हाइटेक एजुकेशन के ट्रैक पर जोगिंद्रनगर

By: — हरीश बहल Sep 30th, 2020 9:20 am

छोटी काशी के नामी शहरों में शुमार जोगिंद्रनगर आज हाईटेक एजुकेशन की ओर अग्रसर है। मंडी जिला का यह शहर शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा नाम कमा रहा है। लाखों छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रहा यह शहर आज एजुकेशन हब बनकर उभरा है। यहां के स्कूलों ने ऐसी क्रांति लाई कि शिक्षा के साथ-साथ खुले रोजगार के दरवाजों से प्रदेश ने तरक्की की राह पकड़ ली। हिमाचली ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के होनहारों को शिक्षित कर रहे जोगिंद्रनगर में क्या है तालीम की कहानी, बता रहे हैंह्य

— हरीश बहल

मंडी व कांगड़ा जिला की सीमा पर स्थित जोगिंद्रनगर उपमंडल शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। जोगिंद्रनगर शहर में लगभग एक दर्जन से अधिक सरकारी व निजी शिक्षण संस्थान मौजूदा समय में पांच हजार से अधिक विद्यार्थियों को उत्तम शिक्षा देने में विशेष भूमिका निभा रहे हैं। जोगिंद्रनगर में गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 1981 में निजी पाठशाला खुलने का क्रम शुरू हुआ, जो वर्ष दर वर्ष जारी है तथा शहरी क्षेत्र के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्र में भी निजी स्कूल खुलने लगे हैं। अभिभावक अपने बच्चों का भविष्य निजी पाठशालाओं में अधिक सुरक्षित समझते हैं। शायद इसी कारण वे अपने बच्चों को निजी पाठशालाओं में पढ़ाना बेहतर समझते हैं।

हालांकि दो-तीन साल से जोगिंद्रनगर क्षेत्र में अभिभावकों का रूझान सरकारी स्कूलों की तरफ बढ़ा है व सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जोगिंद्रनगर शहर में सबसे पहले शिक्षा की लौ वर्ष 1928 में सरकारी स्कूल से जगी, जबकि वर्ष 1962 में जोगिंद्रनगर में कन्याओं के लिए अलग से स्कूल का शुभारंभ हुआ। 1928 में प्राथमिक पाठशाला के रूप में खुले स्कूल को 1935 में माध्यमिक, 1949 में उच्च व 1986 में वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला का दर्जा प्राप्त हुआ। शहर में स्थापित सरकारी बाल व कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं की वर्तमान में संख्या लगभग 1300 है, जो किसी भी प्रकार से निजी स्कूलों से कम नही आंकी जा सकती।

गर्ल्स स्कूल में स्मार्ट क्लासरूम, इंग्लिश मीडियम स्टडी

निजी स्कूलों की तर्ज पर जोगिंद्रनगर में आदर्श राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या पाठशाला में भी तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास दो-तीन साल से चल रहा है। पाठशाला में न केवल स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए गए हैं, बल्कि आधुनिक कम्प्यूटर लैब व लाइब्रेरी सहित छठी कक्षा से जमा दो कक्षा तक इंग्लिश मीडियम की कक्षाएं भी शुरू की गई हैं। पाठशाला में छात्राओं की उपस्थिति व परफॉर्मेंस की सूचना अभिभावकों को मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से दी जाती है, जबकि छात्राओं की सुरक्षा की दृष्टि से विद्यालय में ही कैंटीन की सुविधा दी गई है, ताकि आधी छुट्टी के समय छात्राएं पाठशाला से बाहर न जाएं। सुरक्षा की दृष्टि से विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे भी स्थापित किए गए हैं, जबकि दसवीं व जमा दो कक्षा की  छात्राओं को बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी हेतु अतिरिक्त कक्षाओं की भी सुविधा प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु छात्राओं के मार्गदर्शन हेतु बाहर से विशेषज्ञ शिक्षाविदों की सेवाएं भी पाठशाला द्वारा ली जा रही हैं।

….1978 से शुरू हुआ निजी स्कूलों का सफर

शहर में निजी स्कूलों का सफर वर्ष 1978 में शुरू हुआ और शहर में इसाई मिशनरी व आनंद मार्ग के निजी स्कूल खुले, जबकि इसके बाद वर्ष 1981 में  नगर के कुछ नागरिकों द्वारा चंबा से आए एक बुद्धिजीवी की प्रेरणा से अपने तौर पर भारतीय पब्लिक स्कूल के नाम से निजी स्कूल की शुरुआत आर्य समाज मंदिर के भवन में की, जो स्कूल आज भी अपनी सेवाएं दे रहा है। इसके बाद उत्तम व गुणात्मक शिक्षा देने के उद्देश्य से शहर में अनेक निजी स्कूल खुले।

