बच्‍चों के सामने उचित व्यवहार करें

मेरा भविष्‍य मेरे साथ-22

करियर काउंसिलिंग कर्नल (रि.) मनीष धीमान

समय के साथ पुराने हो रहे अच्छे तथा जांचे परखे हथियारों को आला दर्जे एवं आधुनिक उपकरण लगाकर उसकी उम्र एवं काबिलीयत को बढ़ाने की कार्रवाई को रेट्रोफिटमेंट कहा जाता है। सेना में एक बार डीआरडीओ द्वारा बनाए गए आधुनिक उपकरण का टैंक में रेट्रोफिटमेंट के लिए ट्रायल रखा गया और इसके लिए मुझे मेरी यूनिट के कुछ टैंक लेकर ट्रायल साइट पर जाने का मौका मिला। सैनिक व डीआरडीओ के वैज्ञानिक मिलकर काम करते-करते एक-दूसरे को अच्छी तरह जानने लग गए। दिन में काम के बाद रात को वैज्ञानिक मेरे साथ अधिकारी मैस में खाना खाते थे। मैंने महसूस किया कि एक वैज्ञानिक जो कि हर चीज का अच्छा ज्ञान रखता था, न हमारे साथ दोस्ती करता था और न ही हमारे साथ मैस में खाना खाता था। एक दिन मैस हवलदार ने मुझे बताया कि वह वैज्ञानिक हमेशा खाने के साथ एक आम आदमी से ज्यादा शराब अपने टेंट मंगवा लेता है। यह जानकर मैंने हुक्म दिया कि खाना तथा शराब किसी भी टैंट में नहीं जाएगी। उस वैज्ञानिक के टैंट में साफ.-सफाई  के लिए जाने वाले लड़के से पता चला कि वह अब शराब बाहर से ले आता है तथा हर आधे घंटे में पीता है। बाकी वैज्ञानिकों से बात करने से पता चला कि वह डीआरडीओ के गिने चुने और सबसे ज्ञानवान वैज्ञानिकों में से एक है। अगर वह शराब की लत छोड़ दे तो भविष्य का अब्दुल कलाम बन सकता है। यह सब सुनकर मैंने उस वैज्ञानिक से बात करने का मन बनाया और अगले दिन जब वह टैंक पर काम कर रहा था, तो मैं भी उसके साथ काम करने लग गया। शुरू में तो वह फालतू बात नहीं कर रहा था, पर धीरे-धीरे इकट्ठा काम करने पर उससे बात करना शुरू की तो उसने मुझे बताया कि साहब अगर हो सकता है तो मैस से शराब टैंट में ले जाने का हुक्म दे दो। तब मैंने उसको कहा कि आज हम मैस में ही खाना खाते हैं और अगर वह पीना चाहे तो पी ले। तो उसने मुझे बताया कि वह कभी भी किसी के साथ शराब नहीं पीता है। कारण पूछने पर उसने बताया कि  वह एक अच्छे शिक्षित एवं संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता है । जब वह छोटा था तो उसके पिता रोज शाम को अपने दोस्तों के साथ घर में बैठकर मदिरापान करते थे। मेरी मां हमेशा स्नेक्स या फिर खाने के लिए किचन में व्यस्त रहती थी और मैं वेटर की तरह एक-एक करके सारा स्नेक्स उनके लिए लाता रहता था। थोड़ी देर में जब वे सब नशे में हो जाते थे तो गाली-गलौज करना शुरू कर देते थे। इस दौरान अगर कभी मैं या मेरी मां उनके इस व्यवहार का विरोध करते तो घर में लड़ाई होती और कभी पापा हमारी पिटाई भी कर देते और सुबह माफी मांगते, तो मेरी मां कहती थी कि मैं आपको पीने से मना नहीं कर रही, पर आप अकेले पी लिया करो, दोस्तों के साथ मत पिया करो। एक दिन मैंने भी यह जानने के लिए कि इसमें ऐसा क्या है, चुपचाप बोतल निकालकर थोड़ी पी ली। पापा को इसका पता चल गया कि बोतल में  शराब कम है तो उन्होंने मेरी बुरी तरह पिटाई की और कहा तुझे कितनी बार कहा कि यह बच्चों को पीने के चीज नहीं है। जब बड़ा होकर, अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा तो मैं नहीं पूछूंगा जितनी हो पी लेना। मैं पढ़ाई लिखाई कर वैज्ञानिक बन गया, तो मेरे को लगा कि अब मैं शराब पी सकता हूं पर अपनी मां की बात याद कर कि अकेले पीना चाहिए, मैंने रूम में अकेले पीना शुरू कर दी। पर न जाने यह कैसे मेरी आदत बन गई और इतनी बिगड़ गई कि मेरी जरूरत बन गई है। मैं सुबह, दोपहर, शाम शराब पीता हूं, इसके बिना नहीं रह सकता। उसकी कहानी सुनकर मुझे यह बात तो समझ आ गई कि आपके बच्चे वही करते हैं, जो वह देखते हैं। हमें कभी भी वे काम खुद नहीं करना चाहिए जो हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे न करें। इसके लिए चाहे किसी तरह के नशे की बात हो या अपने से बड़ों का आदर सत्कार या मानवता का अनुसरण करना। हर चीज जो किताबों में एक अच्छा इनसान होने की परिभाषा है, उसको जब हम अपनी रियल लाइफ  में जीना शुरू करेंगे तभी हमारी आने वाली जनरेशन उस चीज को सीखेगी, और उसका अनुसरण करेगी। आजकल शादी-विवाह या किसी  फंक्शन में खुशी मनाने के नाम पर नशे का उपयोग सरेआम और सामने किया जाता है और इसे देखकर हमारी आने वाली जनरेशन जो ये सब देख कर बड़ी हो रही है, उन्हें यह सारी चीजें सही लगती हैं। मुझे लगता है कि हमें इस तरह के चलन को बदलने के लिए सही निर्णय लेना चाहिए।

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