गोशाला के पीछे तैयारी… देश-विदेश पर पड़ीं भारी

By: Mar 12th, 2020 12:06 am

बिलासपुर की स्नेहलता ने हैंडबाल में लिखी नई इबारत, स्कूल में बच्चों को कल और घर में सैकड़ों खिलाड़ी कर रहीं तैयार

नाम       स्नेहलता

आयु       36 वर्ष

शिक्षा     एमए-बीएड

पति        सचिन चौधरी, हैंडबाल प्लेयर

स्थान      बच्छड़ीं, मोरसिंघी

‘दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप’ हिमाचल, हिमाचली और हिमाचलियत की सेवा में सदैव तत्पर रहा है। यही कारण है कि किसी भी रूप में कुछ हटकर करने वालों का सम्मान हमारी प्राथमिकता में शामिल है। ‘दिव्य हिमाचल एक्सिलेंस अवार्ड’ ऐसी ही कर्मठ विभूतियों, संगठनों व संस्थाओं के प्रयासों को प्रणाम करने का संकल्प है।

‘दिव्य हिमाचल एक्सिलेंस अवार्ड’ की ‘सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक’ श्रेणी में शुमार हैं बिलासपुर की स्नेहलता…

बिलासपुर – न दिन देखा, न रात..गोशाला के पीछे तैयारी कर देश-विदेशों को पटकनी देकर न सिर्फ मातृभूमि को दिलाया सम्मान, बल्कि नई नस्ल को भी बनाया ऊंचाइयां छूने के काबिल। हैंडबाल ही नहीं, पढ़ाई में भी सबको पटकनी देने वाली यह खिलाड़ी…कोच…टीचर…पत्नी…बहू शायद ही किसी परिचय की मोहताज हों। हम बात कर रहे हैं दस इंटरनेशनल और सौ नेशनल खिलाड़ी तैयार करने वाली हैंडबाल कोच स्नेहलता की। बिलासपुर की इस शख्सियत ने खेल क्षेत्र में ऐसी इबारत लिख दी कि यह हर महिला के लिए एक मिसाल बन गई हैं। प्रदेश-देश का नाम ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली स्नेहलता को ‘दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप’ ‘सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक’ के खिताब से सम्मानित करने जा रहा है। पढ़ाई से वक्त निकाल घर पर गोशाला के पीछे की ओर गोलपोस्ट बनाकर प्रैक्टिस कर हैंडबाल खेल में नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर प्रदेश व देश का नाम ऊंचा कर चुकी स्नेहलता वर्तमान में मोरसिंघी स्कूल में बतौर पॉलिटिकल साइंस लेक्चरर पद पर सेवाएं दे रही हैं। इंडियन रेलवे में कार्यरत उनके पति सचिन चौधरी खुद भी हैंडबाल के इंटरनेशनल प्लेयर रह चुके हैं। दोनों ने वर्ष 2012 में चीन के हाइयांग में बीच एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। स्नेहलता के पति सचिन दो बार एशियन गेम्स में भी भाग ले चुके हैं। नवगांव स्कूल में पहली नियुक्ति के साथ स्नेहलता ने हैंडबाल की कोचिंग शुरू कर दी। इतना ही नहीं, कई अभिभावकों ने अपनी बेटियां भी उनके साथ नवगांव भेज दीं। जब नवगांव से उनकी ट्रांसफर मोरसिंघी के लिए हुई, तो सोलन जिला के कई अभिभावकों ने अपनी बेटियां उनके साथ भेज दीं। इस पर स्नेहलता के पिता जगदीश ने ग्राउंड व भवन बनाने के लिए 3.17 बीघा भूमि उनके नाम कर दी। वर्तमान में दो दर्जन से ज्यादा लड़कियां उनके होस्टल में फ्री ऑफ कॉस्ट रह रही हैं। उन्हें खेल के गुर भी बिना किसी फीस के सिखाए जा रहे हैं। दिन के समय बच्चे पढ़ते हैं, जबकि सुबह-शाम स्नेहलता की देखरेख में खेल की प्रैक्टिस करते हैं। बीच-बीच में सचिन भी खिलाडि़यों को हैंडबाल की नई टेक्नीक सिखाने आते हैं। यहां एक दशक से खिलाडि़यों की ऐसी पौध तैयार हो रही है, जो राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा रही है। नर्सरी की मेनिका पॉल, बबीता, निधि शर्मा, दीक्षा ठाकुर, ज्योति, शिवानी, ममता व खिलां ठाकुर के साथ ही दो लड़के कुणाल चौहान व अक्षय ठाकुर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

