूर्व सरकार ने एक सरकारी कारपोरेशन बनाकर शराब की बिक्री की, लेकिन वह घाटे का सौदा था। जयराम सरकार ने पैटर्न बदलकर राजस्व में इजाफा किया है। अब आगे के लिए किस आधार पर ठेकों का आबंटन कैसे होगा, यह देखना होगा।

हर जगह अलग-अलग हैं शराब के दाम

वर्तमान में शराब के दामों में भी काफी ज्यादा भिन्नता है। वैसे यह तय है कि जब टारगेट बढ़ेगा, तो यहां शराब के दाम बढ़ेंगे, जो कि पहले से ही काफी ज्यादा हैं। शराब के दामों को लेकर यहां लोगों में पहले से नाराजगी है, जिनका मानना है कि दूसरे राज्यों में हिमाचल से सस्ती शराब मिल रही है। यहां सरकार लगातार अपना राजस्व बढ़ाने में लगी है और शराब के शौकीनों पर इसकी मार पड़ रही है।

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