प्रदेश में ऑनलाइन स्टडी पर ब्रेक

शिक्षण संस्थानों में वर्चुअल क्लासेस शुरू करने से सरकार का इनकार, एक ही वेंडर मिलने के कारण वापस भेजा प्रोपोजल

शिमला  – प्रदेश के सरकारी कालेजों व स्कूलों में ऑनलाइन स्टडी शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई है। राज्य सरकार ने वर्चुअल क्लासेज सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों में शुरू करने के प्रोपोजल को शिक्षा विभाग के पास वापस भेज दिया है। दरअसल शिक्षा विभाग को वर्चुअल क्लासेज के लिए वेंडर्ज नहीं मिल रहे थे। मात्र एक ही वेंडर ने वर्चुअल क्लासेज के लिए हामी भरी थी, लेकिन सरकार के आदेशों के बाद शिक्षा विभाग ने वेंडर का नाम रिजेक्ट कर दिया है। ऐसे में अब ऑनलाइन स्टडी का सपना टूट गया है। शिक्षा विभाग को अब दूसरी बार वर्चुअल क्लासेज के लिए टेंडर करने पड़ेंगे। बता दें कि शिक्षा विभाग ने फैसला लिया था कि 15 हजार सरकारी स्कूलों व कालेजों में ऑनलाइन सिस्टम लगाए जाएंगे। इन सिस्टम के माध्यम से स्कूलों में क्याना बोर्ड व इंटरनेट कनेक्शन तक लगाने की योजना थी। गौर हो कि कालेजों के बाद सरकार ने पहली बार वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में वर्चुअल क्लासेज शुरू करने का फैसला लिया था। विभाग के अनुसार प्रदेश के दूर दराज के क्षेत्रों के स्कूलों में जहां शिक्षकों की कमी चल रही है, उन्हीं स्कूलों में विभाग ये वर्चुअल क्लासेज शुरू करेगा। इसके लिए जिला उपनिदेशकों को ऐसे स्कूलों की सूची, छात्रों व शिक्षकों की संख्या की जानकारी भेजने को कहा गया था, जहां शिक्षकों की भारी कमी है, और जहां वर्चुअल क्लासेज की ज्यादा जरूरत है। बता दें कि अभी जिला शिमला और मंडी के कालेजों में वर्चुअल क्लासेज शुरू की गई हैं। इसके तहत एक शिक्षक कई कक्षाएं लेते हैं। गौर हो कि प्रदेश सरकार ने इसे सीवी रमन वर्चुअल क्लासेज का नाम दिया है। वहीं सरकार भी ऑनलाइन वर्चुअल क्लासेज को महत्त्वपूर्ण बताते हुए, जिलों को बजट जल्द जारी करेगी। फिलहाल वेंडर्ज न मिलने की वजह से अभी वर्चुअल क्लासेस शुरू करने की योजना ठंडे बस्ते में पड़ गई है। अब कब इस योजना के लिए कार्य शुरू होता है, यह देखना अहम होगा।

ऑनलाइन कक्षाओं में डिजिटल क्लासरूम

हिमाचल के सभी कालेज व स्कूलों में जल्द वर्चुअल क्लास रूम बनाए जाएंगे। शिक्षण संस्थानों में डिजिटल ब्लैक बोर्ड भी स्थापित किए जाएंगे। नई दिल्ली में हुई प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार ने इसके लिए हिमाचल सरकार को फंड देने की हामी भी भरी है। शिक्षा विभाग का दावा है कि वर्चुअल क्लासरूम के माध्यम से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे कालेजों में आसानी से पढ़ाई करवाई जा सकेगी। इस तकनीक से प्रोफेसर एक कालेज में बैठकर अन्य कालेजों में बैठे विद्यार्थियों को पढ़ा सकते हैं।

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