हर वर्ग को राहत देगा मोदी का पैकेज

May 19th, 2020 12:06 am

सतपाल सिंह सत्ती

पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

सरकार ने जो प्रावधान किए हैं, उनके मुताबिक किसानों की निश्चित आय, जोखिम रहित खेती और गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाया जाएगा। इससे किसानों का उत्पीड़न रोका जाएगा और किसानों के जीवन में सुधार आएगा। अब किसान बिचौलियों के चक्कर में न पड़कर निर्यातकों और बड़े कारोबारियों के साथ काम कर सकेंगे। सबसे खास बात यह भी है कि आवश्यक वस्तुओं के लिए जो कानून 1955 में बनाया गया था, उसमें बदलाव किया जा रहा है। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ेगी…

कोरोना वायरस महामारी के इस संकटकाल में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंची है। विश्व की कई महा शक्तियों की अर्थव्यवस्था तो तहस-नहस हो गई है। इस महामारी के दुष्प्रभावों से हमारा देश भी अछूता नहीं है और लंबा लॉकडाउन चलने से देश की आर्थिक गतिविधियां और अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने लगातार देश की जनता का मनोबल बनाए रखा है और साथ ही हर वर्ग को राहत देने की भरपूर कोशिश की है। लॉकडाउन की अवधि में मोदी सरकार ने सबसे पहले एक लाख 70 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक पैकेज घोषित करके लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित हुए गरीब लोगों की मदद के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाए थे। जिन लोगों को तुरंत मदद की जरूरत थी, उनके प्रति सरकार ने संवेदनशीलता और पूरी उदारता दर्शाई थी। जब देश की जनता को इस महामारी से बचाने के लिए लॉकडाउन की अवधि  बढ़ाई गई तो निश्चित रूप से देश की अर्थव्यवस्था का प्रभावित होना लाजिमी ही था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से चैनलों पर देश के सामने आकर कोरोना वायरस से जूझ रहे भारत की अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया और साथ ही आत्मनिर्भर भारत की मजबूत बुनियाद भी रखी। भारतीय अर्थव्यवस्था 200 लाख करोड़ रुपए की है । भारत ने साल 2020-21 के लिए बजट में करीब 30 लाख करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं। 20 लाख करोड़ रुपए का मोदी सरकार का यह आर्थिक पैकेज दुनिया के बड़े प्रोत्साहन पैकेजों में से एक है और चीन, इटली व ब्रिटेन से भी बड़ा है यह पैकेज। यहां एक और महत्त्वपूर्ण बात का मैं उल्लेख करना चाहूंगा और वह यह है कि मोदी सरकार का 20 लाख करोड़ का यह राहत पैकेज पाकिस्तान द्वारा वर्ष 2019 में पेश किए गए उनके कुल बजट का छह गुना है। पाकिस्तान सरकार ने पिछले साल 7022 बिलियन पाकिस्तानी रुपए का बजट पेश किया था। भारतीय रुपए में यह रकम करीब 3.30 लाख करोड़ है। पाकिस्तान का एक रुपया भारत के 47 पैसे के बराबर है। इस लिहाज से भारत का राहत पैकेज पाकिस्तान के बजट से छह गुना ज्यादा है।

