अमरीका की लाइब्रेरी में हिमाचल का साहित्य

‘अनहद कृति’ के संग्रहण को कैरोलिना में मिलेगी जगह; धर्मशाला कश्मीर हाउस में सजी कवियों की महफिल में दी जानकारी, एकाएक बदले मौसम में और रंगीन हुई वर्कशॉप

धर्मशाला – ‘अनहद कृति’ ने हिमाचल प्रदेश सहित देश भर के लेखकों के साहित्य का संग्रहण किया गया है। अब संग्रहण को अमरिका की लाइब्रेरी कैरोलिना में भी रखा जाएगा। तीन दिवसीय अनहद कृति वर्कशॉप रविवार को धर्मशाला में रचनाकारों को सम्मानित करने और कवि सम्मेलन के साथ संपन्न हुई। वर्कशॉप के अंतिम दिन अनहद कृति के संपादक पुष्पराज चशवाल ने सभी बाहर से आए और स्थानीय रचनाकारों, उनके परिवारजनों व स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। इस मौके पर एसडीएम शाहपुर जगन सिंह ठाकुर भी विशेष रूप से मौजूद रहे। साथ ही हिमाचल की ओर से डा. गौतम व्यथित ने सभी का आभार प्रकट किया। उसके बाद मध्याह्न भोज कांगड़ी धाम के बाद खुले कवि सम्मेलन से मिलवार्तन को आगे बढ़ाने के उपलक्ष्य में रचनाकारों को अपनी पसंदीदा रचनाएं साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया। सहित्यकारों ने अपने-अपने जीवन के अनुभव के आधार पर अपनी रचनाओं का उल्लेख किया, जो बड़ा ही समायिक रहा। रविवार को धर्मशाला के कश्मीर हाउस से सटे धौलाधार में जैसे ही मौसम ने करवट ली, स्थानीय रचनाकार डा. कुशल कटोच ने गड़गड़ाते और चमचमाते घने बादलों का जिक्र अपनी कविता में कर डाला, जिसे बाहर से आए रचनाकारों ने भी सराहा। लखनऊ से आए पूर्व पुलिस महानिदेशक द्विवेदी ने महानगरों की चकाचौंध में प्रवेश करती रेलगाड़ी शीर्षक से अपनी कविता का आगाज किया, जो शहरों में धूल और अफरा-तफरी का वर्णन कर रही थी और पहाड़ों की शांतमयी घाटियों से इसकी तुलना कर रही थी। डा. विजय पुरी ने कांगड़ी गीत में सरकारी में दी जा रही शिक्षा और सुविधाओं का वर्णन किया और इसे उत्तम प्रयास बताया, जबकि डा. शशि प्रभा ने भावनाओं को मन का संचालन करार देते हुए अपनी कविता पढ़ी। इसमें सहित्यकार प्रेमलता पुष्पा ने अपनी रचना सपने की हकीकत को जब जोहड़ जगाता है कोई। अंतिम दिन के कार्यक्रम में हिमाचल सरकार के प्रशासनिक अधिकारी जगन ठाकुर एसडीएम शाहपुर रहे। भाग लेने वालों में अधिकांश वरिष्ठ नागरिक और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा सहित्य जगत में अपना नाम कमाए तथा युवा सहित्याकार रहे।

साहित्यकारों के लिए खास है 2020

अनहद कृति ई-पत्रिका का साहित्याश्र 2020 एवं पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन धर्मशाला में करने के पीछे पुरानी मधुर साहित्यिक स्मृतियां और हिमाचल के विशेषतः धर्मशाला आंचल के जाने-पहचाने व नए युवा रचनाकारों का अनहद कृति से जोड़ना रहा। इसी प्राकृतिक परिवेश से इनकी साहित्य में प्रकाशन की यात्रा आरंभ हुई थी। इसके साथ ही हिमाचल की सौहार्दपूर्ण मिलवर्तन की संस्कृति ने फिर एक बार चिर स्मृतियों को अपने अनहद कृति परिवार के सदस्य रचनाकारों से साझा कर प्रत्यक्षतः साक्षात्कार करवाने का एक सुखद अवसर साहित्याश्र 2020 बन रहा है।

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