भारत की पुरातन संस्कृति का संदेश समझें

Mar 28th, 2020 12:04 am

प्रताप सिंह पटियाल

लेखक, बिलासपुर से हैं

धनवंतरि, महर्षि सुश्रुत, चरक ऋषि, महर्षि पतंजलि, च्यवन, शालिहोत्र ऋषि तथा वाग्वट जैसे आचार्यों ने भारत की पुरातन चिकित्सा पद्धति तथा चिकित्सा क्षेत्र में हजारों वर्ष पूर्व कई ग्रंथों की रचना करके उनमें कई किस्म की औषधियों तथा आयुर्वेद से जुडे़ महत्त्वपूर्ण तथ्यों का वर्णन करके इन ग्रंथों को संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए उपयोगी बना दिया था…

भारत की पुरातन संस्कृति का संदेश समझें। दुनिया में पिछले कुछ अरसे से सबसे ज्यादा चर्चित शब्द बने साइलेंट किलर ‘कोविड-19’ कोरोना के काले साये ने देवभूमि हिमाचल की दहलीज पर भी दस्तक देकर हड़कंप मचा दिया है। 20 मार्च को यहां भी दो मरीज प्रारंभिक जांच में पॉजिटिव पाए गए थे। गनीमत रही कि यह आंकड़ा तीन मरीजों से आगे नहीं बढ़ा। भारत के पड़ोसी देश चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान शहर की धरती से उपजे महज एक कोरोना वायरस की महामारी ने दुनियाभर के देशों में तहलका मचा कर ज्यादातर देशों को अपनी चपेट में ले लिया।

कोरोना वायरस के संक्रमण से चीन, इरान, इटली तथा स्पेन जैसे देशों में हजारों लोगों के मौत के आगोश में समाने से मातम का माहौल पसर चुका है। कोरोना को मात देने के लिए दुनिया भर की शीर्ष वैज्ञानिक संस्थाएं तथा स्वास्थ्य विशेषज्ञ युद्धस्तर पर लगे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना को आधिकारिक तौर पर वैश्विक महामारी घोषित कर चुका है। भारत सरकार ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करके इसकी रोकथाम के लिए लॉकडाउन व कर्फ्यू जैसे सख्त फैसले लिए हैं तथा इसके लिए नेशनल हेल्पलाइन नंबर 1075 भी शुरू किया है।

जानलेवा कोरोना वायरस के चलते देश सहित विश्व भर में पर्यटन, शिक्षा क्षेत्र कारोबार जगत तथा खेल की दुनिया पर भी अपना गहरा असर डाल दिया है। कोरोना की दहशत का खौफ  इस कद्र है कि लोग चीन का नाम सुनने तथा उसका बना सामान छूने से भी डर रहे हैं। कोरोना संकट पर सावधानी बरतते हुए हिमाचल सरकार ने सभी शिक्षण संस्थानों में छुट्टियां घोषित करके राज्य में कई कार्यक्रम रद्द करने तथा सिद्धपीठ व शक्तिपीठों के कपाट बंद करने जैसे प्रभावी फैसले पहले ही ले लिए थे तथा हेल्पलाइन नंबर 104 को सक्रिय कर दिया था।

कोरोना के कोहराम से चरमरा रही अर्थव्यास्था के संकट से छोटे स्तर के दुकानदारों तथा मजदूर वर्ग की आजीविका तथा व्यवसाय खासे प्रभावित हुए हैं। देश के शहरों में वीरानगी व सन्नाटा छा चुका है, लेकिन कोरोना के फैलते संक्रमण के खौफ  से एक बात उभर कर सामने आई है कि इसके प्रकोप से निपटने के लिए दुनिया भारत की पुरातन वैदिक संस्कृति के आगे नतमस्तक होने लगी है। विदेशों में भारत की महान सभ्यता व संस्कृति का स्मरण होने लगा है। अमरीका सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी हाथ मिलाने के बजाय अभिवादन के लिए नमस्ते का तरीका इजाद कर रहे हैं। भारतीय सभ्यता की तहजीब की शैली नमस्ते ने विश्वभर को अपनी महान संस्कृति का बोध करा दिया।