यह राहत पैकेज हमारे देश की जीडीपी के 10 फीसदी के बराबर का राहत पैकेज है। अब तक अमरीका अपनी जीडीपी के 13.3 फीसदी और जापान 21.1 फीसदी से ज्यादा के पैकेज का ऐलान कर चुका है। इस पैकेज में गरीबों के लिए अनाज उपलब्ध कराने तथा गरीब महिलाओं व बुजुर्गों को नकद मदद देने के लिए घोषित एक लाख 70 हजार करोड़  का पैकेज और रिजर्व बैंक की तरफ  से की जा चुकी घोषणाएं भी शामिल हैं। यह आर्थिक पैकेज देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ने में निश्चित रूप से मदद करेगा। हमारे देश में कोरोना वायरस का प्रसार धीमा करने के लिए 25 मार्च से ही लॉकडाउन चल रहा है। इस वजह से ज्यादातर आर्थिक गतिविधियों का पहिया रुका हुआ है। फिलहाल कुछ छूट के साथ देश में आर्थिक गतिविधियां शुरू हुई हैं, लेकिन छोटे, मझोले व कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ संकट से जूझ रही अर्थव्यवस्था को मदद पहुंचाने की एक क्रांतिकारी कोशिश सरकार की ओर से की गई है। एक तरह से इस ऐतिहासिक पैकेज के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने एमएसएमई और ग्रामीण एवं कुटीर उद्योग की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा किया है। प्रधानमंत्री जी का यह विजन बिलकुल सही है कि पर्याप्त संसाधन, बेहतर टेक्नोलॉजी और कच्चे माल से भारत सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन सकता है। इससे विदेशी सामान और खासकर चीन के सामान पर हमारी निर्भरता पर ब्रेक लगेगी और भारत को आगे ले जाने के लिए आत्मनिर्भर होने का प्रयास सार्थक होगा। निश्चित रूप से देश के प्रधानमंत्री के इस कदम को भारतवासी लंबे समय तक याद रखेंगे। देश में लॉकडाउन के चलते देश की अर्थव्यवस्था नाजुक दौर में पहुंच चुकी थी। औद्योगिक उत्पादन निचले स्तर पर पहुंच गया था। बड़े कारखाने बंद होने और लाखों कामगारों के बेरोजगार होने से देश के समक्ष एक नाजुक स्थिति उत्पन्न हो गई थी। लेकिन ऐसे कठिन दौर में मोदी सरकार ने जापान के बाद दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक पैकेज का ऐलान करके मायूस चेहरों पर फिर से रौनक लाने की कोशिश की है और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का पुख्ता इंतजाम किया है। देश की 80 फीसदी से अधिक आबादी गांव में रहती है और कृषि, बागबानी व पशुपालन पर निर्भर है। इसलिए इस सेक्टर को विशेष राहत देते हुए एक लाख करोड़ का कृषि आधारभूत ढांचा बनाने का प्रावधान किया है जिसमें लोकल से ग्लोबल पर जोर दिया गया है। सरकार ने जो प्रावधान किए हैं, उनके मुताबिक किसानों की निश्चित आय, जोखिम रहित खेती और गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाया जाएगा। इससे किसानों का उत्पीड़न रोका जाएगा और किसानों के जीवन में सुधार आएगा। अब किसान बिचौलियों के चक्कर में न पड़कर निर्यातकों और बड़े कारोबारियों के साथ काम कर सकेंगे। सबसे खास बात यह भी है कि आवश्यक वस्तुओं के लिए जो कानून 1955 में बनाया गया था, उसमें बदलाव किया जा रहा है। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ेगी। हिमाचल प्रदेश, देश के औद्योगिक मानचित्र पर पिछले कुछ सालों के दौरान औद्योगिक हब के रूप में उभरा है। इस पैकेज से औद्योगिकीकरण की रफ्तार को बल मिलेगा और साथ ही प्रदेश में कृषि व बागबानी आधारित अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। प्रदेश सरकार ने लगातार संकट की इस घड़ी में प्रदेशवासियों की मदद में कोई कमी नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर इस संकटकाल में लगातार स्वयं अधिकारियों के साथ स्थितियों की समीक्षा करते रहे हैं और आम आदमी को राहत पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत रहे हैं। यह बड़े हैरत और खेद की बात है कि जब पूरा देश एकजुट होकर प्रधानमंत्री जी के साथ खड़ा है और केंद्र सरकार भी जनता को लगातार राहत देने में लगी है, ऐसे कठिन हालात में भी विपक्ष के लोगों का अपने दलगत स्वार्थ के लिए भ्रामक बयानबाजी करना उनकी खोखली मानसिकता को ही जाहिर करता है।

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