फ्री कोचिंग…होस्टल के भी पैसे नहीं

मोरसिंघी स्थित हैंडबाल नर्सरी में रहने वाली खिलाड़ी मैस खुद चलाती हैं। स्नेहलता के पिता द्वारा दी गई जमीन के एक हिस्से पर ग्राउंड व होस्टल बनाने के बाद बाकी बची जमीन पर जैविक तरीके से अनाज व सब्जियां तैयार की जाती हैं। बाकी राशन की व्यवस्था स्नेहलता अन्य खेल प्रेमियों के सहयोग से करती हैं। दूध, पनीर, नॉन वेज व सोया जैसी आइटम्स को भी उनकी डाइट का हिस्सा बनाया गया है। होस्टल में रहने वाली खिलाड़ी केवल खेल में ही नहीं, पढ़ाई में भी आगे हैं। पिछले साल शालिनी ठाकुर ने जमा दो में 82 फीसदी, जबकि गुलशन शर्मा व वंशिका ने आठवीं में क्रमशः 98 व 93 फीसदी अंक हासिल किए हैं।

चौंका देंगी ये उपलब्धियां

स्नेहलता चीन में एशियन बीच गेम्स में बेहतर प्रदर्शन करने के बाद नौ नेशनल्स खेल चुकी हैं। सात इंटर यूनिवर्सिटी और एशियन गेम्स में दो कैंप लगा चुकी हैं। वह जैवलिन और कबड्डी की भी एक अच्छी प्लेयर रह चुकी हैं।

स्नेहलता की कोचिंग नर्सरी  की खिलाडि़यों ने 2011 में अंडर-17 वर्ग में ब्रांज, 2012 में सब-जूनियर नेशनल में गोल्ड, 2013 में अंडर-17 स्कूली नेशनल में गोल्ड, 2014 में अंडर-17 व अंडर-19 स्कूली नेशनल में गोल्ड तथा 2013 व 2014 में जूनियर नेशनल और 2014 में सीनियर नॉर्थ ज़ोन में सिल्वर मेडल जीते। जूनियर नेशनल और सीनियर नॉर्थ ज़ोन में सिल्वर मेडल जीतने के साथ ही उन्होंने पहले नॉर्थ ज़ोन और उसके बाद ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हिमाचल की झोली में डाले हैं। फिर तमिलनाडु में सीनियर नेशनल में उन्होंने सिल्वर मेडल जीतकर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। 2015 में हिमाचल की कई खिलाडि़यों ने जूनियर एशियन वूमन चैंपियनशिप और 2016 में स्वीडन के गोथनबर्ग में पार्टीले कप में देश का प्रतिनिधित्व किया।

ढाका व बैंकॉक में इंटरनेशनल हैंडबाल फेडरेशन कप फेज़-1 व 2 में भारत को गोल्ड व ब्रांज मेडल दिलाने वाली टीम की कप्तानी हिमाचल की मेनिका ने की थी, जबकि बबीता उपकप्तान थीं। इसी तरह 2017 से लेकर 2020 जनवरी तक सीनियर नेशनल में तीन सिल्वर, जूनियर नेशनल में दो सिल्वर व एक गोल्ड और इंटर यूनिवर्सिटी में दो सिल्वर व एक गोल्ड जीता है। स्कूली नेशनल में अंडर-14 में सिल्वर, अंडर-19 में सिल्वर, अंडर-17 में सिल्वर जीते हैं, जबकि पिछले साल अंडर-19 स्कूली नेशनल में गोल्ड जीता है।

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