ब्वायज स्कूल में सबसे पहले जगी शिक्षा की लो

जोगिंद्रनगर की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बाल पाठशाला क्षेत्र की पहली ऐसी पाठाशाला है, जहां सबसे पहले क्षेत्रवासियों के लिए शिक्षा की लो जगी। पाठशाला का अपना एक इतिहास है और राजाओं के समय में वर्ष 1928 में प्राथमिक पाठशाला के तौर शुरू हुई, इस पाठशाला का दर्जा समयानुसार व मांग के अनुसार बढ़ता गया व वर्ष 1986 में इस वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला का दर्जा प्राप्त हुआ और आज भी यह पाठशाला शिक्षा का अलख जगाए हुए है। पाठशाला का न केवल अपना आलीशान भवन है, बल्कि पाठशाला में तमाम बुनयादी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। अभिभावकों का सरकारी स्कूलों के प्रति जगते विश्वास के चलते पाठशाला में दो-तीन साल से छात्रों की संख्या में भी निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। पाठशाला का पूर्व का इतिहास देखा जाए, तो हाई स्कूल रहने तक एक लंबे समय तक पाठशाला के विद्यार्थी मेरिट लिस्ट में अपना नाम अंकित करवाते रहे हैं।

….जमीन की कोई कमी नहीं, पर पुराने हैं सरकारी स्कूलों के भवन

जोगिंद्रनगर में स्थापित सरकारी स्कूलों के पास जमीन की तो कोई कमी नहीं है, लेकिन अधिकांश भवन पुराने बने हुए हैं, जबकि इनके कुछ ब्लॉक नवनिर्मित हैं, वहीं शहर के अधिकांश निजी स्कूलों के अपने आलीशान भवन हैं, जबकि कुछ निजी पाठशालाओं के भवन निर्माणाधीन भी हैं। कुल मिलाकर देखा जाए, तो शहर में कुछ निजी पाठशालाओं के भवन सरकारी पाठशालाओं से चार कदम आगे दिखते हैं, जबकि कुछ निजी पाठशालाओं के पास पर्याप्त भवन हैं।

पाठशालाएं

* दयानंद भारतीय पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल (1981) —900 विद्यार्थी

* न्यू क्रिसेंट पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल (2006) —850 विद्यार्थी

* माउंट मौर्या इंटरनेशनल स्कूल (2012) —900 छात्र

* शांति निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल (1998)       —350 विद्यार्थी

* वैदिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल (2016) —250 छात्र

* एसेंट पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल (2006)       —550 विद्यार्थी

* राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बाल पाठशाला (1928)—650 छात्र

* आदर्श राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (1962)     —625 छात्राएं

बराबरी की टक्कर दे रहे निजी-सरकारी संस्थान

जोगिंद्रनगर क्षेत्र में जहां निजी पाठशालाओं के पास अपने आलीशान भवन हैं, वहीं सरकारी तौर पर क्षेत्र में विद्यालयों की कमी नहीं है। क्षेत्र में मौजूदा में लगभग अढ़ाई दर्जन से अधिक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाएं चल रही हैं और अधिकांश पाठशालाओं के पास अपने भवन हैं, जबकि बुनियादी सुविधाओं की भी कमी नहीं है। हालांकि इनमें से अधिकांश पाठशालाएं ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, लेकिन फिर भी सुविधाओं के हिसाब से इन्हें किसी से कम नहीं आंका जा सकता। ग्रामीण क्षेत्र की पाठशालाएं भी शिक्षा के साथ-साथ खेल व अन्य गतिविधियों में अब शहरी क्षेत्र के स्कूलों को पूरी टक्कर दे रही हैं व बेहतर प्रदर्शन कर अग्रणी रह रही हैं। ग्रामीण स्तर के स्कूलों को आगे लाने में शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों का भी बहुत बड़ा रोल है तथा पहले की तुलना में अब अधिक पढ़े-लिखे अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर अधिक जागरूक हैं और वे समय-समय पर अपने बच्चों बारे पाठशाला से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण स्तर की पाठशालाएं भी न केवल बेहतर परिणाम दे रही हैं, बल्कि ग्रामीण स्कूलों के बच्चे भी पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

90 फीसदी से ज्यादा लोग साक्षर

साक्षरता दर की बात करें, तो प्रदेश स्तर की साक्षरता दर की तुलना में जोगिंद्रनगर क्षेत्र में लगभग सवा लाख से अधिक आबादी के 90 प्रतिशत से अधिक लोग साक्षर हैं और इसमें पुरुषों की साक्षरता दर जहां लगभग 94 प्रतिशत से अधिक है, वहीं महिलाओं की साक्षरता दर लगभग 86 प्रतिशत से अधिक है।

अभिभावकों का कॉलम

ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में हालात सामान्य नहीं

ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में बुनियादी ढांचा पूरा नहीं है और न ही वहां शिक्षकों की संख्या पूरी होती है, जबकि शहरी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की संख्या पूरी होती है व निजी स्कूलों के साथ प्रतिस्पर्धा के चलते शिक्षा के स्तर में भी गुणवत्ता बनी रहती है। शहरी स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ खेल व अन्य गतिविधियां भी ग्रामीण स्कूलों की तुलना में ज्यादा होती है

— नागपाल शर्मा

अपना बेस्ट देने में लगे हैं सभी इंस्टीच्यूट

मौजूदा समय में शिक्षा के क्षेत्र में भारी प्रतिस्पर्धा आ गई है। ऐसे में सरकारी व निजी स्कूल अपना बेस्ट देने के लिए प्रयासरत रहते हैं। ग्रामीण स्तर में शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षा के क्षेत्र को उचित मुकाम नहीं मिल पा रहा, जबकि शहरी क्षेत्र में निजी व सरकारी सभी शिक्षण संस्थानों मेें शिक्षकों के पद भरे होते हैं

— भास्कर गुप्ता

नई सुविधाएं मिलने से ऊंचा हुआ शिक्षा का स्तर

ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों का न होना शिक्षा पर विपरीत असर डाल रहा है। शहरी क्षेत्र के निजी व सरकारी स्कूलों में उचित मूलभूत सुविधाओं को कारण शिक्षा का स्तर ऊंचा हुआ है। शहरी क्षेत्र के अभिभावक व बच्चे भी अपने भविष्य को लेकर ज्यादा जागरूक होते हैं

— शशि धरवाल

एजुकेशन के लिए शहर बेहतर ऑप्शन

शहरी क्षेत्र के स्कूलों में बच्चे बेहतरीन शिक्षा के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं के कारण खेल व विभिन्न अन्य गतिविधियों में भी भाग ले सकते हैं। शहरी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों का होना भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। शहर शिक्षा के बेहतरीन विकल्प हैं

— नवनीत राठौर

सिटी के स्कूलों में पढ़ाना उचित समझते हैं पेरेंट्स

शहर में सरकारी व निजी विद्यालयों में शिक्षकों के तमाम पद लगभग भरे होते हैं व बच्चे हर विषय में संबंधित शिक्षक का मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त शहर में अन्य गतिविधियां भी सुचारू होने के कारण अधिकांश अध्यापक अपने बच्चों को शहर के स्कूलों में पढ़ाना बेहतर समझते हैं

— रजनी कांत शर्मा

क्या है शिक्षाविदों की राय

बढ़ता जा रहा है कंपीटीशन

सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूलों के खुलने से प्रतिस्पर्धा के कारण शिक्षा के स्तर में बढ़ोतरी हुई है और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति माहौल बना है। क्षेत्र में शिक्षा के स्तर में बढ़ोतरी के कारण ही भारी संख्या में विद्यार्थियों के नवोदय व सैनिक स्कूलों में जाने से आज क्षेत्र के अधिकांश लोग सेना में अधिकारी पद पर सेवारत हैं

—  पदम सिंह राणा, शिक्षाविद

जॉब के लिए तैयार कर रहे स्कूल

ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण अभिभावक शहरी क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने में अधिमान देते हैं। शहरी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों के कारण भी शहरी स्कूलों में लोगों का रूझान बढ़ा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी व बुनियादी सुविधाओं के कारण भी शहरी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करने वालों में दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है

—  प्रकाश राठौर, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य

सरकारी स्कूलों में कोई कमी नहीं

शहरी क्षेत्रों में निजी स्कूलों के साथ प्रतिस्पर्धा के  कारण सरकारी स्कूल भी किसी से कम नही आंके जा सकते। शहरी क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में पर्याप्त व उच्च शिक्षित स्टाफ सहित आधुनिक प्रयोगशालाएं व पुस्तकालय होने तथा वोकेशनल कोर्सेज होने व अभिभावकों के साथ शिक्षा संवाद होने के कारण भी सरकारी स्कूलों के प्रति विश्वास बढ़ा है

—  रविंद्र शर्मा, प्रधानाचार्य

निजी स्कूलों ने बनाया पढ़ाई का माहौल

शिक्षा एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनकर हर कोई अपने अंदर एक प्रकाश का अनुभव करता है।प्रतिस्पर्धा के चलते शहर में  निजी स्कूलों ने अधिकाधिक शैक्षणिक माहौल बना दिया है। किसी भी शैक्षणिक संस्थान की कार्यशैली, उसके परिणाम, बुनियादी ढांचा व सार्थक गतिविधियों की बदौलत विद्यार्थियों को शिखर तक पहुंचाए जाने के लिए शहरी क्षेत्र के स्कूल अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं

—  विजय शर्मा, शिक्षाविद

पढ़ाई के साथ खेलों में भी तरक्की

पिछले कुछ समय से जोगिंद्रनगर ने शिक्षा के क्षेत्र में काफी उन्नति की है। शहर में पढ़ाई की गुणवत्ता के साथ-साथ खेलों के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व तरक्की हुई है। स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की बदौलत जोगिंद्रनगर एथलेटिक्स में अग्रणी भूमिका में है

—  सुनील ठाकुर, प्रधानाचार्य

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