विनायक चतुर्थी : भगवन गणेश को समर्पित उत्सव

By: Jan 16th, 2021 12:30 am

विनायक चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। यह पर्व हिंदू धर्म के मानने वालों का मुख्य पर्व है। विनायक चतुर्थी को गणेशोत्सव के रूप में सारे विश्व में हर्षोल्लास व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। भारत में इसकी धूम यूं तो सभी प्रदेशों में होती है, परंतु विशेष रूप से यह महाराष्ट्र में मनाया जाता है…

विनायक, संकष्टी एवं गणेश चतुर्थी

हिंदू कैलेंडर में प्रत्येक चंद्र मास में दो चतुर्थी होती है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की तिथि है। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। हालांकि विनायक चतुर्थी का व्रत हर महीने में होता है, लेकिन सबसे मुख्य विनायक चतुर्थी का व्रत भाद्रपद के महीने में होता है। भाद्रपद के दौरान पड़ने वाली विनायक चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। संपूर्ण विश्व में गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

महाराष्ट्र का मुख्य पर्व

विनायक चतुर्थी के उत्सव को महाराष्ट्र का मुख्य पर्व भी कहा जा सकता है। इस दिन लोग मौहल्लों और चौराहों पर प्रथम पूज्य भगवान गणेशजी की मूर्ति की स्थापना करते हैं। आरती और भगवान श्री गणेश के जयकारों से सारा माहौल गूंज रहा होता है। इस उत्सव का अंत अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश की मूर्ति समुद्र में विसर्जित करने के बाद होता है।

कथा

गणेश चतुर्थी व्रत को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलन में है। इस कथा के अनुसार एक बार भगवान शंकर और माता पार्वती नर्मदा नदी के निकट बैठे थे। वहां देवी पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से समय व्यतीत करने के लिए चौपड़ का खेल खेलने को कहा। भगवान शंकर चौपड़ खेलने के लिए तैयार तो हो गए, परंतु इस खेल में हार-जीत का फैसला कौन करेगा, इसका प्रश्न उठाए इसके जवाब में भगवान भोलेनाथ ने कुछ तिनके एकत्रित कर उसका पुतला बनाकर, उस पुतले की प्राण प्रतिष्ठा कर दी और पुतले से कहा कि, ‘बेटा हम चौपड़ खेलना चाहते हैं, परंतु हमारी हार-जीत का फैसला करने वाला कोई नहीं है। इसलिए तुम बताना कि हम में से कौन हारा और कौन जीता।’

चौपड़ का खेल

यह कहने के बाद चौपड़ का खेल प्रारंभ हो गया। खेल तीन बार खेला गया और संयोग से तीनों बार पार्वती जी जीत गईं। खेल के समाप्त होने पर बालक से हार-जीत का फैसला करने के लिए कहा गया, तो बालक ने महादेव को विजयी बताया। यह सुनकर माता पार्वती क्रोधित हो गईं और उन्होंने क्रोध में आकर बालक को लंगडा होने व कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया। बालक ने माता से माफी मांगी और कहा, ‘मुझसे अज्ञानतावश ऐसा हुआ, मैंने किसी द्वेष में ऐसा नहीं किया।’ बालक के क्षमा मांगने पर माता ने कहा, ‘यहां गणेश पूजन के लिए नाग कन्याएं आएंगी, उनके कहे अनुसार तुम गणेश व्रत करो, ऐसा करने से तुम मुझे प्राप्त करोगे।’ यह कहकर माता पार्वती भगवान शिव के साथ कैलाश पर्वत पर चली गईं।

गणेश का प्रसन्न होना

ठीक एक वर्ष बाद उस स्थान पर नाग कन्याएं आईं। नाग कन्याओं से श्री गणेश के व्रत की विधि मालूम करने पर उस बालक ने 21 दिन लगातार गणेश जी का व्रत किया। उसकी श्रद्धा देखकर भगवान गणेश प्रसन्न हो गए और उन्होंने बालक को मनोवांछित फल मांगने के लिए कहा। बालक ने कहा, ‘हे विनायक! मुझमें इतनी शक्ति दीजिए कि मैं अपने पैरों से चलकर अपने माता-पिता के साथ कैलाश पर्वत पर पहुंच सकूं और वे यह देख प्रसन्न हों।’ बालक को यह वरदान देकर भगवान गणेश अंतर्ध्यान हो गए। बालक इसके बाद कैलाश पर्वत पर पहुंच गया और वहां पहुंचने की कथा उसने भगवान महादेव को सुनाई। उस दिन से पार्वती जी शिवजी से विमुख हो गईं। देवी के रुष्ट होने पर भगवान शंकर ने भी बालक के बताए अनुसार गणेश का व्रत 21 दिनों तक किया। इसके प्रभाव से माता के मन से भगवान भोलेनाथ के लिए जो नाराजगी थी, वह समाप्त हो गई।

माता पार्वती का व्रत रखना

यह व्रत विधि भगवान शंकर ने माता पार्वती को बताई। यह सुनकर माता पार्वती के मन में भी अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा जाग्रत हुई। माता ने भी 21 दिन तक श्री गणेश व्रत किया और दूर्वा, पुष्प और लड्डुओं से श्री गणेश जी का पूजन किया। व्रत के 21वें दिन कार्तिकेय स्वयं पार्वती जी से आ मिले। उस दिन से श्री गणेश चतुर्थी का व्रत मनोकामना पूरी करने वाला व्रत माना जाता है।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या किसी जनप्रतिनिधि को बस में यात्रा करते देखा?

View Results

Loading ... Loading ...

Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV