फिर खूनी मक्खी ने काटे हिमाचली

सैंड फ्लाई के काटे चार प्रभावित पहुंचे अस्पताल, शिमला-किन्नौर में सामने आ रहे ज्यादा मामले

शिमला  – खबरदार। हिमाचल में खूनी मक्खी फिर से सक्रिय हो गई है।  सैंड फ्लाई नाम की इस मक्खी के काटने के पांच माह में चार मामले आ गए हैं। गौर हो कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने सैंड फ्लाई पर स्टडी करने के निर्देश भी जारी कर रखे हैं। शिमला, किन्नौर और कु ल्लू में इस खूनी मक्खी पर सर्वेक्षण जल्द पूरा होने वाला है। जानकारी के मुताबिक, सतलुज के किनारे इस मक्खी के पनपने की पूर्ण संभावना रहती है। अब तक जो चार मामले आए हैं, वे किन्नौर और शिमला के ऊपरी क्षेत्रों से बताए जा रहे हैं। बाकी के रिकार्ड पर गौर करें तो हर वर्ष इस तरह के आठ से दस मामले अस्पतालों में आ रहे हैं। फिलहाल अभी की स्थिति पर गौर करें तो किन्नौर और जिला शिमला के रामपुर क्षेत्र से सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। आईजीएमसी और जिला शिमला के अन्य अस्पतालों में सैंड फ्लाई मक्खी के काटने से प्रभावितों के मामले आ रहे हैं। स्टडी इसलिए भी अहम बताई जा रही है कि क्योंकि वही मामले अभी पहचाने जा रहे हैं, जिनमें पीडि़त स्वयं अस्पताल आ रहे हैं। बरसात के मौसम में इस मक्खी के पनपने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है, लिहाजा अब यह सर्वेक्षण काफी अहम बताया जा रहा है। सर्वेक्षण में यह पता लगाना बेहद जरूरी है कि किन-किन क्षेत्रों में प्रभावित सामने आ रहे हैं और कितनी तेजी से मक्खी अपना कहर भरपा रही है। गौर हो कि सैंड फ्लाई मक्खी नदी के किनारे पनपती है और रात को काटती है। इसके काटने से त्वचा में अल्सर होता है और बीमारी बिगड़ने पर कालाजार नामक बुखार भी हो जाता है। बताया जा रहा है कि अगस्त माह में इस मक्खी पर स्टडी रिपोर्ट तैयार करके प्रदेश स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी जाएगी। समय रहते इस मक्खी के काटने से प्रभावितों के ग्राफ को कम करने पर स्वास्थ्य विभाग काम करने वाला है। आईजीएमसी में आने वाले मामलों की पुष्टि करते हुए अस्पताल के त्वचा विभाग के विशेषज्ञ डा. जीके वर्मा का कहना है कि अस्पताल में हर वर्ष लगभग दस केस आ रहे हैं। मामलों की पूरी स्टडी करके पीडि़तों को विशेष ट्रीटमेंट दी जा रही है।

ये हैं लक्षण

जिस अंग में यह मक्खी काटती है, उस अंग में घाव हो जाता है। धीरे-धीरे यह घाव अल्सर का रूप ले लेता है। इस घाव को भरने में काफी समय लग जाता है। इस रोग के लक्षणों में रुक-रुककर या फिर तेजी से बुखार आना, भूख न लगना, वजन का कम होना और शरीर में कमजोरी महसूस होना इत्यादि हैं।

ऐसे हो रही स्टडी

रामपुर क्षेत्र में एक विशेष टीम का गठन किया जा चुका है, जो नदी क्षेत्र के किनारे रहने वाले लोगों को इस बीमारी से बचाव बारे जागरूक कर रही है और कालाजार से ग्रसित लोगों का पता भी लगाया जा रहा है। काटे जाने की पुष्टि होते ही पीडि़त को तुरंत उपचार के लिए अस्पताल खनेरी रामपुर में लाने को कहा जा रहा है।

 

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