नए कृषि कानूनों के साइड इफेक्ट

By: Oct 7th, 2020 8:00 am

कृषि विधेयक पास होने के पहले ही कृषि उपज मंडी समितियों ने बैरियर हटा दिए। नतीजतन अब कोई भी किसी भी किस्म का शुल्क व्यापारियों को नहीं देना होता। अगर मंडियों  की बात करें तो वहां यूजर चार्जेस के नाम से मंडी शुल्क वसूला जा रहा है…

कांगड़ा। सब्जी मंडी के आढ़तियों को कृषि विधेयक का भले ही कोई नुकसान न हो लेकिन बाहरी व्यापारियों को रियायत देने से  आढ़तियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। दूसरा कृषि उपज मंडी समिति के कर्मचारी भी अपने वेतन को लेकर भयभीत हैं। दरअसल कृषि विधेयक पास होने के पहले ही कृषि उपज मंडी समितियों ने बैरियर हटा दिए। नतीजतन अब कोई भी किसी भी किस्म का शुल्क व्यापारियों को नहीं देना होता। अगर मंडियों  की बात करें तो वहां यूजर चार्जेस के नाम से मंडी शुल्क वसूला जा रहा है। मंडी के आढ़तियों का मानना है कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया की बात करते हैं तो दूसरी तरफ आढ़तियों को भारी भरकम कागजी कार्रवाइयों में उलझा रखा है। ऐसी कागजी कार्यवाही का कोई औचित्य ही नहीं है । वे बताते हैं कि अगर कोई व्यापारी सीधे पंजाब से सब्जी लाकर खुदरा  दुकानदारों को बेचता है तो उसे कोई भी शुल्क मंडी समिति को अदा नहीं करना पड़ेगा ।

मंडी में कार्य करने वालों को यूजर चार्जेस के नाम से एक फीसदी मंडी शुल्क समिति को दिया जाता है। आढ़ती एसोसिएशन  कांगड़ा पंजीकृत के प्रधान इंद्रजीत सिंह मंडी शुल्क को खत्म करने की पैरवी करते हैं । उनका कहना है कि अगर आढ़ती जायज कार्य कर रहे हैं तो उनसे मंडी शुल्क वसूला जा रहा है जबकि पंजाब से  माल लाने वाले व्यापारियों को कोई शुल्क नहीं है । अगर बिचौलियों को बाहर ही निकालना है तो मंडिया बनाने की क्या जरूरत है।  मंडियों में  अगर छोटे किसान  अपना उत्पाद लेकर मंडियों में आते हैं  तो  सुबह 1 घंटे में ही अपना उत्पाद बेच कर चले जाते हैं बाकी का पूरा दिन वे अन्य कार्य में लगाते हैं।  मनमोहन सिंह कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार ने एक फीसदी  मंडी  शुल्क समाप्त कर दिया था लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद उसकी वसूली यूजर चार्जेंज के नाम से होती रही है । ऐसे में कृषि उपज मंडी समितियों के कर्मचारियों को भी वेतन के लाले पड़ सकते हैं। सरकार के ताजा अध्यादेश से कृषि उपज मंडी समितियों के कर्मचारियों को वेतन भत्ते न मिलने का भय सताने लग पड़ा है।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश राज्य विपणन बोर्ड एवं कृषि उपज मंडी समितियों के कर्मचारियों को राज्य कर्मचारी घोषित करने की पैरवी की है तथा वेतन व भत्ते सुरक्षित करने की सरकार से मांग की है। हिमाचल प्रदेश राज्य विपणन बोर्ड एवं कृषि उपज मंडी समितियों के कर्मचारी संघ ने  भारत सरकार द्वारा पारित कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य  2020 का विरोध  किया है । संघ के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा का कहना है कि मंडी समितियों की आय में 80 प्रतिशत कमी आई है। जिससे आने वाले एक या दो वर्षों के पश्चात कर्मचारियों को वेतन भत्ते के  लाले पड़ जाएंगे । ऐसे में हिमाचल प्रदेश राज्य बोर्ड एवं कृषि उपज मंडी समिति कर्मचारियों को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए।  संघ के मुख्य सलाहकार प्रताप सिंह पठानिया ने बताया कि मंडी समितियों के  कर्मचारियों को वेतन तो मिलता है लेकिन अभी भी पेंशन का कोई भी प्रावधान नहीं है । लिहाजा यह कर्मचारी बिना पेंशन के सेवानिवृत्त हो रहे हैं । वे समितियों के कर्मचारियों के अधिकार सुनिश्चित करने की पैरवी करते है।

रिपोर्ट राकेश कथूरिया, कांगड़ा

मोदी सरकार के नए बिलों की खिलाफत तेज

किसानों की तरफ से पहली जनहित याचिका हिमाचल से

हिमाचल के किसान देश भर के फार्मर्ज के लिए मैदान में उतर गए हैं। मोदी सरकार के नए बिलों के विरोध में किसानों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पहली जनहित याचिका दायर हो गई है। पेश है पांवटा साहिब से हमारे सहयोगी दिनेश पुंडीर की रिपोर्ट …

पांवटा साहिब। केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए कृषि बिलों  का विरोध तेज हो गया है।  कांग्रेस का दावा है कि किसानों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पहली जनहित याचिका हिमाचल से दायर हुई है। ये याचिका पांवटा सहिब से भेजी गई है। गौर रहे कि पांवटा साहिब मे सैकड़ों किसानों ने कांग्रेस नेता अनिंद्र सिंह नौटी की अगुवाई मे नगर में ट्रैक्टर पर रोश मार्च निकाला था। किसानों ने  एसडीएम पांवटा साहिब एलआर के माध्यम से यह याचिका भेजी है।  स्थानीय कृषि उपज मंडी एपीएमसी में जाकर अनिन्द्र सिंह नौंटी ने सभी किसानों को एकजुट होने को कहा था। इस दौरान नौॅंटी ने सभी किसानों के साथ पूरे शहर का ट्रेक्टरों पर एक चक्कर भी लगाया था। बहरहाल किसान बिलों का जोरदार विरोध हो रहा है।

10 को मंडी में कांग्रेस का किसान सम्मेलन

शिमला। केन्द्र सरकार द्वारा कृषि बिल पारित करने के बाद इसका देशभर में विरोध हो रहा है। जानकारी के अनुसार इस किसान सम्मेलन में प्रदेश की पूरी कांग्रेस जहां मौजूद रहेगी वहीं किसानों के अलग-अलग क्षेत्रों से प्रतिनिधियों को यहां पर बुलाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में भी एक रणनीति बनाई गई है जिसके तहत दो अक्टूबर से पूरे प्रदेश में धरने दिए गए और प्रदर्शन होगा। ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन करने को कहा गया। इसके बाद हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जाएगा और उसे देश के राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। दस अक्टूबर को कांग्रेस मंडी में किसान सम्मेलन करेगी जिसमें सभी नेता जिनमें विधायकों को भी बुलाया गया है वहां पर मौजूद रहेंगे और चर्चा करेंगे। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के नेतृत्व में यह मुहिम छेड़ी जा रही है जिसमें किसानों को कांग्रेस अपने साथ लेने की कोशिश में है।

हमीरपुर पहुंचा सब्जी का 1526 किलो बीज

हमीरपुर। सर्द मौसम में उगाए जाने वाले सब्जियों के बीज हमीरपुर पहुंच गए हैं, किसानों को ब्लॉकों के जरिए घरद्वार बीज मुहैया करवाए जा रहे हैं। कृषि विभाग हमीरपुर के पास सब्जियों के 1526 किलो बीज पहुंच गए हैं। कृषि विभाग किसानों को लगातार डिमांड के मुताबिक बीज मुहैया करवाने में  लगा हुआ है, ताकि किसानों को बीज के लिए यहां-वहां न भटकना पड़े।

हिमाचली किसानों के हीरो युद्ध चंद सकलानी, 95 की उम्र में भी हौसला बुलंद

नेरचौक नगर परिषद के ग्रामीण क्षेत्रों को नगर परिषद से हटाने की प्रक्रिया के चलते शहरी विकास विभाग की ओर से आए प्रस्ताव को लेकर नागचला वार्ड में लोगों ने खूब जश्न मनाया। लोगों ने मिठाइयां बाटीं और बैंड बाजे पर नाचकर खुशी का इजहार किया। स्थानीय ग्रामीणों ने इस मौके पर नगर परिषद विरोध संघर्ष समिति के अध्यक्ष 95 वर्षीय किसान नेता युद्ध चंद सकलानी का  स्वागत तथा सम्मान भी किया।

 इस मौके पर युद्ध चंद सकलानी ने कहा कि नेरचौक नगर परिषद को उनकी मर्जी के खिलाफ उनके उपर थोपां गया था और वह लोगों के सहयोग से पिछले पांच सालों से नगर परिषद मे शामिल किए गए ग्रामीण क्षेत्रों को बाहर करने की लड़ाई लगातार लड़ रहे थे।  किसान नेता ने कहा कि भाजपा की सरकार अब अपने बायदे को पूरा करने जा रही है और इसके लिए लोग सरकार के आभारी हैं। गौर रहे की सकलानी की उम्र 95 प्लस है, लेकिन वह इस उम्र में भी  जनता से जुड़े मुद्धों पर संघर्ष कर रहे हैं।

रिपोर्ट : निजी संवाददाता, नेरचौक

जय किसान.. कम हाइट वाले इलाकों को तैयार की सेब नर्सरी

कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब के उत्पादन करने के लिए पझौता घाटी के गांव बांगी में सेब की नई किस्मों की नर्सरी तैयार करके 34 वर्षीय युवा प्रदीप हाब्बी ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। बिना किसी सरकारी सहायता से प्रदीप हाब्बी द्वारा विकसित पझौता नर्सरी फार्म में सेब की नई किस्मों के 25 हजार पौधे तैयार किए हैं। वर्तमान में करीब साढ़े तीन बीघा भूमि पर सेब की नर्सरी तैयार की गई है, जिनमें एम-9, एम-7, एमएम-106, एमएम-14 और एमएम-793 सेब की किस्में बिक्री के लिए तैयार है। इसके लिए लोगों द्वारा बुकिंग करनी भी शुरू कर दी गई है जिसका आगामी दिसंबर व जनवरी में सेब के पौधों को रोपण भी किया जाना प्रस्तावित है।

रिपोर्ट : निजी संवाददाता, यशवंतनगर

साथी हाथ बढ़ाना…पहाड़ों पर अगले चार माह के लिए घास जुटाने में जुटे किसान

हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में इन दिनों अगले चार माह के लिए घास जुटाने का दौर चल रहा है। इसमें लोग एक दूसरे की मदद भी करते हैं। पेश है सिरमौर के नौहराधार से निजी संवाददाता की यह रिपोर्ट

सर्दियां शुरू होने से पहले हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में किसान अगले चार माह के लिए पहाडिय़ों से घास काटने में जुट गए हैं।  कांगड़ा,चंबा, सोलन,शिमला सिरमौर के अलावा मंडी-कुल्लू जिलों में यह कार्य तेजी से चल रहा है। अपनी माटी टीम ने सिरमौर जिला के नौहराधार इलाके का दौरा किया। वहां किसानों ने बताया कि वे सुबह ग्रुपों में एकत्रित होकर घास काटने निकल पड़ते हैं। इस दौरान ढोलक की थाप पर पहाड़ी गानें भी खूब गूंजते हैं।

इस परंपरा की सबसे खास बात यह  है कि लोग चारा जुटाने में एक दूसरे की खूब मदद करते हैं। यह अनूठी परंपरा सिर्फ देवभूमि हिमाचल में ही मिलती है। गौर रहे कि पहाड़ी इलाकों में अब खूब बर्फ गिरने वाली है। ऐसे में पशुओं के लिए चारे का जुगाड़ करना आसान काम नहीं होता। यह किसानों का दुर्भाग्य है कि प्रदेश सरकार उन्हें ऐसे हाल में लडऩे के लिए छोड़ देती है। किसानों की मांग है कि उन्हें इन कठिन दिनों के लिए आर्थिक पैकेज मिलना चाहिए।

किन्नौरी सेब का साइज घटा, अब तक छह लाख पेटियां मार्केट में

इस बार किन्नौर जिला में सेब की बंपर फसल है,लेकिन फल का साइज छोटा है, वहीं तूफान ने भी कई जगह कहर बरपाया है। अभी तक जिला से छह लाख सेब पेटियां मार्केट में आ चुकी हैं। नवंबर मध्य तक चलने वाले सीजन में जिला से तीस लाख पेटियों का अनुमान है। जहां तक मार्केट की बात है,तो अभी तक निचले इलाकों का सेब आ रहा है। कुछ बागबानों की यह भी शिकायत है कि कई जगह सेब का कलर प्रॉपर नहीं है।

