छह महीने में होगी हिम तेंदुओं की गिनती

वन्य प्राणी विंग की तैयारी, स्वयंसेवी संस्थाओं से भी ली जाएगी मदद

शिमला – प्रदेश में जल्दी ही हिम तेंदुओं की गणना का काम शुरू होगा। यहां पर कितने हिम तेंदुए हैं और कौन से बर्फीले क्षेत्रों में हैं, इसको लेकर इन दिनों अध्ययन का दौर चल रहा है। बता दें कि स्पीति की बर्फीली घाटियों में हिम तेंदुआ देखा गया है। वन विभाग के वन्य प्राणी विंग के कर्मचारी वहां पर हिम तेंदुए की पुष्टि कर चुके हैं, जो इनकी गणना में स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद लेंगे। गौ हो कि बर्फीले इलाकों में पाए जाने वाला हिम तेंदुआ सैलानियों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिनकी जानकारी मिलने के बाद एडवेंचर टूरिज्म पर निकले युवा इनको देखने के लिए स्पीति वैली तक पहुंच रहे हैं। वन्य प्राणी विंग ने नेचर कंजरवेशन फाउंडेशन ऑफ  इंडिया के सहयोग से हिम तेंदुओं की गणना का कार्य प्रारंभ कर दिया है। गणना का यह कार्य छह माह में पूरा होगा। हिम तेंदुओं की गणना के अब तक सामने आए नतीजों से प्रदेश में इनकी संख्या 100 के करीब होने का अनुमान है। वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर के अनुसार प्रदेश में हिम तेंदुओं की गणना जारी है। इनकी संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद भी जताई गई है।  स्पीति घाटी तथा किन्नौर में तो हिम तेंदुओं की मौजूदगी युवाओं के लिए रोजगार भी है। बड़ी संख्या में सैलानी हिम तेंदुओं की मौजदूगी वाले क्षेत्रों में उन्हें देखने के लिए पहुंचते हैं। वन्य प्राणी विंग ने नेचर कंजरवेशन फाउंडेशन के सहयोग से मयाड़, थड़ी, चंद्र भागा व ऊपरी स्पीति के सात स्थानों पर सर्वे किया है। सर्वे के दौरान 49 हिम तेंदुए इन जगहों पर देखे गए। प्रदेश में किब्बर वन्य प्राणी अभ्यारण्य से लेकर पांगी तक हिम तेंदुओं की मौजूदगी है। इसके अलावा यह चंबा की कुगती वन्य प्राणी अभ्यारण्य, किन्नौर के ऊपरी भागों, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में भी पाया जाता है। शोध कर्ताओं ने किन्नौर जिला के लिप्पा व आसरंग में इनका नया आशियाना पाया है। यह 9800 से 17000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। किन्नौर व लाहुल-स्पीति जिला की स्पीति घाटी के अलावा प्रदेश के अन्य भागों में करीब तीन दर्जन प्रशिक्षित युवा हिम तेंदुओं को लेकर पर्यटन कारोबार कर रहे हैं।

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