अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के लिए जोड़-तोड़ शुरू, दोनों दल कर रहे जीत का दावा

By: Jan 24th, 2021 12:12 am

 कई जगह निर्दलीय प्रत्याशियों ने बिगाड़ा खेल, कांग्रेस ने लगाए पर्यवेक्षक

विशेष संवाददाता—शिमला

जिला परिषद व बीडीसी के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इनके अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की तैनाती के लिए सियासत गरमाएगी। पार्टी चिन्ह पर चुनाव नहीं होने के बावजूद राजनीतिक दलों की पूरी दावेदारी इसमें रहती है। ऐसे में जोड़-तोड़ के लिए भाजपा व कांगे्रस ने अपने पत्ते बिछाने शुरू कर दिए हैं। राज्य भर में सभी जिला परिषद सीटों के लिए अपरोक्ष रूप से भाजपा व कांग्रेस ने अपने समर्थकों को प्रत्याशी बनाकर उतारा था। इनके द्वारा पैनल दिए जाने की वजह से कई लोग बागी भी हा गए और जीतकर आ गए।

अब इन बागियों की सियासत चलेगी, जो अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनने के लिए जोड़-तोड़ करेंगे। अपरोक्ष रूप से जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के अलावा बीडीसी में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चयन किया जाएगा, जिसके लिए विभाग दिन तय करेगा। इनकी बैठक का दिन तय किया जाएगा। पंचायतों की बैठकें दो फरवरी को की जा रही हैं, जिसके साथ इनकी बैठक भी होगी और वहीं पर अध्यक्ष व उपाध्यक्ष तय किए जाएंगे। अब किसी जिला में किस दल का पलड़ा भारी रहता है, यह देखना होगा। वैसे अभी तक भाजपा का पलड़ा अधिकांश जिलों में भारी रहा है। हालांकि कांग्रेस की भी काफी सीटें हैं, लेकिन उतना बहुमत उसे नहीं मिला है। राजनीतिक दलों ने अपने नेताओं को जोड़तोड़ के लिए लगा दिया है, जिसमें कांग्रेस ने ऐसे पर्यवेक्षकों की सूची जारी  की है जो जिलों में जाकर जिला परिषद  अध्यक्षों व उपाध्यक्षों, बीडीसी अध्यक्षों व उपाध्यक्षों का चयन करेंगे।

कांगड़ा जिला में भाजपा का दबदबा

धर्मशाला। जिला परिषद चुनावों में प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में हुए 54 जिला परिषद वार्डों के चुनाव में सत्ताधारी दल भाजपा का दबदबा रहा है। कुल घोषित 52 जिला परिषद परिणामों में से सत्ताधारी दल भाजपा के 25 लोग चुनाव जीत कर आए हैं, जबकि छह ऐसे आजाद प्रत्याशी चुनाव जीत कर आए हैं, जो भाजपा समर्थित हैं। ऐसे में भाजपा करीब 31 के आंकड़े पर पहुंच गई है, जबकि कांग्रेस समर्थित 18 प्रत्याशी चुनाव जीत कर आए हैं और तीन प्रत्याशी आजाद हैं। ऐसे में कांगड़ा जिला में जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर सत्ताधारी दल भाजपा का कब्जा होता दिख रहा है। हालांकि कांग्रेस भी अभी अपने अध्यक्ष बनाने का दावा कर रही है। भाजपा 40 प्लस के लक्ष्य को लेकर चुनाव लड़ रही थी, लेकिन कई विधानसभा क्षेत्रों में सत्ताधारी दल को बड़ा झटका लगा है। भाजपा के कई मंत्री और विधायकों को भी इन जिला परिषद चुनावों में बड़ा झटका लगा है, तो कई विधायकों ने अपनी धाक भी जमाई है।

