बिजली समझौते रद्द करे अमरेंद्र सरकार

चंडीगड़ – पंजाब में महंगी बिजली के मुद्दे पर अमरेंद्र सरकार को घेरते आम आदमी पार्टी (आप) ने सरकारी खजाने और लोगों को प्राईवेट थर्मल प्लांटों की अंधी लूट से बचाने के लिए आगामी बजट सत्र में बिजली खरीद समझौते रद्द करने के लिए बिल पारित करने की मांग की है। प्रतिपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा तथा विधायक अमन अरोड़ा ने बुधवार को कहा कि अब तो पंजाब के अफसर भी समझौते रद्द करने के हक में खुल कर सामने आ गए हैं, फिर कैप्टन सरकार लोक हितैषी कदम को उठाने में क्यों हिचकिचा रही है। बिजली के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी की तरफ से शुरू किए बिजली मोर्चे को लोगों की तरफ से मिल रहे समर्थन को भांपते हुए सहकारिता मंत्री सुखजिंद्र सिंह रंधावा, पूर्व बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह, प्रदेश कांग्रेस के प्रधान सुनील जाखड़ समेत कई अन्य कांग्रेसी विधायक और राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा व शमशेर सिंह दूलों भी महंगी बिजली से छुटकारा पाने के लिए पीपीएज रद्द करने की सार्वजनिक तौर पर ब्लैक पेपर तक जारी करके आम आदमी पार्टी के आरोपों और दलीलों पर मोहर लगा चुके हैं। चीमा ने कहा कि पिछली अकाली-भाजपा सरकार के समय पर सस्ती बिजली पैदा करने वाले सरकारी थर्मल प्लांटों को बंद कर घातक शर्तों पर प्राईवेट थर्मल प्लांटों वाले सफेद हाथी बांध लिए, जो न केवल सरकारी खजाने को चाट रहे हैं, बल्कि सरकारी मिलीभगत से गरीब उपभोक्ताओं को लूट हैं। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार में इन निजी थर्मल प्लांटों के साथ लेनदेन हुई थी, अमरेंद्र सरकार इस बिजली माफिया के साथ लेनदेन के मामले में बादलों से आगे निकल गई है। यदि कैप्टन सिंह अपनी पिछली सरकार के दौरान विधानसभा में हरियाणा, राजस्थान और केंद्र सरकारों के साथ किए नदी जल समझौते रद्द कर सकती है तो निजी थर्मल प्लांट के साथ किए करार क्यों नहीं रद्द कर सकती। बिजली क्षेत्र संविधान की समवर्ती सूची में शामिल है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रीय ग्रीड समेत बाजार में प्रति यूनिट तीन रुपए से लेकर सवा तीन रुपए तक बिजली खरीदी जा सकती है तो प्राईवेट थर्मल प्लांटों से आठ से नौ रुपए प्रति यूनिट बिजली खरीदे जाने की क्या वजह है। वार्षिक 3550 करोड़ रुपए के फालतू और अनावश्यक वित्तीय बोझ सरकारी खजाने पर पड़ रहा है जिसे पूरा करने के लिए पारवरकाम बार-बार बिजली की दरें बढ़ा रहा है।

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