दूसरी ओर भावावैली के काफनु,कटगांव, यांगपा व पुरवनी गांवों में तूफान से सेब को भारी नुकसान हुआ है। तूफान से ड्रापिंग ने खूब कहर बरपाया है। विधायक  जगत सिंह नेगी ने  उद्यान व राजस्व विभागों को टीमें गठित कर नुकसान का आकलन करने  के निर्देश दिए हैं। वहीं उपायुक्त किन्नौर गोपाल चंद  ने कहा कि बागबानों को मुआवजा दिया जाएगा।

रिपोर्ट : दिव्य हिमाचल ब्यूरो, रिकांगपिओ

बरोट में 500 परिवार कर रहे आलू का कारोबार

इन दिनों पंजाब का आलू बंद होने से बरोट के आलू की खूब डिमांड बढ़ गई है। जिसके चलते लोकल आलू के दाम आसमान छूने लग गए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि चौहारघाटी व छोटा भंगाल के किसानों को आलू रिकार्ड तोड़ दाम मिले है। किसानों को बरोट के आलू के दाम कई वर्षो बाद 40 रुपए मिले हैं। जबकि गत वर्ष आलू का दाम पांच से छह रुपए मिला था। बरोट क्षेत्र का आलू  हिमाचल के अलावा बाहरी राज्यों, पंजाब, हरियाणा, जम्मू सहित कुछ राज्यों में खूब डिमांड है।

किसानों का कहना है कि इस बार आलू के अच्छे दाम मिल रहे हैं। वहीं अभी तक बाजार में बरोट का आलू 50-60 रुपए तक बिक है। हिमाचल में सबसे अधिक आलू का उत्पादन मंडी जिला के बरोट व लाहुल स्पीति में होता है। बरोट क्षेत्र में आलू की बिजाई करीब 250 हेक्टेयर भूमि होती है। उक्त क्षेत्र में कुफरी ज्योति किस्म का आलू का उत्पादन होता है।  आलू के उत्पादन कार्य चौहार वैली के टिक्कन, बरोट सुधार के अलावा अन्य क्षेत्रों से करीब 500 परिवार करते हैं। इसमें हर वर्ष करीब तीन हजार मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होता है।  क्षेत्र के किसान चमेल, राम सिंह, प्रेम चंद ने कहना कि गत वर्ष बरोट का  आलू पांच से छह रुपए बिका था।

उन्होंने बताया कि आलू की फसल कम हुई है। लेकिन इस बार दाम अच्छे मिले हैं। इस बारे में दं्रग क्षेत्र से कृषि विभाग के विशेषवाद विशेषज्ञ पूर्ण चंद ठाकुर का कहना है कि इन दिनों चौहारघाटी के आलू की खूब डिमांड है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में करीब 250 हेक्टेयर भूमि पर आलू की बिजाई की जाती है। इस कार्य को करीब 500 परिवार करते है।

रिपोर्ट : कार्यालय संवाददाता, मंडी

सूखे ने बर्बाद किया सोलन का टमाटर, किसान मायूस

सोलन जिला का टमाटर दुनिया भर में मशहूर है। अपनी खुशबू और साइज के लिए इस टमाटर को मार्केट में खूब तवज्जो मिलती है,लेकिन इस बार सोलन व आसपास के क्षेत्रों में ऐन मौके पर अंबर ने दगा दे दिया और नतीजा यह हुआ कि टमाटर की फसल कम हुई है। इससे टमाटर किसानों को भारी नुकसान हुआ है। सोलन में टमाटर ऐसी फसल है, जिस पर सैकड़ों किसानों की रोजी रोटी चलती है। ऐसे में किसानों को कोविड काल के बीच बड़ी चपत लगी है। किसानों का कहना है कि बरसात में प्राकृतिक जलस्त्रोत पूरी तरह से रिचार्ज हो जाते थे,लेकिन इस बार ये सोर्स भी सूखे सूखे से रहे। इससे टमाटर की रही सही उम्मीदें भी धराशायी हो गई।

रिपोर्टः सिटी रिपोर्टर, सोलन

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