पंचायत चुनाव. .. अंबोटा का यह वार्ड करेगा इलेक् शन का बहिष्कार, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे आप

By: अजय ठाकुर, गगरेट Sep 20th, 2020 6:38 pm

अजय ठाकुर, गगरेट
पंचायत चुनाव की आहट से ही जहां चुनाव लडऩे के इच्छुक उम्मीदवारों की उम्मीदें हिलोरे मारने लगी हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पिछले पांच साल के विकास का लेखा-जोखा देखकर इस कद्र आहत हैं कि चुनाव के नाम से ही उनका पारा चढऩे लगा है। विकास खंड गगरेट की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत अंबोटा के वार्ड नंबर 11 के बाशिंदों ने आगामी पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है।

यहां के बाशिंदों का आरोप है कि निवर्तमान ग्राम पंचायत ने विकास के नाम पर उनके क्षेत्र में एक ईंट तक नहीं लगाई। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधि चुनने का कोई औचित्य ही नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बार पंचायत चुनाव का पूर्णतया बहिष्कार किया जाएगा। तरल व ठोस कचरा प्रबंधन के नाम पर कुछ नहीं किया ग्राम पंचायत अंबोटा के वार्ड नंबर 11 के विक्रम सिंह, सुनील कुमार, सतीश कुमार व जय सिंह सहित कई लोगों ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्राम पंचायतों को भी ठोस व तरल कचरा प्रबंधन के नाम पर बजट मिला था, लेकिन ग्राम पंचायत ने ठोस कचरे के लिए न तो उनके वार्ड में कूड़ादान स्थापित करवाए और न ही तरल कचरा प्रबंधन के लिए भूमिगत पाइप बिछाई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे जनप्रतिनिधियों के चलते ही स्वच्छ भारत अभियान कागजी साबित हो रहा है। पंचायत खुले में शौचमुक्त घोषित हो चुकी है लेकिन यहां स्थापित एक फैक्ट्री के कामगार खुले में शौच जाकर गंदगी फैला रहे हैं। बार-बार पंचायत प्रतिनिधियों को इससे अवगतकरवाने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी समस्याएं भी पंचायत प्रतिनिधि दूर न कर पाएं तो उन्हें चुनने का क्या लाभ इसलिए इस बार पंचायतचुनावों का बहिष्कार होगा।

वार्ड नंबर ग्यारह के लोगों का कहना है कि मोहल्ला लंबड़ां को जाने वाले रास्ते की स्थिति अति दयनीय है लेकिन पंचायत ने इसकी सुध तक नहीं ली। राजस्व रिकार्ड में यह रास्ता सात मीटर है लेकिन वस्तुस्थिति इससे बिलकुल भिन्न है। इस रास्ते पर कई जगह अतिक्रमण हो चुका है लेकिन पंचायत प्रतिनिधि अपने इस कार्यकाल में चुप्पी साधे रहे। जहां तक कि एक तालाब में कुछ घरों का गंदा पानी डाल दिया गया लेकिन पंचायत प्रतिनिधि चुपचाप देखते रहे।

बेघर लोगों को मकान देने के लिए सरकार द्वारा योजनाएं चलाई गई हैं। मोहल्ला लंबड़ां के रमेश सिंह  का कच्चा मकना ढहे अरसा हो गया। लेकिन उसे प्रधान मंत्री आवास योजना या किसी अन्य योजना के तहत आज तक पक्का घरनसीब नहीं हो पाया। पंचायत प्रतिनिधि इसलिए ही चुने जाते हैं ताकि जरूरतमंद तक सरकारी सहायता पहुंचे लेकिन अगर जरूरतमंद तक सरकारी योजनाओं का लाभ ही न पहुंचे तो ऐसी पंचायत चुनने का क्या लाभ।

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