लॉकडाउन से सैलरी पर संकट

Apr 2nd, 2020 12:22 am

उद्योग बंद होने के कारण लाखों कर्मियों की पगार रुकी, कर्फ्यू में आफिस नहीं पहुंच पा रहे एचआर-अकाउंटेंट

बीबीएन-औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन के तीन हजार उद्योगों में कार्यरत करीब पांच लाख कामगारों व कर्मचारियों के वेतन की अदायगी अधर में लटकती नजर आ रही है। दरअसल सरकार का लॉकडाउन के दौरान मजदूरों-कामगारों को वेतन देने का आदेश है, लेकिन हालात ये हैं कि लॉकडाउन व कर्फ्यू की वजह से घरों में कैद जीएम, एचआर और अकाउंटेंट उद्योगों का रुख ही नहीं कर पा रहे हैं। इससे लाखों कर्मचारियों व कामगारों के वेतन अदायगी पर संशय बना हुआ है। हिमाचल दवा निर्माता संघ सहित क्षेत्र के अन्य औद्योगिक संगठनों ने इस मसले को श्रमायुक्त व राज्य सरकार के समक्ष उठाया और लॉकडाउन व कर्फ्यू के बीच सात अपै्रल तक एचआर और अकाउंट्स स्टाफ को उद्योग में आने की छूट देने की मांग की है। बीबीएन के उद्योगपतियों का कहना है कि उद्योगों में काम करने वाले एचआर, अकाउंटेंट को कुछ दिन आने जाने की अनुमति मिले, ताकि वे खातों में पगार डाल सकें। लॉकडाउन के चलते 15 अप्रैल तक सभी अपने घरों में हैं। न कोई आफिस जा पा रहा है और न ही कुछेक दवा उद्योगों को छोड़ कोई उद्योग चल रहा है। ऐसे में पहले से परेशान कर्मचारियों और कामगारों को वेतन नहीं मिला, तो उनका जीवनयापन मुश्किल हो जाएगा। हिमाचल दवा निर्माता संघ ने राज्य सरकार व श्रमायुक्त को भेजे ज्ञापन में कहा है कि बीबीएन के उद्योगपति, एचआर व अकाउंट स्टाफ चंडीगढ़, पंचकूला, पिंजौर, कालका, जीरकपुर या रोपड से अपडाउन करता है, लॉकडान के बाद से उद्योग बंद होने से इनकी आवाजाही बंद है। हालांकि आवश्यक सेवाओं से जुडें करीब 200 दवा वे सेनेटाइजर उद्योग चल रहे हैं, लेकिन इनका स्टाफ भी पड़ोसी राज्यों में फंसा पड़ा है। ऐसे में इनके उद्योगों में काम कर रहे हजारों कामगारों को भी वेतन देना संभव नहीं हो पा रहा है। अमूमन सभी उद्योगों में ऑनलाइन वेतन अदायगी की जाती हैं। इसके लिए सॉफ्टवेयर बने हुए हैं, इनमें पूरे माह की उपस्थिति की गणना कर वेतन डाला जाता है। इस बार अनुपस्थिति होने पर भी वेतन नहीं काटना है। खातों में वेतन डालने के लिए सॉफ्टवेयर को भी कमांड देनी होगी। इसके लिए ऑफिस जाना आवश्यक है। वेतन बनाने का काम अधिकांश इंडस्ट्रीज और ऑफिस में एचआर विभाग की ओर से होता है। अधिकतर इंडस्ट्रीज कर्मचारियों को वेतन बैंक के जरिए करती है। उसके लिए आवश्यक है कि कर्मचारी या अधिकारियों की पूरे माह की उपस्थिति की जांच हो। किसी ने लोन लिया है, तो अब तक कटौती से वेतन आता था।

परमिशन मिले, तो हल होगी दिक्कत

एचडीएमए के अध्यक्ष राजेश गुप्ता, महासचिव मुनीष ठाकुर ने कहा कि बीबीएन सहित हिमाचल के सभी औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित उद्योगों के मालिक वेतन अदायगी को लेकर चिंतित हैं। पहले से ही उद्योगपति खासकर एसएसएमई आर्थिक मंदी के लिए सरकार, प्रशासन व श्रम विभाग से संपर्क साधा गया है, ताकि कोई रास्ता निकल सके और कुछ लोगों को इंडस्ट्री में जाकर वेतन बनाने की इजाजत मिल सके। हम चाहेंगे कि पुलिस लिमिटेड परमिशन दे, ताकि यह समस्या हल हो सके।

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