सोलन में आजाद के हाथ सत्ता की चाबी

सोलन। जिला परिषद सोलन के कुल 17 वार्डों के चुनाव में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद की हॉट सीट के लिए चाबी निर्दलियों के हाथ में आ गई है। किसी भी पार्टी को बहुमत मिलता दिखाई नहीं दे रहा है तथा अस्पष्ट परिदृश्य के बीच प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा जोड़-तोड़ शुरू कर दिया गया है। जिला परिषद के कुल 17 वार्डों में सात सीटों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने परचम फहराया है तथा तीन सीटों पर कांग्रेस ने बाजी मारी है। शेष सात वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने विजय प्राप्त कर भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के राजनीतिक गणित को भी बिगाड़ दिया है। जिला में इस महत्त्वपूर्ण चुनाव ने कई बड़े नेताओं के भविष्य पर कुठाराघात किया है तथा कुछ नेता अपनी पार्टी से दंश झेलकर भी कुंदन बन कर उभरे हैं। टिकट  आवंटन में जहां भाजपा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर कब्जा करने की हसरतों में कांटे बिछा दिए हैं, वहीं कांग्रेस के इस चुनाव में गिरे ग्राफ ने हाइकमान को चिंता में डाल दिया है।

हमीरपुर में जबरन थोपे प्रत्याशियों को नकारा

हमीरपुर। जिला हमीरपुर के 18 जिला परिषद वार्डों के आए चुनाव परिणामों ने जहां पार्टी संगठनों के बड़े ओहदेदारों की जमीनी पकड़ की पोल खोलकर रख दी है, वहीं एक तस्वीर और साफ हो गई है कि पार्टियों द्वारा जबरन जनता पर थोपे गए उम्मीदवार लोगों को दिलो-दिमाग पर नहीं उतर रहे हैं। शनिवार को सभी वार्डों के चुनाव परिणामों के बाद भाजपा नौ सीटों पर, जबकि कांग्रेस छह ही सीटों पर अपना वर्चस्व कायम कर पाई।

इसके अलावा दो सीटों पर जनता ने न बीजेपी का साथ दिया न कांग्रेस का, वहां निर्दलीय पर भरोसा जताया, जबकि एक सीट सीपीआईएम ने कब्जाई है। चुनावों के बाद एक बार फिर जनता ने दोनों पार्टियों को संदेश देने के प्रयास किया कि अब ऐसा नहीं चलेगा कि पार्टी का टिकट किसी को भी थमा दिया और यह उम्मीद पाल ली कि वह जीत जाएगा। जनता केवल उसी का साथ देगी, जिसकी पूर्व में जनता के प्रति परफॉमेंस रही होगी। साथ ही पब्लिक ने अपने वोटों से यह भी संदेश देने का प्रयास किया है कि बाहरी लोगों को लाने का चलन अब नहीं चलेगा। आपको उसी क्षेत्र से उ मीदवार सिलेक्ट करना होगा जहां चुनाव हो रहे हैं।

कांग्रेस ने तैनात किए आब्जर्वर

कांग्रेस उपाध्यक्ष विधायक राजेंद्र राणा को कांगड़ा, चंद्र कुमार को चंबा, रामलाल ठाकुर को कुल्लू, हर्ष महाजन को मंडी, पवन काजल को हमीरपुर, गंगूराम मुसाफिर को शिमला, हर्षवर्धन चौहान को बिलासपुर, नंदलाल को सोलन, लखविंदर राणा को ऊना, कैलाश पराशर को सिरमौर व केहर सिंह खाची को किन्नौर का पार्टी ऑब्जर्वर बनाया गया है।

ऊना में भाजपा को दूसरी बार बहुमत

ऊना। जिला परिषद ऊना के चुनावों में भाजपा ने बढ़त प्राप्त करते हुए जिला की 17 में से नौ सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली है। इस दफा तीन निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव जीत पाने में सफल हुए हैं। भाजपा को लगातार दूसरी बार जिला परिषद ऊना में स्पष्ट बहुमत मिला है। इस बार जिला परिषद अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। भाजपा ने इस दफा अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित रायपुर सहोड़ा व पालकवाह जिला परिषद वार्डो में एससी महिला प्रत्याशियों को चुनावी समर में उतारा था, लेकिन पालकवाह में भाजपा प्रत्याशी की हार के बाद अब इस पद पर रायपुर सहोड़ा जिला परिषद वार्ड से जीती भाजपा समर्थित प्रत्याशी नीलम का अध्यक्ष बनना भी तय माना जा रहा है। उपाध्यक्ष पद के लिए भाजपा के जीते हुए आठ जिला परिषद सदस्यों में किसकी लॉटरी लगेगी, इस पर सभी की निगाहे टिकी है।

