रॉयल सिटी : स्मार्ट एजुकेशन  

By: Mar 23rd, 2020 12:06 am

हिमाचल में छह बार के सीएम वीरभद्र सिंह का होम टाउन रोहड़ू एजुकेशन की रॉयल सिटी बन गई है। ब्लॉक में 60 स्कूलों के साथ कालेज और प्रोफेशनल एजुकेशन सेंटर हैं, जिनमें हजारों छात्र तराशे जा रहे हैं। चुनौती है, तो बस सरकारी स्कूलों को प्राइवेट के बराबर लाने की। आखिर कैसे एजुकेशन हब बना रोहड़ू, प्रस्तुत है इस बार का दखल     

—बृजेश फिष्टा

रोहडू में 83 प्राइमरी स्कूल हैं, जिसमें 1700 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वहीं, 146 जेबीटी, 28 पैट, 14 सीएचटी और 11 एचटी अध्यापक हैं। इन स्कूलों में पांच पद रिक्त चल रहे हैं। इसके अलावा वाटर कैरियर के 50 पद रिक्त चल रहे हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की बात करें, तो सबसे अधिक छात्र रोहडू ब्वायज स्कूल में 90 और रोहडू गर्ल्स स्कूल में 80 बच्चे हैं। सबसे कम छात्रों की संख्या वाले स्कूलों में मलखून (छह), धारा (आठ), राधार (आठ), मचोती (तीन), शरमाली (नौ) और शलावट (दस), पलकन (पांच), बजैशल (सात), कंदरोड़ा (सात), खशकंडी (दस), बश्टाड़ी (आठ), खोडसू (छह), धारा (छह), अस्ताणी (सात), कोटसारी (सात), खनोला (दस), नसारी (छह) और डूंसा (आठ) शामिल हैं। रोहडू के पांच किलोमीटर के दायरे में समोली, जुंडी, मंझगांव रोहडू गर्ल्स, रोहडू ब्वायज, बखीरना, दशालनी, मेंहदली, संदौर, कांसाकोटी शामिल हैं। इन सभी स्कूलों में 20 से अधिक छात्रों की संख्या है। छात्र रेशो के अनुसार रोहडू सेंटर छात्र में सबसे अधिक पांच अध्यापक हैं।

बेहतर कंडीशन में हैं स्कूल

सरकारी स्कूलों में अप्पर स्कूलों की बात करें, तो प्राइमरी स्कूलों से कुछ बेहतर नज़र आ रहे हैं। यहां अधिकतर स्कूलों में छात्रों की संख्या जहां अधिक है, वहीं अध्यापकों की संख्या भी कुछ कम है। रोहडू ब्लॉक में 15 सीनियर सेकेंडरी, आठ हाई स्कूल और 19 मिडल स्कूल हैं। इन स्कूलों में 200 अध्यापक और 3300 छात्र हैं। आरक्षण के तहत 300 छात्र लाभान्वित हुए हैं। छात्रों की संख्या की बात करें, तो रोहडू गर्ल्स स्कूल में 650 छात्राएं हैं और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छात्र रोहडू में 700 छात्र हैं। 2018 में रोहडू ब्वायज स्कूल उपमंडल का पहला मॉडल स्कूल भी बना है।

सबसे पुराने ब्वायज़ स्कूल में स्मार्ट क्लासेज

रोहडू ब्लॉक का पहला स्कूल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छात्र है, जो दो साल पहले खंड का पहला मॉडल स्कूल बना है। स्कूल में स्मार्ट क्लासेज चल रही हैं। हर आधुनिक सुविधा से लैस स्कूल शहर के निजी स्कूलों को टक्कर दे रहा है। स्कूल में इंग्लिश मीडियम है और इस कारण दो साल से स्कूल के लिए निजी स्कूलों से छात्रों का पलायन हो गया है। स्कूल के प्रधानाचार्य अजीत वर्मा ने बताया कि स्कूल में इंग्लिश मीडियम के साथ-साथ ड्रेस कोड भी रखा गया है। स्कूल में बेहतर शिक्षा देने के लिए यहां स्टाफ  की कमी नहीं है। स्कूल में छात्रों की संख्या का ग्राफ  दो साल पहले कम था, लेकिन मॉडल स्कूल बनने के बाद आज यहां छात्रों की संख्या 700 से अधिक हो गई है। स्कूल में बोर्ड परीक्षा परिणाम की बात करें, तो 2018 में यहां मैट्रिक का 85 फीसदी तो बारहवीं का 90 फीसदी परिणाम रहा है।

