बूढ़ी लिफ्ट के सहारे मरीजों की जान

प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में 20 साल पुरानी लिफ्ट से चलाया जा रहा काम, आए दिन होती है दिक्कत

शिमला-आईजीएमसी में 20 वर्ष पुरानी लिफ्ट के सहारे मरीजों की जान बचाने की जद्दोजहद की जा रही है। बुधवार को फिर से यह लिफ्ट एकाएक बंद हो गई। यह इतनी पुरानी है कि कभी भी इनकी सांस फूल जाती है। कई बार मरीजों ने भी शिकायत की है कि इन लिफ्टों को बदला जाए, जिसमें अब जाकर आईजीएमसी प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस मामले में प्रदेश सरकार को एक प्रस्ताव तैयार करने का फैसला लिया है। आईजीएमसी प्रदेश का सबसे पुराना और सबसे बड़ा मेडिकल कालेज माना जाता है। बताया जा रहा है कि आईजीएमसी में लगभग 12 से 14 लिफ्टे हैं जिसमें खासतौर पर लिफ्ट का इस्तेमाल ओटी और ब्लड टेस्ट करवाने के लिए मरीजांे के लिए रहता है, जिसमें अब हालत ऐसी है कि ओटी के लिए जाने वाली लिफ्ट खराब है और ब्लड टेस्ट करवाने के लिए भी लिफ्टों का इस्तेमाल मरीज नहीं कर पा रहे हैं। अस्पताल में लिफ्टों की हालत ऐसी है कि जो लिफ्टें खुली हैं वे खुली की खुली रह गई हैं। आप्रेशन के बाद कई बार मरीजों को संकरी लिफ्ट से ले जाना पड़ता है। अब आईजीएमसी ने इस मसले को लेकर एक बैठक का भी आयोजन किया है जिसमें लिफ्ट को बदलने को लेकर बातचीत की गई है। प्रदेश भर से प्रतिदिन आईजीएमसी में तीन से चार हजार मरीज इलाज करवाने आते हैं। कई मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें व्हील चेयर और स्ट्रेचर का इस्तेमाल करना पड़ता है वहीं कुछ मरीज बुजुर्ग होते हैं जिन्हें लिफ्ट में जाना जरूरी रहता है। आईजीएमसी में कई बार मरीज पुरानी लिफ्ट होने के कारण चलती लिफ्ट में ही अटक गए हंै जिसमें इक्का-दुक्का केस ऐसे भी सामने आए हैं, जिसमें मरीजों को बीच लिफ्ट में सांस की दिक्कत भी पेश आ चुकी है। आईजीएमसी में बच्चों को भी लिफ्ट में ले जाया जाता है जिससे बच्चों की भी सांस घुटन की शिकायत सामने आई है।

एसीएस ने भी कहा, जल्द बदलो लिफ्ट

पिछले वर्ष एसीएस हैल्थ के आईजीएमसी सर्वेक्षण में एसीएस हैल्थ आरडी धीमान ने आईजीएमसी प्रशासन को यह कहा है कि जल्द से जल्द पुरानी लिफ्टों को बदलने के लिए प्रोपोजल प्रदेश सरकार को सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि अब अस्पताल में काफी रश है, जिसमें मरीजांे को असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए लिफ्ट का सही तरह से चलना जरूरी है।

You might also like