ध्यूंसर महादेव मंदिर

By: Jul 18th, 2020 12:22 am

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से जिला ऊना के तलमेहड़ा नामक स्थान पर शिवालिक की पहाडि़यों के मध्य स्थित सदाशिव मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है। ध्यूंसर महादेव की महिमा अपरंपार है। भोले के दरबार में जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी मुराद मांगता है, भोलेनाथ उसे निश्चित ही पूरी करते हैं। वहीं इस मंदिर के बारे में यह भी मान्यता है कि हर वर्ष सुनहरी रंग के नाग-नागिन का जोड़ा मंदिर परिसर में प्रकट होता है और मंदिर में शिवलिंग के दर्शन करने के पश्चात लुप्त हो जाता है।

शिवलिंग को ध्यूंसर महादेव, सदाशिव के नाम से भी जाना जाता है– प्राचीन कथाओं के अनुसार लगभग 5600 वर्ष पूर्व महाभारत काल में पांडवों के पुरोहित श्री धौम्य ऋषि ने तीर्थ यात्रा करते हुए इसी ध्यूंसर नामक पर्वत पर शिव जी की तपस्या की थी। शिव जी ने प्रसन्न होकर दर्शन देते हुए वर मांगने को कहा, इस पर ऋषि ने वर मांगा कि जो कोई भी इस पुण्य क्षेत्र में आकर मेरे द्वारा स्थापित इस धौमेश्वर शिवलिंग की पूजा करेगा, उसकी मनोकामना पूर्ण हो जाए। शिव जी तथास्तु कह कर अंतर्ध्यान हो गए। इसीलिए प्राचीन काल से अब तक इस मंदिर में धौमेश्वर नामक शिवलिंग ध्यूंसर सदाशिव नाम से प्रसिद्ध है और जिसे शिवां नाम से भी जाना जाता है।

सावन माह में यहां भक्तों की उमड़ती है काफी भीड़- प्राप्त जानकारी के मुताबिक वर्ष 1948 में पहली बार जिला के इस सबसे ऊंचे स्थल पर मौजूद पवित्र शिवलिंग के स्थान पर शिवरात्रि का आयोजन किया गया था। ऊना जिला के सबसे खूबसूरत स्थलों में शिवालिक पहाडि़यों व श्रृंखलाओं में बसे तलमेहड़ा नामक स्थान में ऊंचे पहाड़ पर स्थित सदाशिव मंदिर ध्यूंसर महादेव से ऊना जिला का आलौकिक नजारा देखने को मिलता है। यूं तो वर्षभर हिमाचल ही नहीं अपितु बाहर से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन श्रावण माह में यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है। अनेक श्रद्धालु यहां भंडारे का आयोजन करते हैं, तो वहीं श्रावण मास में प्रत्येक रविवार रात्रि को यहां विशाल जागरण आयोजित किए जाते हैं, जिसमें असंख्य श्रद्धालु भगवान शिव का गुणगान सुनते हैं। सचमुच  यहां का आलौकिक दृश्य और शांत वातावरण हर किसी को यहां आने के लिए विवश कर देता है।

मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हैं विशेष सुविधाएं- मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न प्रकार की सुविधाओं का ख्याल रखने के लिए मंदिर ट्रस्ट ने बेहतरीन इंतजाम किए हैं। यहां हजारों लोगों की क्षमता के लंगरहाल के साथ-साथ जगह-जगह श्रद्धालुओं के बैठने के लिए अच्छी व्यवस्था का प्रबंध किया गया है। रात्रि ठहराव के लिए सराएं के इंतजाम के साथ 24 घंटे लंगर की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट द्वारा समाज के गरीब असहाय एवं गंभीर रूप से बीमार लोगों की मदद के लिए सहायता राशि एवं गरीब परिवार की लड़कियों की शादी के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाती है। आने वाले समय में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को मध्य नजर रखते हुए विभिन्न प्रकार के नए प्रोजेक्टों को भी शुरू किया गया है। हाल ही में राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज के कर कमलों द्वारा बुजुर्गों व दिव्यांगों की सुविधा के लिए मंदिर में लिफ्ट का भी शुभारंभ किया गया है।

कैसे पहुंचें सदा शिव मंदिर में :

सदाशिव मंदिर ध्यूंसर महादेव की दूरी सड़क मार्ग द्वारा बंगाणा-ऊना रोड़ पर नलवाड़ी चौक से वाया तलमेहड़ा लगभग 18 किलोमीटर है, वहीं धर्मशाला-ऊना रोड़ पर गांव बडूही से बंगाणा रोड़ पर लगभग 15 किलोमीटर है।          -शशि राणा, रक्कड़

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