स्मार्ट सिटी पर सरकार गंभीर नहीं, घोर लापरवाही

शिमला –भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रदेश सरकार व नगर निगम शिमला की स्मार्ट सिटी परियोजना को लागू करने के लिए उदासीन रवैये की निंदा की है। पार्टी का आरोप है कि अगर राज्य सरकार का यही रवैया रहा तो स्मार्ट सिटी परियोजना का हश्र भी जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय अर्बन रिनुअल मिशन की तरह ही विफल होगा। जेएनएनयूआरएम में शिमला शहर के विकास के लिए 4000 करोड रुपए से अधिक की परियोजनाएं प्रस्तावित की गई थीं। यह कार्य वर्ष 2007 से 2012 के मध्य पूर्ण करना था, मगर तत्कालीन बीजेपी की सरकार व कांग्रेस शासित नगर निगम की इन परियोजनाओं पर संजीदगी से कार्य न करने व लापरवाही के चलते शहर में इन परियोजनाओं को लागू नहीं किया जा सका था, जिसके कारण यह पूर्णतः विफल रहा और शहर को इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से वंचित होना पड़ा था। जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि वर्ष 2015 में पूर्व नगर निगम ने केंद्र सरकार व राज्य सरकार के विरोध के बावजूद एक लंबे संघर्ष के पश्चात तत्कालीन महापौर ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर शिमला शहर को स्मार्ट सिटी मिशन में सम्मिलित किया गया था अैर वर्ष 2016 में जन भागीदारी व समस्त स्टेक होल्डर्स से चर्चा कर इस स्मार्ट सिटी परियोजना का 2906 करोड रुपए का प्रस्ताव बनाया गया था। इसमें 500 करोड केंद्र सरकार व 500 करोड की राशि राज्य सरकार ने इसमें देनी है। इसमें चुने हुए प्रतिनिधि जिसमें नगर निगम के महापौर, उपमहापौर, पार्षदों के अतिरिक्त सांसदों, विधायकों व अन्य अधिकारियों के साथ शहरवासियों व अन्य लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से इसमें सुझाव देकर इसमें भागीदारी दी थी। उसके पश्चात इसे अंतिम रूप दिया गया व प्रदेश सरकार की स्वीकृति के पश्चात 10 मार्च 2017 को इसकी शुरुआत की गई, लेकिन आज तीन वर्ष बीतने के पश्चात परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव उपलब्ध होने के बावजूद अभी तक सरकार व नगर निगम इसका एक भी कार्य धरातल पर नहीं उतार पाई है, जिसकी पुष्टि हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी मिशन के लिए समीक्षा बैठक में भी हुई है। उसकी रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में दोनों स्मार्ट सिटी परियोजना में कोई भी कार्य नहीं किया गया है। इसको लेकर अभी तक बैठकों के दौर ही कर केवल फिजूलखर्ची की जा रही है, जिससे इसे समयबद्ध रूप से पूरा करना संभव ही नहीं है। स्मार्ट सिटी परियोजना में शिमला शहर को स्मार्ट बनाने के लिए सूचना तंत्र को सुदृढ करने के लिए व परिवहन व्यवस्था को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए आईटीसी व्यवस्था पर बल दिया गया है। मगर 3 वर्ष बीतने के पश्चात इस पर कोई काम नहीं किया गया है। सीपीआईएम ने मांग उठाई है कि  सरकार व नगर निगम स्मार्ट सिटी परियोजना को संजीदगी से लागू करने के लिए कार्य करें।

You might also like