नई शिक्षा नीति से बदलेंगे आरटीई नियम, भाजपा विधायक राजीव बिंदल लाए प्रस्ताव

By: सिटी रिपोर्टर—शिमला Sep 16th, 2020 10:20 am

विधानसभा में न्यू एजुकेशन पालिसी पर चर्चा, भाजपा विधायक राजीव बिंदल लाए प्रस्ताव

विधानसभा में मंगलवार को नई शिक्षा नीति पर चर्चा हुई। चर्चा का उत्तर शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर बुधवार को देंगे। नियम-130 के तहत भाजपा विधायक राजीव बिंदल ने चर्चा का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि अब नई शिक्षा नीति आने के बाद आरटीई नियम में भी बदलाव होगा। शिक्षा का अधिकार अब बच्चों को तीन से 18 साल तक का हो जाएगा। डा. बिंदल ने कहा कि नई शिक्षा नीति की खास बात यह है कि विद्यार्थी शोधपरक बनें। सामयिक विषयों को लेकर जब विद्यार्थी शोध करेंगे, तो वे भारत को विश्व पटल पर खड़ा करेंगे। नई नीति में एक ही लक्ष्य है कि भारत दुनिया की तीसरी बड़ी शक्ति बने।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। देश के स्वाबलंबन और आत्मनिर्भर बनाने की ओर ले जाने की दिशा में अहम कदम होगा। डा. बिंदल ने कहा कि नई शिक्षा नीति में सौ फीसदी एनरोलमेंट होगी। हायर ऐजुकेशन में अभी छात्रों की इनरोलमेंट 50 फीसदी तक ही रह जाती है, जिसे बढ़ाया जाएंगा, वहीं 2022 से पहले शिक्षकों को विशिष्ट कोर्सेज के लिए तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर खर्च को बढ़ाया जाएगा। इसमें जीडीपी का 4.4 फीसदी के स्थान पर छह फीसदी व्यय करने का प्रावधान किया गया है। नई नीति में हायर एजुकेशन में प्लस-टू के बाद पांच साल में विद्यार्थी मास्टर डिग्री ले पाएगा। इससे युवा का समय बचेगा और वह सीधे पीएचडी कर सकेगा।

कब करनी है लागू, कोई पता नहीं

पालमपुर से कांगे्रस विधायक आशीष बुटेल ने कहा कि 2040 तक इस नीति को लागू करने की बातें हो रही हैं, कब करनी है, किसने करनी है, इसका कोई पता नहीं है। अभी तो इसका किसी को पता भी नहीं है।

शिक्षा का होगा निजीकरण

माकपा सदस्य राकेश सिंघा ने नई शिक्षा नीति का विरोध करते हुए कहा कि इसमें सबको मुफ्त शिक्षा नहीं मिलेगी। शिक्षा का निजीकरण किया जा रहा है और यह सरासर गलत है और इसका वह विरोध करते हैं। प्रदेश में शिक्षा का व्यापारी करण हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा सदस्य रमेश धवाला, खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग, नरेंद्र ठाकुर, विनोद कुमार ने भी विचार रखे।

जितनी चर्चा करनी है, करें

सिटी रिपोर्टर—शिमला

शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर चर्चा के बीच में कई बार उठे और सदस्यों की आपत्ति पर स्थिति साफ करते रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति पर चर्चा होनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि जितनी चर्चा हो सकती है, वह की जाए। भाषा की बात कर रहे हैं, तो किसी भी भाषा के खिलाफ इसमें बात नहीं है। इसमें भारतीय भाषाओं के अलावा दुनियाभर की भाषाओं की बात की है। त्रिभाषा सूत्र को भी खत्म करने वाली बात गलत है। इस फार्मूले को लागू किया जाना पहले की तरह जारी रहेगा। इसमें अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी आदि वर्गों का ध्यान रखा गया है।

पांच साल में पीजी

भाजपा सदस्य राकेश जम्वाल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पांच साल की पोस्ट ग्रेजुऐशन करने के बाद छात्र सीधे पीएचडी में दाखिला ले सकेंगे। नई नीति में शिक्षा के स्तर को उठाया जाएगा और कई विषय समाहित किए गए हैं। इससे युवाओं को गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिलेगी और देश का टैलेंट दूसरे देशों को नहीं जाएगा। इससे शोध के क्षेत्र में विकास होगा।

सरकार की नीति ख्याली पुलाव

कांग्रेस सदस्य जगत सिंह नेगी ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में बड़ी-बड़ी बातें तो कीं जा रही हैं, लेकिन बिना छत के स्कूल, शिक्षकों की कमी के बिना कैसे यह दावे सफल होंगे। सदन में उन्होंने आरोप लगाया कि नई शिक्षा नीति की, तो सारी जानकारी शिक्षा विभाग को भी नहीं है। अभी यह ख्याली पुलाव है और इसे जमीन पर लाने में समय लगेगा। अभी तो यहां सरकारी स्कूलों में छत तक नहीं है। इस शिक्षा नीति में कहा गया है कि पांचवी तक मातृभाषा में पढ़ेंगे, लेकिन हिमाचल में अपनी मातृभाषा ही नहीं है। नई शिक्षा नीति में बनने वाले विवि में गरीब का बच्चा नहीं पढ़ पाएगा और शिक्षा चंद लोगों के हाथों में चली जाएगी।

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