सरकारी स्कूलों की भरमार, प्राइवेट 27

रोहडू में जहां सरकारी स्कूलों की भरमार है, वहीं निजी स्कूलों की संख्या 27 है। इनमें तीन सीनियर सेकेंडरी, हिमालयन पब्लिक स्कूल, एसडीएवी सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल और एसवीएम समोली स्कूल शामिल हैं, वहीं, आठ हाई स्कूल और 18 मिडल स्कूल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर इन स्कूलों में जहां छात्रों की संख्या दस हजार से अधिक है, वहीं अध्यापकों की संख्या भी एक हजार से अधिक है। पांच से अधिक सरकारी प्राइमरी स्कूल हैं। इस दायरे में सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या दो हजार के आसपास है, तो पांच किलोमीटर के दायरे में बने इन निजी स्कूलों में छात्रों की संख्या पांच हजार से अधिक है।

किराए के जर्जर भवन में चल रहा सरकारी स्कूल

सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाना मजबूरी बन गई है। गांव में आय के सीमित साधन होने के चलते बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना कहीं-कहीं मजबूरी भी बन गई है। रनौल स्कूल किराए के भवन में चल रहा है, वह भी पूरी तरह जर्जर है। स्कूल में स्टाफ  की भी कमी चल रही है। ऐसे में स्कूल में पढ़ रहे छात्रों का भविष्य भी दांव पर लगा हुआ है। दुर्गम क्षेत्रों में भी जैसे ही किसी शिक्षक का तबादला हो जाता है, तो राजनीतिक पहुंच के चलते शिक्षक अपना तबादला अन्य स्कूलों में कर लेते हैं। इस संदर्भ में स्थायी नीति बनाई जानी चाहिए                              

—लायक राम, अभिभावक

स्कूल और छात्र

अराधना पब्लिक स्कूल रोहडू    900

ग्लोरी इंटरनेशनल स्कूल          1100

हिमालयन पब्लिक स्कूल रोहडू 600

एसवीएम समोली                 700

एसडीएवी सीनियर सेकेंडरी रोहडू400

सनशाइन पब्ल्कि स्कूल रोहडू   450

आर्यन पब्लिक स्कूल कांसाकोटी250

मिशन स्कूल रोहडू               350

सेंट जोसेफ  पब्लिक स्कूल रोहडू 300

ब्वायज स्कूल रोहडू              700

गर्ल्स स्कूल रोहडू                 650

खुश नहीं हैं शिक्षक

सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर की बात करें, तो इनमें सबसे प्रमुख यही है कि शिक्षक खुश नहीं हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे टीचर कम क्लर्क अधिक है। कहीं शिक्षक को डाकिया, तो कहीं क्लर्क बनाकर रख दिया है, जबकि एक शिक्षक का कार्य शिक्षा देना है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत शिक्षकों को ट्रेनिंग पर भेजा जाता है। इसके अलावा साल में कई बार एक दिवसीय या दो दिवसीय ट्रेनिंग पर भेजा जाता है।

सरकारी स्कूलों में खुले खुले मैदान

सरकारी और निजी स्कूलों में मैदानों की स्थिति देखी जाए, तो सरकारी स्कूल काफी आगे हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रोहडू ब्वायज स्कूल में एक बार राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता भी आयोजित की जा चुकी है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छात्रा रोहडू में भी राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित हो चुकी है। अन्य कई स्कूलों में भी काफी अच्छे मैदान हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कई छात्र राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं। निजी स्कूलों में अच्छे मैदान नहीं है। हालांकि बेहतर इंग्लिश मीडियम के चलते निजी स्कूल अधिक छात्रों को खींचने में कामयाब हुए हैं। अधिक संख्या व बेहतर शारीरिक शिक्षण के चलते खेलकूद में निजी स्कूलों को कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं।

हां! सरकारी स्कूलों में स्टाफ की कमी तो है

सब-डिवीजन रोहडू में सरकारी स्कूलों का शिक्षा स्तर निजी स्कूलों से बढि़या और बेहतर है। निजी स्कूलों में स्टाफ पूरा होता है, जबकि सरकारी स्कूलों में स्टाफ  की भारी कमी रहती है। सरकारी स्कूलों के अध्यापक का मनोबल बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग कोई विशेष भूमिका नहीं निभा रहा, जो बड़ी खामी है। इसका असर छात्रों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक पड़ रहा है। दूसरी ओर अभिभावक भी सरकारी स्कूल के प्रबंधन को सहयोग नहीं दे रहे। रोहडू ब्वायज स्कूल अंग्रेजी मीडियम, ड्रेस कोड व नवाचार अपना कर बेहतर सुविधाएं देकर निजी स्कूलों को करारी टक्कर दे रहा है और यह व्यवस्था अन्य स्कूलों में भी शुरू की जानी चाहिए 