निर्दलीय करेंगे बिलासपुर का फैसला

बिलासपुर। जिला परिषद बिलासपुर की चेयरमैनी का फैसला इस बार निर्दलीयों के हाथ में होगा। घोषित किए गए चुनाव परिणाम के तहत भाजपा समर्थित छह, तीन कांग्रेस और पांच निर्दलीय जीतकर आए हैं। खास बात यह है कि निकाय चुनाव में बहुमत के बावजूद मात खा गए श्रीनयनादेवी के पूर्व विधायक रणधीर शर्मा ने जिला परिषद की तीन सीटें जिताकर यहां बाजी मारते हुए कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामलाल ठाकुर, झंडूता के विधायक जेआर कटवाल, घुमारवीं के विधायक एवं सरकार में मंत्री राजेंद्र और सदर विधायक सुभाष ठाकुर को एक एक सीट पर संतोष करना पड़ा। बागियों ने इस बार समीकरण ही बदल डाले हैं। कांग्रेस ने निर्दलीय जीते पांच प्रत्याशियों पर पार्टी विचारधारा से जुड़े होने का दावा किया है, लेकिन करणी सेना ने बरमाणा वार्ड पर अपना दावा किया है। इस वार्ड से सबसे कम आयु की 21 वर्षीय एडवोकेट मुस्कान जीतकर राजनीति क्षेत्र में कदम रखा है।

मंडी में युवाओं ने पलटे आंकड़े

मंडी। जिला परिषद के चुनावों में मंडी जिला में इस बार युवाओं व बागी प्रत्याशियों ने दिग्गजों को बड़ा सबक सिखाया है। युवाओं, वामपंथी व बागी उम्मीदवारों की जीत ने भाजपा व कांग्रेस के दिग्गजों के सारे समीकरण पलट दिए हैं। इन प्रत्याशियों के बढ़ते कदम न तो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर रोक सके और न ही जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह व भाजपा के विधायक विजय रथ को रुकवा सके। बागियों की वजह से दोनों दलों के उम्मीदवार तीसरे व चौथे नंबर तक खिसक गए हैं। थौना वार्ड से चंद्र मोहन शर्मा, भड़याल से भाजपा के बागी पाल वर्मा, महादेव वार्ड से कांग्रेस बागी जसवीर, थाची वार्ड से भाकपा की हीमा, ब्रयोगी से भाजपा बागी मीरा, डलाह वार्ड से रविकांत और नवाही से मुनीष कुमार की ऐसी बड़ी जीत हैं, जो कि बडे़ नेताओं को लंबे समय तक याद रहने वाले जख्म दे गई हैं।

चंबा में भाजपा ने जमाया कब्जा, दस सीटें जीतीं

चंबा। जिला परिषद चंबा की सत्ता पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया है। जिला की अठारह जिला परिषद सीटों के घोषित नतीजों में भाजपा ने विरोधी दलों को पछाड़ते हुए अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के लिए बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। जिला परिषद की दस सीटों पर विशुद्ध रूप से भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया। पांच सीटों पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी जीते हैं। तीन सीटों पर जीते प्रत्याशियों की दलीय स्थिति स्पष्ट नही हो पाई है। हालांकि जिला भाजपा संगठन ने चौदह सीटें जीतने का दावा किया है।

कुल्लू में नौ दिग्गज हारे, नए चेहरे आए सामने

कुल्लू। जिला परिषद कुल्लू के चुनाव में कई दिग्गज नेताओं को नए प्रत्याशियों ने धूल चटा दी है। भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गज तो बड़े-बडे़ ओहदे पर हैं और कई जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर भी रहे हैं। जिला परिषद के 14 वार्डों में नौ के करीब दिग्गज सत्तासीन भाजपा और विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस पार्टी के दिक्कज नेता चुनावी जंग में उतरे थे, लेकिन चुनावी मैदान में उन्हें भारी हार का सामना करना पड़ा। जिलाध्यक्ष से लेकर प्रदेश कार्यकारिणी में हारे हुए नेता शामिल हैं, लेकिन इन नेताओं को जनता ने नकार दिया और नए चेहरों को चुन लिया गया।

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