समाज और संस्कृति का जोड़ 

-डा. इंदिरा कुमारी, मटौर

आज हर क्षेत्र में उन्नति हो रही है, आधुनिकता का समय है। परंतु ‘आधुनिकता’ किसे कहेंगे? उसे जिसने पुरानी रूढि़वादी सोच को बदलकर एक नई और उन्नत सोच रखी है या फिर वह जिसे समाज आजकल तीव्रता से  अपना रहा है। हर माता-पिता की यही इच्छा है कि हमारा बच्चा बचपन से ही अच्छे से अंग्रेजी में बात करे, हर चीज का ज्ञान हो उसे, चाहे वह कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ता हो या अन्य स्कूल  में और शायद आज के हिसाब से जरूरी भी हो गया है। पर इतना भी जरूरी नहीं कि वह अपनी संस्कृति, अपने समाज से ही अछूता हो जाए। अधिकतर यह देखा जाता है कि बच्चे को संख्या गिनती का हिंदी रूपांतरण पता नहीं होता है और माता-पिता गर्व महसूस करते हैं कि हिंदी में नहीं जानता।  आजकल अधिकांश बच्चों को पता ही नहीं होता है कि मौसम के हिसाब से कौन सी फसल होती है। बच्चे देश का भविष्य हैं और वे ही बच्चे समाज और संस्कृति से जुड़कर देश को उन्नति की ओर ले जाएं तो वास्तव में सही ‘आधुनिकता’ वही होगी।  

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