मानों हमारे पुरखों ने हजारों वर्ष पूर्व इस तहजीब का आरंभ करके महामारियों से लड़ने की तदबीर ढूंढ ली थी। कुछ लोग हमारे ऋषि मुनियों द्वारा वायुमंडल में नकारात्मक ऊर्जा को रुखसत करने के लिए किए जाने वाले हवन व यज्ञों पर शोध कर रहे हैं। ऋषियों के योग व आध्यात्मिक शिक्षा का सहारा लेकर हमारे शास्त्रों में वर्णित हवन सामग्री तथा ‘पंचपल्लव’ जैसी चीजों के साथ ‘पंचगव्य’ पर भी शोध हो रहे हैं। अपनी सटीक भविष्यवाणी के लिए विश्वविख्यात भारत की प्राचीन वैदिक ज्योतिष विद्या ‘एस्ट्रोलॉजी’ के ग्रंथों को खंगाला जाने लगा है। मानवता व सभ्य समाज में शांत माहौल के लिए भारतीय महापुरुषों के अंहिसावादी विचारों व सिद्धांतों को सर्वोपरि मान कर अपने आचरण में शामिल किया जाने लगा है। कोरोना वायरस ने दिल्ली जैसे बड़े शहरों में पांच रुपए में बिकने वाले तुलसी के पौधे का मूल्य सौ के पार पहुंचा दिया है। कुछ वर्ष पूर्व अमरीकी लेखक डेविड फ्राली ‘पद्मभूषण’ ने कहा था कि जब दुनिया पढ़ना-लिखना नहीं जानती थी तब भारत में गुरुकुल चला करते थे।

भारत के महान ऋषियों ने दुनिया के सबसे प्रथम व प्राचीनतम धर्मग्रंथ ऋग्वेद की रचना कर डाली थी। वेद, उपवेद, पुराण, उपपुराण, दर्शनशास्त्र, उपनिषद जैसे अनगिनत ग्रंथों की रचना करने के साथ प्राचीनकाल से कई असाध्य रोगों को दूर करने का माध्यम अथर्ववेद तथा आयुर्वेद जिनका लोहा पूरी दुनिया मानती है। इन वेद ऋचाओं की रचना हमारे ऋषियों की वैज्ञानिकता के उत्कृष्ट प्रमाण को तसदीक करती है। धनवंतरि, महर्षि सुश्रुत, चरक ऋषि, महर्षि पतंजलि, च्यवन, शालिहोत्र ऋषि तथा वाग्वट जैसे आचार्यों ने भारत की पुरातन चिकित्सा पद्धति तथा चिकित्सा क्षेत्र में हजारों वर्ष पूर्व कई ग्रंथों की रचना करके उनमें कई किस्म की औषधियों तथा आयुर्वेद से जुडे़ महत्त्वपूर्ण तथ्यों का वर्णन करके इन ग्रंथों को संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए उपयोगी बना दिया था।

विश्व में शल्य चिकित्सा के पितामह तथा सुश्रुत संहिता के रचयिता व कई प्रकार की शल्य प्रक्रियाओं के पारंगत महर्षि सुश्रुत की आस्ट्रेलिया के मेलवोर्न रायल कालेज ऑफ सर्जन में स्थापित प्रतिमा भारत को गौरवान्वित करती है। आयुर्वेद के परोधा महर्षि चरक द्वारा रचित आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ चरक संहिता का कई विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल भारत की प्राचीनतम विद्या योग जिसके तहत भारत दुनिया को स्वस्थ जीवनशैली तथा मनोबल को मजबूत करने का पैगाम देता आया है जिस योग दिवस को 21 जून के दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्रसंघ जैसी संस्थाएं भी मनाने लगी हैं, उस योग के विशारद तथा योगसूत्र के रचनाकार महर्षि पतंजलि थे।

कोरोना के व्यापक प्रकोप से निपटने के लिए विदेशों में भारतीय वैदिक संस्कारों का अनुसरण कर रहे लोगों को अब एहसास होने लगा है कि प्राचीन भारतीय सभ्यता व संस्कृति वास्तव में महान थी, जो विश्व को प्रकृति संरक्षण तथा ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत का संदेश देती है। इन असूलों के दम पर भारत दुनिया में ‘विश्व गुरु’ की नुमाइंदगी करता था, लेकिन हमारे शिक्षा क्षेत्र में पाश्चात्य संस्कृति की सेंध तथा युवा पीढ़ी पर आधुनिकता का खुमार इस कद्र हावी हुआ कि अपने ज्ञान व विज्ञान के बलबूते दुनिया को जीने की राह दिखाने वाले हमारे ऋषि-मुनि अपने ही देश में पहचान को मोहताज हैं, देश में ऋषियों के नाम पर प्रोडक्ट जरूर बेचे जाते हैं तथा योग गुरुओं की भी कतारें लगी हैं, जबकि उन महान ऋषियों तथा उनके द्वारा रचित ग्रंथों को देश की शिक्षा पद्धति में पहचान मिलनी चाहिए।

बहरहाल मौत का साया बनकर मंडरा रहे कोरोना से जंग में गैर जिम्मेदाराना आचरण मुसीबत का सबब बन सकता है। हमारी हुकूमतें सदी की सबसे बड़ी वैश्विक महामारी से निपटने में बेहतर प्रयास कर रही हैं। सभी नागरिकों को सरकारों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करके वतन से हमदर्दी का फर्ज निभाना होगा। इसके लिए सामाजिक दूरी, सतर्कता व सावधानी के साथ भारतीय जीवनशैली अधिक कारगर व सक्षम सिद्ध हो सकती है ताकि कोई क्षेत्र दूसरा वुहान न बने।

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