—डा. सतनाम खागटा, शिक्षाविद

नेपाली सबसे ज्यादा

रोहडू ब्लॉक में 83 प्राइमरी स्कूल हैं, जिसमें 2800 छात्र हैं, जिनमें 1600 छात्र यानी 64 फीसदी छात्र नेपाली हैं। यहां तक कि मचोती स्कूल में तीन छात्र हैं, जिनमें सभी नेपाली हैं। पुजारली में आठ बच्चे हैं, जिनमें दो स्थानीय और छह नेपाली हैं। इसी के साथ अधिकतर स्कूलों में नेपालियों की संख्या अधिक है

विद्या कपटा, शिक्षाविद

शिक्षक सिर्फ पढ़ाएं

शिक्षकों को सिर्फ पढ़ाई करवाने का काम होना चाहिए। दिल्ली मॉडल पर यहां भी सरकारी स्कूलों का विकास किया जाना चाहिए। ट्रेनिंग के लिए किसी शिक्षक को बुलाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। इससे जहां शिक्षक सीखेंगे, वहीं छात्रों को भी शिक्षा ग्रहण करने में परेशानी नहीं होगी

बलदेव बुशहरी, शिक्षाविद

सरकारी स्कूलों में साइंस लैब्स सहित हर सुविधा

शिक्षा विभाग की ओर से पाठशालाओं में कई प्रकार के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे छात्रों की संख्या व गुणवत्ता में सुधार भी हो रहा है। शिक्षकों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी आयोजित किए जा रहे हैं। समाज का रुझान सरकारी स्कूलों के प्रति सकारात्मक हो रहा है। वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में साइंस लैब्स, कम्प्यूटर लैब, ईको स्पोर्ट्स क्लब, एनएसएस, एनसीसी, आरआरए जैसी सुविधाएं हैं

— अशोक भारद्वाज, शिक्षाविद

रोहडू में चाहिए सीबीएसई स्कूल

रोहडू के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी चल रही है। आम समाज भी शिक्षकों की कमी व पढ़ाई को लेकर सजग नहीं है, जिसका कारण है कि स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिर रहा है। स्कूलों में कम से कम शिक्षकों के बच्चों के लिए यह निर्धारित किया जाए कि शिक्षकों व सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की सरकारी स्कूलों में पढ़ाई आवश्यक की जाए, तभी सुधार की परिकल्पना की जा सकती है

बनीत मेहता, अभिभावक

रोहडू के सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी का सिलेबस है, जबकि यहां सीबीएसई स्कूल भी होना चाहिए। बाजार में रहने के बावजूद दस किलोमीटर दूर अपने बच्चे को सरस्वती नगर सावड़ा में भेजना पड़ रहा है                

—रविंद्र ठाकुर, अभिभावक

सरकारी स्कूलों का स्तर दिन-प्रतिदिन घट रहा है। निजी स्कूलों की प्रतिस्पर्धा में सरकारी स्कूल काफी पीछे चल रहे हैं। छात्रों को बेहतर शिक्षा न मिलने के लिए जितने जिम्मेदार शिक्षक हैं, उससे कहीं अधिक अभिभावक भी हैं, जो सरकारी स्कूलों की ओर जाने के बजाय निजी स्कूलों में अपने बच्चों को प्राथमिकता देते आए हैं। इससे सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का एक वर्ग तैयार हो गया है, जिसमें गरीबों के बच्चे सरकारी स्कूलों में हैं, तो मध्यम व ऊंचे वर्गों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं

सुखदेव चौहान, अभिभावक

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रोहडू छात्र मॉडल स्कूल है और यहां निजी स्कूलों की तर्ज पर या इससे भी बेहतर सुविधाएं हैं। स्कूल के पास काफी बड़ा मैदान भी है, जो किसी भी निजी स्कूल के पास नहीं है। स्कूल में काफी अच्छी पढ़ाई भी है। हमने यहां पढ़ाई का स्तर देखकर ही बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर यहां दाखिला दिलाया है और आज वह यहां बच्चों को पढ़ाने से खुश हैं। भारी भरकम पैसे चुकाने पड़ते थे, उससे भी अब राहत मिल गई है 

राजेश हिमालयन, अभिभावक

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या सड़कों को लेकर केंद्र हिमाचल से भेदभाव कर रहा है ?

View Results

Loading ... Loading ...

Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV