कागजी कार्रवाई में उलझी घोटाले की जांच

गगरेट-कृषि सहकारी सभा दियोली में हुए महाघोटाले की जांच पुलिस की कागजी कार्रवाई में उलझ कर रह गई है। इस महाघोटाले की प्राथमिकी गगरेट पुलिस थाना में दर्ज होने के बाद भी जांच प्रक्रिया इतनी धीमी गति से चली कि सभा के खाताधारकों को स्थानीय पुलिस से विश्वास उठने लगा और उन्होंने इसकी जांच का जिम्मा विजिलेंस विभाग को देने की मांग कर डाली। मामला जनमंच के माध्यम से विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज के समक्ष उठाने पर उन्होंने इसकी जांच विजिलेंस विभाग के करवाने के मौखिक आदेश तो दे दिए, लेकिन सरकार के इस लोकप्रिय कार्यक्रम के माध्यम से उठी इस मांग के बावजूद अभी तक मामला विजिलेंस विभाग के पास नहीं पहुंच पाया है। इसी को लेकर खाताधारकों का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा है। पुलिस कार्यप्रणाली से क्षुब्ध खाताधारक मामले में उचित कार्रवाई न होने पर अपना गुस्सा चक्का जाम कर जाहिर कर चुके हैं और पंद्रह दिन के भीतर उचित कार्रवाई न होने पर फिर से उग्र प्रदर्शन करने की धमकी दे चुके हैं, लेकिन इसके तीन दिन बाद भी मामला विजिलेंस विभाग को ट्रांसफर नहीं हो सका है। कृषि सहकारी सभा दियोली के सहकारिता विभाग द्वारा करवाए गए आडिट के बाद ग्यारह करोड़ सत्तर लाख रुपए का घोटाला सामने आया था। इसके बाद सभा के खाताधारकों में हड़कंप मच गया और खाताधारकों को चाह कर भी अपना पैसा नहीं मिल रहा है। इस मामले में सभा के सचिव को निलंबित भी किया जा चुका है और मामला गगरेट पुलिस थाना में दर्ज है। बावजूद इसके जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। अपनी खून पसीने की कमाई को यूं लुटता देख खाताधारक जनमंच के माध्यम से भी इस मामले को उठा चुके हैं, लेकिन विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज के आश्वासन के बावजूद मामला विजिलेंस विभाग को ट्रांसफर नहीं हो पाया। रविवार को इसके विरोध में खाताधारकों द्वारा किए गए चक्का जाम को खुलवाने पहुंचे एसएचओ इंस्पेक्टर हरनाम सिंह द्वारा प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया था कि मामला जल्द विजिलेंस विभाग को सौंप दिया जाएगा, लेकिन अभी तक मामला विजिलेंस विभाग को ट्रांसफर नहीं हो सका है। ऐसे में पुलिस प्रशासन को खाताधारकों के आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। सभा के प्रधान सुरेंद्र सिंह का कहना है कि इस महाघोटाले की सुस्त जांच प्रक्रिया से खाताधारक आहत हैं और वे चाहते हैं कि विजिलेंस विभाग इस मामले की जांच करे। इसलिए इस मामले में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। वहीं, विजिलेंस विभाग के एएसपी सागर चंद्र का कहना है कि अभी तक इस मामले की जांच का जिम्मा विजिलेंस विभाग को नहीं दिया गया है। उच्च अधिकारियों के जो आदेश होंगे उसकी पालना की जाएगी। उधर, एसपी कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन का कहना है कि मामला विजिलेंस विभाग को ट्रांसफर करने के लिए उच्च अधिकारियों को लिखा गया है। जो आदेश आएंगे उसके अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।

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