सरकारें ही दोषी नहीं

-राजेश कुमार चौहान, जालंधर

माना कि देश में बेरोजगारी पर लगाम लगाने के लिए सरकारें नाकाम हैं और इसके लिए इनकी कुछ गलत नीतियां भी जिम्मेदार हैं, लेकिन बेरोजगारी के लिए सत-प्रतिशत सरकारें ही जिम्मेदार हैं, ऐसा भी नहीं है। सबको सरकारी नौकरी मिल जाए ऐसा होना मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन हैं, क्योंकि सरकारी नौकरियों का दायरा सीमित है और बेरोजगारी की समस्या विकराल। और हर कोई बाबू ‘अफसर’ ही बन जाए यह भी संभव नहीं है। जो युवा या अन्य लोग बेरोजगारी के लिए मात्र सरकारों को दोष देते हैं, उनसे कुछ सवाल हैं कि क्या बेरोजगारी के लिए देश की बढ़ती जनसंख्या जिम्मेदार नहीं है? क्या जनसंख्या बढ़ाने के लिए सरकारें कहती हैं? हमारे देश में तो पर्यटन में भी रोजगार के बहुत से अवसर हैं, इसमें क्यों नहीं बेरोजगार युवा अपना रोजगार तलाशते? कुटीर और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकारें प्रयासरत हैं, क्यों युवा वर्ग इसकी ओर लगन लगाकर अपना रोजगार शुरू करने की कोशिश करता? बेरोजगार वर्ग को चाहिए कि वो नौकरी की तलाश के साथ स्वरोजगार या अन्य साधनों में भी रोजगार तलाशना चाहिए। 

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