पुस्तक समीक्षा

सिरमौर की ऊंचाई बताता विशेषांक

शिमला से प्रकाशित पत्रिका ‘हिमप्रस्थ’ का अक्तूबर-दिसंबर 2019 अंक सिरमौर जिला विशेषांक के रूप में पाठकों के सामने है। इस पत्रिका के प्रधान संपादक हरबंस सिंह ब्रसकोन, वरिष्ठ संपादक विनोद भारद्वाज तथा संपादक वेद प्रकाश हैं। पत्रिका ने जिला विशेषांक की कड़ी में सिरमौर जिला पर छठा विशेषांक प्रकाशित किया है। इसमें जिले की गौरवमयी संस्कृति, इतिहास तथा परंपराओं को संग्रहित किया गया है। इसमें जिले में वर्ष 1792 से अब तक आए विभिन्न यात्रियों के वृत्तांतों तथा विभिन्न काल खंडों में प्रकाशित पुस्तकों से इतिहास तथा उस वक्त के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को एक स्थल पर प्रकाशित करने का सफल प्रयास किया गया है। विनोद भारद्वाज का आलेख ‘हिमाचल का सिरमौर’ यह बताता है कि आखिर सिरमौर हिमाचल का सिरमौर क्यों है? इसमें मूरक्राफ्ट तथा अन्य विदेशी यात्रियों की सिरमौर यात्रा का विवरण पेश करते हुए उनके अनुभवों को उकेरा गया है। बाल गोविंद, बिमला भारद्वाज, राजेंद्र राजन, केआर भारती, रत्न चंद निर्झर, योगराज शर्मा, ओमचंद हांडा, नेम चंद ठाकुर, अमरदेव आंगिरस, सुभाष चंद शर्मा, गोपाल दिलैक, कांति सूद, चंद्रशेखर वर्मा, वीके शर्मा, मनोहर लाल अवस्थी, पवन बख्शी, डा. मनोज, धर्मेंद्र ठाकुर, मेला राम शर्मा, ओमप्रकाश राही, विद्यानंद सरैक, कृष्ण लाल सहगल, मनोरमा शर्मा, पंकज राग, रजनीश शर्मा, प्यार सिंह ठाकुर, रवि सहगल, राम गोपाल शर्मा, यशपाल कपूर, बाबू राम चौहान तथा वीके शर्मा के आलेख सिरमौर से जुड़े ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक, आर्थिक व सामाजिक पहलुओं को उकेरते हैं। 224 पृष्ठों के इस विशेषांक में पाठकों के लिए पढ़ने को बहुत कुछ है। पत्रिका की कीमत पाठकों की पहुंच में रखी गई है। रंगीन फोटो पाठकों को जरूर आकर्षित करेंगे। पत्रिका का यह विशेषांक आकर्षक बन पड़ा है। सरल भाषा में विशेषांक में कई प्रेरणादायी बातें कही गई हैं। विशेषांक में सिरमौर की कई हस्तियों के योगदान को भी दर्शाया गया है। इतिहास के साथ-साथ जिले की भौगोलिक विविधता को भी इस विशेषांक में उकेरा गया है। आशा है कि पाठकों को यह अंक जरूर पसंद आएगा।

-फीचर डेस्क

साहित्य अमृत की गांधी जी को श्रद्धांजलि

दिल्ली से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘साहित्य अमृत’ का जनवरी 2020 का अंक गांधी विशेषांक के रूप में पाठकों के सामने है। त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी इसके संपादक, श्याम सुंदर प्रबंध संपादक तथा डा. हेमंत कुकरेती इसके संयुक्त संपादक हैं। संपादकीय आलेख स्वराज्य और स्वतंत्रता में संयुक्त संपादक ने इन दोनों के संबंध में गांधी जी के विचारों का खुलासा करने की कोशिश की है। आचार्य विनोबा भावे के लोकनीति और गांधी पर विचार भी संग्रहणीय हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आलेख यह दर्शाता है कि भारत और दुनिया को गांधी जी की जरूरत क्यों है? आनंदीबने पटेल सभी के लिए अनुकरणीय गांधी जी का विराट जीवन, इस विषय पर कलम चलाती हैं। मृदुला सिन्हा ने गांधी जी की महिलाओं के प्रति सोच को उजागर किया है। मनमोहन वैद्य गांधी जी के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ संबंधों की विवेचना करते हैं। कृष्णदत्त पालीवाल विचारों की जमीन पर गांधी जी और बीआर अंबेडकर की तुलना करते हैं। प्रभात झा यह बताते हैं कि गांधी क्यों हमेशा प्रासंगिक बने रहेंगे? लक्ष्मीदास गाय पर गांधी जी दृष्टिकोण की विवेचना करते हैं। रमेश पोखरियाल मूल्यपरक शिक्षा पर गांधी जी के विचारों का खुलासा करते हैं। इसी तरह पुष्पेश पंत खेती और किसानों पर गांधी जी के विचारों की विवेचना करते हैं। महात्मा गांधी छात्रों से क्या कहते हैं, इसका विवेचन सुनील आंबेकर ने किया है।

श्रीकृष्ण कुलकर्णी प्रभावी संचारक के रूप में गांधी जी की भूमिका का जिक्र करते हैं। विंदेश्वर पाठक स्वच्छता के संबंध में गांधी जी के विचारों को उकेरते हैं। बजरंग लाल गुप्ता गांधी जी की अर्थनीति की विवेचना करते हैं। ग्राम स्वराज के बारे में गांधी जी की धारणा को बनवारी जी ने बखूबी उकेरा है। स्वरोजगार, टाल्सटॉय से गांधी जी की तुलना, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, गांधी की पत्रकारिता का भारतीय मॉडल, कश्मीर पर गांधी जी के विचार, पर्यावरण व साहित्य को लेकर गांधी जी का नजरिया भी आलोच्य पत्रिका में बखूबी उकेरा गया है। गांधी जी से जुड़े प्रेरक प्रसंग व कार्टूनों की नजर में गांधीवाद, इसका प्रदर्शन भी इस पत्रिका में हुआ है। 282 पृष्ठों में संकलित इस विशेषांक में गांधी जी की संपूर्ण विचारधारा को जगह मिली है। पत्रिका का भाषा बेहद सरल है तथा मूल्य भी पाठकों की पहुंच में है। कुल मिलाकर कहें तो गांधी जी के जीवन और दर्शन को समझने के लिए इस विशेषांक में बहुत कुछ है। आशा है कि पाठकों को यह विशेषांक पसंद आएगा।

-फीचर डेस्क

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